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बार-बार थकान और सुस्ती हो सकती है गंभीर बीमारी का संकेत, NHM की चेतावनी

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बार-बार थकान और सुस्ती हो सकती है गंभीर बीमारी का संकेत, NHM की चेतावनी

सारांश

थकान को नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है — NHM के अनुसार यह मोटापे, डायबिटीज और हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। रोज़ाना 30-45 मिनट की शारीरिक गतिविधि, कम नमक-चीनी-तेल और पर्याप्त पानी से इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।

मुख्य बातें

NHM के अनुसार बार-बार थकान और सुस्ती मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत हो सकती है।
अनियंत्रित वज़न बढ़ने से शरीर के अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे ऊर्जा का स्तर गिरता है।
थकान के साथ वज़न वृद्धि, साँस फूलना या भूख न लगना दिखे तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।
रोज़ाना 30 से 45 मिनट पैदल चलना, योग या शारीरिक गतिविधि ज़रूरी है।
नमक, चीनी और तेल-घी का सेवन सीमित रखें; गर्मियों में पर्याप्त पानी पिएँ।

नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बार-बार होने वाली थकान और सुस्ती को सामान्य जीवनशैली की थकान समझकर नज़रअंदाज़ करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, यह लक्षण अक्सर मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों का प्रारंभिक संकेत होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं की जड़ बन सकता है।

थकान को सामान्य मानना पड़ सकता है भारी

आधुनिक जीवनशैली में अधिकांश लोग खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और अनियमित नींद के बीच जी रहे हैं। इन सभी कारकों का सम्मिलित प्रभाव शरीर की ऊर्जा को धीरे-धीरे क्षीण करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब लोग थकान महसूस होने पर महज़ चीनी-पानी या अतिरिक्त नींद से काम चलाते हैं, तो असली कारण की अनदेखी होती रहती है और समस्या भीतर ही भीतर गहरी होती जाती है।

मोटापा और थकान का गहरा संबंध

NHM के आँकड़ों के अनुसार, अनियंत्रित वज़न बढ़ने से शरीर के विभिन्न अंगों — विशेषकर हृदय, यकृत और जोड़ों — पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह दबाव शरीर की ऊर्जा-उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति पूरे दिन थका हुआ और सुस्त महसूस करता है। गौरतलब है कि यह एक चक्रीय समस्या है — थकान के कारण शारीरिक गतिविधि घटती है, जिससे मोटापा और बढ़ता है।

किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि थकान के साथ-साथ वज़न में अचानक वृद्धि, साँस फूलना या भूख न लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना देर किए चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। ये संकेत शरीर में किसी अंतर्निहित चयापचय विकार की ओर इशारा कर सकते हैं जिसका शीघ्र निदान ज़रूरी है।

बचाव के लिए अपनाएँ ये आदतें

NHM ने थकान और सुस्ती से बचाव के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। नमक का सेवन सीमित रखें क्योंकि अधिक नमक रक्तचाप बढ़ाता है और थकान को बढ़ावा देता है। तेल और घी का उपयोग कम करें और संतुलित, कम वसा वाला भोजन अपनाएँ। चीनी की मात्रा नियंत्रित रखें — अत्यधिक मीठे पदार्थ मोटापे और डायबिटीज को आमंत्रण देते हैं।

रोज़ाना कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलना, योग या अन्य शारीरिक गतिविधि करना अनिवार्य बताया गया है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज़रूरी है, क्योंकि निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) भी थकान का एक प्रमुख कारण होता है।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि छोटी-छोटी स्वस्थ आदतें बड़े रोगों की रोकथाम में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। थकान को 'सामान्य' मानकर चलते रहना उचित नहीं है — इसके मूल कारण की पहचान और समय पर उपचार ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की कुंजी है। जीवनशैली में सुधार और नियमित स्वास्थ्य जाँच से इन बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही इस समस्या को खतरनाक बनाती है। NHM की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देश में गैर-संचारी रोगों (NCDs) का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है और प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचे पर दबाव पहले से अधिक है। असली सवाल यह है कि जागरूकता अभियानों के बावजूद लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब बीमारी गंभीर हो चुकी होती है। जब तक निवारक स्वास्थ्य देखभाल को इलाज जितनी प्राथमिकता नहीं मिलती, ये सलाहें केवल कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बार-बार थकान और सुस्ती किस बीमारी का संकेत हो सकती है?
NHM के अनुसार, बार-बार होने वाली थकान मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत हो सकती है। यह लक्षण शरीर के अंदरूनी असंतुलन की चेतावनी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
थकान और मोटापे का क्या संबंध है?
जब शरीर का वज़न अनियंत्रित रूप से बढ़ता है, तो हृदय, यकृत और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे ऊर्जा का स्तर घटता है। यह एक चक्रीय समस्या है — थकान से शारीरिक गतिविधि कम होती है और मोटापा और बढ़ता है।
किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि थकान के साथ-साथ अचानक वज़न बढ़ना, साँस फूलना या भूख न लगना जैसे लक्षण भी दिखें, तो बिना देर किए चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। ये संकेत किसी गंभीर चयापचय विकार की ओर इशारा कर सकते हैं।
थकान से बचाव के लिए NHM ने क्या सुझाव दिए हैं?
NHM ने रोज़ाना 30 से 45 मिनट पैदल चलना, योग या शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी है। इसके अलावा नमक, चीनी और तेल-घी का सेवन सीमित रखें और गर्मियों में पर्याप्त पानी पिएँ ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
क्या थकान को सामान्य जीवनशैली की समस्या मानना सही है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, थकान को 'सामान्य' मानकर नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है। इसके मूल कारण की पहचान और समय पर उपचार ज़रूरी है, क्योंकि अनदेखी से यह आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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