तेल, नमक, चीनी पर लगाम लगाएं: NHM की सलाह से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य सुधारें

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तेल, नमक, चीनी पर लगाम लगाएं: NHM की सलाह से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य सुधारें

सारांश

तेल, नमक और चीनी — ये तीन रोज़मर्रा की चीजें चुपचाप शरीर और मन दोनों को कमज़ोर कर रही हैं। NHM का कहना है कि इन्हें महज 10% घटाने से हफ्तों में फर्क दिखता है। छोटा बदलाव, बड़ा असर।

मुख्य बातें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अधिक तेल, नमक और चीनी को हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का प्रमुख कारण बताया है।
NHM की सलाह: खाना पकाने में उपयोग हो रहे तेल की मात्रा 10 प्रतिशत कम करें।
चाय, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और मिठाई में चीनी की मात्रा घटाएं; अचार, पापड़ और प्रोसेस्ड फूड में छिपे नमक पर भी नज़र रखें।
खराब खान-पान से थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और नींद की समस्या जैसी मानसिक परेशानियां भी बढ़ रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार घर का ताज़ा भोजन, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और रोज़ाना व्यायाम अपनाने से कुछ ही हफ्तों में सुधार संभव है।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, अनियंत्रित खान-पान — विशेष रूप से अधिक तेल, नमक और चीनी का सेवन — आज भारत में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की बीमारियों की प्रमुख वजह बन चुका है। 18 मई 2026 को जारी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में NHM ने स्पष्ट किया है कि इन तीन तत्वों की मात्रा पर नियंत्रण रखकर हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

खान-पान की बिगड़ती आदतें और उनके दुष्परिणाम

आधुनिक जीवनशैली में समय की कमी के कारण लोग अक्सर बाहर का खाना या झटपट बनने वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर निर्भर हो गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये खाद्य पदार्थ अत्यधिक नमक, चीनी और तेल से भरे होते हैं, जो स्वादिष्ट लगने के बावजूद शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। NHM के अनुसार, इनके नियमित सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं।

इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य पर भी इन आदतों का गंभीर असर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खराब खान-पान से थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और नींद की समस्या आम होती जा रही है — जो मिलकर जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करती हैं।

NHM के प्रमुख दिशानिर्देश

नेशनल हेल्थ मिशन ने रोज़ाना के खान-पान में तीन ठोस बदलावों की सिफारिश की है:

तेल: वर्तमान में उपयोग हो रहे तेल की मात्रा को कम से कम 10 प्रतिशत घटाएं। अधिक तेल से मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जो हृदय रोग का प्रमुख कारण है।

चीनी: चाय, दूध, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस में चीनी की मात्रा सीमित करें। अधिक चीनी से वजन बढ़ना, डायबिटीज और दांतों की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

नमक: खाना पकाते समय नमक कम डालें और टेबल सॉल्ट, अचार, पापड़ तथा प्रोसेस्ड फूड में छिपे नमक पर भी नज़र रखें। अधिक नमक सीधे ब्लड प्रेशर बढ़ाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव बड़े स्वास्थ्य लाभ दे सकते हैं। उनके अनुसार, यदि आज से ही इन तीनों की मात्रा थोड़ी कम की जाए, तो कुछ ही हफ्तों में शरीर में ऊर्जा और मानसिक सुकून में सुधार महसूस होने लगता है। विशेषज्ञ यह भी सुझाते हैं कि संतुलित खानपान अपनाएं, घर का बना ताज़ा भोजन खाएं, फल, सब्जियां और साबुत अनाज को प्राथमिकता दें और जंक फूड से परहेज़ करें।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में गैर-संचारी रोगों (NCDs) का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है और शहरी-ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खान-पान की आदतें बदल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रोज़ाना व्यायाम या पैदल चलना इन आहार बदलावों को और प्रभावी बनाता है।

गौरतलब है कि NHM के ये दिशानिर्देश उन लाखों भारतीयों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं जो व्यस्त जीवनशैली के चलते अपने खान-पान पर ध्यान नहीं दे पाते। सही आहार की ओर यह छोटा कदम दीर्घकालिक स्वास्थ्य की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सलाह देना और उसे ज़मीन पर उतारना दो अलग बातें हैं — खासकर तब जब भारत का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगातार उच्च-नमक, उच्च-चीनी उत्पादों का विस्तार कर रहा है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग और चीनी-नमक कर जैसे नीतिगत उपाय करेगी, या सिर्फ जागरूकता अभियानों पर निर्भर रहेगी। व्यक्तिगत जागरूकता ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं — जब तक खाद्य उद्योग पर संरचनात्मक नियंत्रण नहीं होगा, तब तक ये दिशानिर्देश सीमित असर ही छोड़ेंगे।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NHM के अनुसार तेल, नमक और चीनी से कौन-सी बीमारियां होती हैं?
नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार अधिक तेल, नमक और चीनी के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय संबंधी रोग होते हैं। इसके साथ ही थकान, तनाव और नींद की समस्या जैसी मानसिक परेशानियां भी बढ़ती हैं।
रोज़ाना खाने में तेल कितना कम करना चाहिए?
NHM की सिफारिश है कि वर्तमान में उपयोग हो रहे तेल की मात्रा को कम से कम 10 प्रतिशत घटाएं। अधिक तेल से मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जो हृदय रोग का कारण बनता है।
क्या खान-पान से मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है?
हां, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित खान-पान से थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और नींद की समस्या आम हो जाती है। तेल, नमक और चीनी की मात्रा नियंत्रित करने से मानसिक सुकून में भी सुधार होता है।
पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड में छिपे नमक से कैसे बचें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अचार, पापड़, टेबल सॉल्ट और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद नमक पर भी ध्यान दें। घर का ताज़ा बना भोजन खाना और जंक फूड से परहेज़ करना इसका सबसे प्रभावी उपाय है।
खान-पान में बदलाव का असर कितने समय में दिखता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आज से तेल, नमक और चीनी की मात्रा थोड़ी कम की जाए और रोज़ाना व्यायाम अपनाया जाए, तो कुछ ही हफ्तों में शरीर में ऊर्जा और मानसिक सुकून में सुधार महसूस होने लगता है।
राष्ट्र प्रेस
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