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दिनभर थकान और सुस्ती: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी, इन 5 गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत

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दिनभर थकान और सुस्ती: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी, इन 5 गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत

सारांश

दिनभर की थकान और सुस्ती सिर्फ भागदौड़ का नतीजा नहीं — यह डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय रोग का शुरुआती संकेत हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ाना 30-45 मिनट व्यायाम और संतुलित खानपान से इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार थकान शरीर में पनप रही गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक लक्षण हो सकती है।
मोटापा , अनियमित खानपान , तनाव और नींद की कमी थकान को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
लंबे समय तक थकान रहने पर डायबिटीज़ , हाई ब्लड प्रेशर , फैटी लीवर और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है।
थकान के साथ वज़न बढ़ना , सांस फूलना या भूख कम लगना हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श ज़रूरी।
रोज़ाना कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलना या योग करना और पर्याप्त पानी पीना बचाव में सहायक।

लगातार थकान और सुस्ती को यदि आप काम के बोझ या कम नींद का नतीजा मानकर नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत आपको भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार महसूस होने वाली थकान शरीर का एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत है, जो डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआत की ओर इशारा कर सकता है। 12 जून को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस विषय पर विस्तृत सलाह जारी की है।

थकान और मोटापे का सीधा संबंध

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर का वज़न बढ़ने के साथ ही विभिन्न अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है, जिससे व्यक्ति जल्दी थकने लगता है। मोटापा और उससे जुड़ी समस्याओं का असर सबसे पहले ऊर्जा स्तर पर दिखाई देता है — यह केवल शारीरिक कमज़ोरी का नहीं, बल्कि भीतर पनप रही बीमारी का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। गौरतलब है कि भारत में मोटापे की दर पिछले एक दशक में तेज़ी से बढ़ी है, जिससे इस संकेत को और गंभीरता से लेने की ज़रूरत है।

थकान के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों ने कई कारणों को ज़िम्मेदार ठहराया है — अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना। इनमें से किसी एक या एक से अधिक कारणों का एक साथ होना शरीर की ऊर्जा को तेज़ी से क्षीण करता है। यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब शहरी भारत में गतिहीन जीवनशैली तेज़ी से बढ़ रही है।

किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि थकान के साथ-साथ वज़न में बढ़ोतरी, सांस फूलना, भूख कम लगना या अन्य शारीरिक बदलाव भी नज़र आएँ, तो बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है। लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान के मूल कारणों की जाँच कराना उचित माना जाता है, क्योंकि समय पर पहचान से उपचार आसान और प्रभावी हो सकता है।

बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव

विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना, तथा नमक, चीनी और तेल-घी का सीमित सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इसके साथ ही, रोज़ाना कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलना या योग करना भी ज़रूरी बताया गया है। गर्मियों के मौसम में डिहाइड्रेशन भी थकान का एक प्रमुख कारण बन सकता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना अत्यंत आवश्यक है।

आगे क्या करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें — नियमित व्यायाम, सही खानपान और पर्याप्त नींद — न केवल थकान और सुस्ती से राहत दिला सकती हैं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकती हैं। यदि जीवनशैली में बदलाव के बावजूद थकान बनी रहे, तो चिकित्सकीय जाँच को टालना उचित नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों भारतीयों तक यह संदेश पहुँचाने की व्यवस्था क्या है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 'थकान जाँच' जैसी कोई सुलभ सेवा अभी भी अपवाद है, नियम नहीं। जब तक रोकथाम को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, ऐसी सलाहें केवल जागरूक और संपन्न तबके तक ही पहुँचती रहेंगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिनभर थकान और सुस्ती किन बीमारियों का संकेत हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार थकान डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक लक्षण हो सकती है। यह शरीर की ओर से मिलने वाला एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
थकान और मोटापे का क्या संबंध है?
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर का वज़न बढ़ने पर विभिन्न अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति जल्दी थकने लगता है और पूरे दिन सुस्ती बनी रहती है। मोटापे से जुड़ी समस्याओं का असर सबसे पहले ऊर्जा स्तर पर दिखाई देता है।
थकान होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि थकान के साथ-साथ वज़न में बढ़ोतरी, सांस फूलना, भूख कम लगना या अन्य शारीरिक बदलाव भी नज़र आएँ, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है। लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान के मूल कारणों की जाँच कराना उचित माना जाता है।
थकान और सुस्ती से बचने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ संतुलित और पौष्टिक भोजन, नमक-चीनी-तेल का सीमित सेवन और रोज़ाना कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलने या योग करने की सलाह देते हैं। गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना भी ज़रूरी है क्योंकि डिहाइड्रेशन भी थकान का एक प्रमुख कारण है।
क्या थकान केवल नींद की कमी से होती है?
नहीं — विशेषज्ञों के अनुसार थकान के पीछे अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मानसिक तनाव और नींद की कमी सभी ज़िम्मेदार हो सकते हैं। केवल नींद पूरी करने से समस्या हल नहीं होती यदि अन्य कारण मौजूद हों।
राष्ट्र प्रेस
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