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लगातार थकान और कमज़ोरी? लिवर की खराबी हो सकती है वजह — जानें बचाव के आसान उपाय

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लगातार थकान और कमज़ोरी? लिवर की खराबी हो सकती है वजह — जानें बचाव के आसान उपाय

सारांश

दिनभर की थकान और ऊर्जा की कमी को सामान्य न समझें — यह लिवर की चेतावनी हो सकती है। NHM के अनुसार, लिवर शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स तंत्र है और इसकी कार्यक्षमता घटते ही पूरा शरीर प्रभावित होता है। सही आहार, पर्याप्त पानी और व्यायाम से बचाव संभव है।

मुख्य बातें

लगातार थकान, कमज़ोरी और ऊर्जा की कमी लिवर की खराबी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार, लिवर शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स तंत्र है जो टॉक्सिन्स बाहर निकालता है।
लक्षण दो सप्ताह से अधिक बने रहने पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाने की सलाह दी जाती है।
रोज़ाना 8-10 गिलास पानी और 30-45 मिनट व्यायाम लिवर स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।
फास्ट फूड, तला-भुना खाना और मदिरा लिवर के लिए सर्वाधिक हानिकारक हैं — इनसे पूरी तरह परहेज़ करें।
तनाव कम करने के लिए ध्यान और प्राणायाम का नियमित अभ्यास लिवर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

नई दिल्ली: यदि आप सुबह उठते ही थका हुआ महसूस करते हैं, दिनभर ऊर्जा की कमी रहती है या छोटे-छोटे कामों में भी सांस फूलने लगती है, तो इसे केवल दिनचर्या की थकान न समझें। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार, ये लक्षण लिवर की कार्यक्षमता में गिरावट के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इन संकेतों को पहचानना और जीवनशैली में बदलाव करना गंभीर लिवर रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

लिवर शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स तंत्र है

लिवर मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को संग्रहीत करने, हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने जैसे अनेक कार्य एक साथ करता है। जब लिवर पर अत्यधिक बोझ पड़ता है — चाहे वह अनुचित खानपान से हो, शराब के सेवन से या अनियमित दिनचर्या से — तो उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे थकान, कमज़ोरी और ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण उभरते हैं। गौरतलब है कि ये लक्षण अक्सर इतने सामान्य लगते हैं कि लोग इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे समस्या और गहरी हो जाती है।

लिवर की खराबी के प्रमुख संकेत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित लक्षण लिवर से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं:

सुबह उठते ही थकान महसूस होना — भरपूर नींद के बाद भी ताज़गी न मिलना। दिन में बार-बार ऊर्जा का गिरना — बिना अधिक परिश्रम के ही थकान का अनुभव। छोटे कामों में सांस फूलना — यह लिवर की कार्यक्षमता पर असर का संकेत हो सकता है। भूख में कमी या पाचन संबंधी समस्याएँ — लिवर पाचन में सहायक पित्त रस बनाता है; इसकी गड़बड़ी सीधे पाचन को प्रभावित करती है।

डॉक्टरों का सुझाव है कि यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो रक्त परीक्षण के ज़रिये लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) अवश्य करवाएँ।

लिवर को स्वस्थ रखने के प्रभावी उपाय

संतुलित और पौष्टिक आहार: हरी सब्ज़ियाँ, ताज़े फल, साबुत अनाज और दालें लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक होती हैं। चीनी, मैदा और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से यथासंभव परहेज़ करें।

पर्याप्त जलयोजन: रोज़ाना कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीना लिवर को टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है। पानी की कमी लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को धीमा कर देती है।

नियमित व्यायाम: प्रतिदिन 30 से 45 मिनट की पैदल चाल, योग या कोई भी शारीरिक गतिविधि लिवर को सक्रिय रखती है और फैटी लिवर के जोखिम को कम करती है।

किन चीज़ों से बचें

विशेषज्ञों के अनुसार, फास्ट फूड, तला-भुना खाना और मदिरा का सेवन लिवर के लिए सर्वाधिक हानिकारक है। ये पदार्थ लिवर पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं और दीर्घकाल में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इनसे पूरी तरह दूरी बनाना आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त, रात को समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना और तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान (मेडिटेशन) व प्राणायाम का नियमित अभ्यास लिवर स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि 'लिवर स्वस्थ तो शरीर स्वस्थ' — यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान का एक स्थापित तथ्य है। NHM के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लिवर संबंधी अधिकांश समस्याओं को शुरुआती अवस्था में ही रोक सकते हैं। यदि लक्षण गंभीर हों तो बिना देरी किए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण चूक है — थकान के दर्जनों कारण हो सकते हैं, जैसे एनीमिया, थायरॉइड विकार या मधुमेह, और इन्हें लिवर से सीधे जोड़ना भ्रामक हो सकता है। विशेषज्ञ परामर्श के बिना स्व-निदान की प्रवृत्ति स्वास्थ्य जागरूकता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य चिंता को बढ़ावा दे सकती है। जनस्वास्थ्य संचार में यह ज़रूरी है कि लक्षणों को किसी एक अंग से जोड़ने की बजाय समग्र चिकित्सीय जाँच पर बल दिया जाए। NHM के दिशा-निर्देश सराहनीय हैं, पर इनका संदेश तभी प्रभावी होगा जब इसके साथ 'पहले डॉक्टर से मिलें' की स्पष्ट सलाह हो।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थकान और लिवर की बीमारी में क्या संबंध है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार, जब लिवर ठीक से काम नहीं करता तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे थकान, कमज़ोरी और ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण उभरते हैं। हालाँकि थकान के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सक से परामर्श ज़रूरी है।
लिवर की खराबी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
सुबह उठते ही थकान महसूस होना, दिनभर ऊर्जा में कमी, छोटे कामों में सांस फूलना और पाचन संबंधी समस्याएँ लिवर की खराबी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें तो लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाना उचित रहता है।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, हरी सब्ज़ियाँ, ताज़े फल, साबुत अनाज और दालें लिवर के लिए फायदेमंद हैं। चीनी, मैदा, प्रोसेस्ड फूड, तला-भुना खाना और मदिरा से परहेज़ करना चाहिए।
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कब करवाना चाहिए?
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि थकान, कमज़ोरी या ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो रक्त परीक्षण के ज़रिये लिवर फंक्शन टेस्ट अवश्य करवाएँ। यह परीक्षण लिवर की कार्यक्षमता का सटीक आकलन करता है।
क्या व्यायाम से लिवर स्वस्थ रहता है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन 30 से 45 मिनट की पैदल चाल, योग या कोई भी शारीरिक गतिविधि लिवर को सक्रिय रखती है और फैटी लिवर के जोखिम को कम करती है। नियमित व्यायाम के साथ पर्याप्त पानी पीना भी लिवर के डिटॉक्सिफिकेशन में सहायक होता है।
राष्ट्र प्रेस
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