3 जुलाई 2026
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आईआईटी दिल्ली के एमप्रगति में सीएनसी व स्टेरिलाइजेशन लैब शुरू, भारतीय मेडटेक को मिलेगी आत्मनिर्भरता

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आईआईटी दिल्ली के एमप्रगति में सीएनसी व स्टेरिलाइजेशन लैब शुरू, भारतीय मेडटेक को मिलेगी आत्मनिर्भरता

सारांश

आईआईटी दिल्ली के एमप्रगति प्लेटफॉर्म में सीएनसी और स्टेरिलाइजेशन लैब का शुभारंभ भारतीय मेडटेक के लिए एक अहम कदम है — अब प्रयोगशाला में बने उपकरण तेज़ी से अस्पतालों तक पहुँच सकेंगे और आयात पर निर्भरता घटेगी।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली के एमप्रगति प्लेटफॉर्म में 3 जुलाई 2026 को अत्याधुनिक सीएनसी और स्टेरिलाइजेशन एवं पैकेजिंग प्रयोगशाला शुरू की गई।
ICMR के महानिदेशक डॉ.
राजीव बहल ने इन सुविधाओं का औपचारिक उद्घाटन किया।
लैब में मल्टी-एक्सिस मशीनिंग, स्विस-टाइप टर्निंग, लेजर वेल्डिंग, वैक्यूम पैकेजिंग और रियल-टाइम पीसीआर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
प्रत्यारोपण, सर्जिकल व दंत चिकित्सा उपकरण और नैदानिक पुर्जे अब देश में ही उच्च सटीकता से बनाए जा सकेंगे।
इस पहल का लक्ष्य विदेशी चिकित्सा उपकरणों पर भारत की निर्भरता कम करना और मरीजों तक किफ़ायती तकनीक तेज़ी से पहुँचाना है।

आईआईटी दिल्ली के राष्ट्रीय ट्रांसलेशनल प्लेटफॉर्म एमप्रगति में 3 जुलाई 2026 को अत्याधुनिक सीएनसी मशीनिंग तथा स्टेरिलाइजेशन एवं पैकेजिंग प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया, जो भारत में चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी विकास को नई गति देने के लिए स्थापित की गई हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रत्यारोपण, सर्जिकल उपकरण और नैदानिक तकनीकों को प्रयोगशाला से सीधे अस्पतालों और बाज़ार तक पहुँचाने की प्रक्रिया को तेज़ करना है। केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव तथा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने इन सुविधाओं का औपचारिक शुभारंभ किया।

नई प्रयोगशालाओं में क्या है खास

नई सीएनसी सुविधा मल्टी-एक्सिस मशीनिंग, स्विस-टाइप टर्निंग और हाई-स्पीड मिलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है। आईआईटी दिल्ली के अनुसार, यह प्रयोगशाला रोगी-विशिष्ट (patient-specific) तथा मानकीकृत — दोनों प्रकार के उपकरणों और पुर्जों के निर्माण में सक्षम है। इससे शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों को अपने विचारों को वास्तविक उत्पादों में बदलने में मदद मिलेगी।

स्टेरिलाइजेशन एवं पैकेजिंग प्रयोगशाला में उपकरणों को कीटाणुरहित बनाने, गुणवत्ता जाँचने, सुरक्षित पैकेजिंग करने और उपयोग अवधि का परीक्षण करने की सुविधाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। लेजर वेल्डिंग, लेजर मार्किंग, बैच कोडिंग और वैक्यूम पैकेजिंग जैसी व्यवस्थाएँ भी इसमें शामिल हैं।

किन उपकरणों के विकास में मिलेगी मदद

इन सुविधाओं के ज़रिए चिकित्सा प्रत्यारोपण, सर्जिकल उपकरण, दंत चिकित्सा उपकरण और विभिन्न नैदानिक जाँचों में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण पुर्जे देश में ही अधिक सटीकता के साथ तैयार किए जा सकेंगे। प्रयोगशाला में थर्मल साइक्लर, रियल-टाइम पीसीआर प्रणाली और ट्रांस-ब्लॉट प्रणाली सहित अनेक अत्याधुनिक जैविक अनुसंधान उपकरण भी स्थापित किए गए हैं।

आयात निर्भरता पर असर

भारत का मेडटेक क्षेत्र अभी तक उच्च-परिशुद्धता वाले चिकित्सा उपकरणों और उनके पुर्जों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को नीतिगत प्राथमिकता दे रही है। गौरतलब है कि एमप्रगति जैसे ट्रांसलेशनल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य अकादमिक शोध और व्यावसायिक उत्पाद के बीच की खाई को पाटना है — एक ऐसी चुनौती जो भारतीय मेडटेक स्टार्टअप्स के लिए लंबे समय से बाधा रही है।

व्यापक मेडटेक क्षेत्र पर प्रभाव

आईआईटी दिल्ली की ये नई सुविधाएँ केवल संस्थान के शोधकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगी — इनका लाभ देशभर के मेडटेक स्टार्टअप्स और उद्योग को भी मिलने की उम्मीद है। इससे भारत में विकसित चिकित्सा तकनीकों को व्यावसायिक रूप देने में मदद मिलेगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और मरीजों तक बेहतर व किफ़ायती स्वास्थ्य तकनीकें तेज़ी से पहुँच सकेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि एमप्रगति जैसे प्लेटफॉर्म शोध को वास्तविक व्यावसायिक उत्पाद में कितनी तेज़ी से बदल पाते हैं — भारत में यही 'वैली ऑफ डेथ' अब तक मेडटेक स्टार्टअप्स को निगलती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का चिकित्सा उपकरण आयात बिल हर साल बढ़ रहा है और नियामक ढाँचा अभी भी घरेलू नवाचार के अनुकूल बनने की प्रक्रिया में है। बिना स्पष्ट उद्योग-संस्थान साझेदारी मॉडल और नियामक त्वरण के, ये प्रयोगशालाएँ प्रभावशाली बुनियादी ढाँचा तो बन सकती हैं, पर बाज़ार में बदलाव लाने वाली शक्ति बनने में समय लग सकता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी दिल्ली के एमप्रगति में क्या नई सुविधाएँ शुरू की गई हैं?
एमप्रगति में अत्याधुनिक सीएनसी मशीनिंग प्रयोगशाला और स्टेरिलाइजेशन एवं पैकेजिंग प्रयोगशाला शुरू की गई हैं। इनमें मल्टी-एक्सिस मशीनिंग, लेजर वेल्डिंग, वैक्यूम पैकेजिंग और रियल-टाइम पीसीआर जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
इन प्रयोगशालाओं का भारतीय मेडटेक क्षेत्र पर क्या असर होगा?
इन सुविधाओं से चिकित्सा उपकरणों को प्रयोगशाला से सीधे अस्पतालों तक पहुँचाने की प्रक्रिया तेज़ होगी और विदेशी उपकरणों पर निर्भरता घटेगी। मरीजों तक किफ़ायती व बेहतर स्वास्थ्य तकनीकें तेज़ी से पहुँच सकेंगी।
एमप्रगति प्रयोगशाला का उद्घाटन किसने किया?
केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव तथा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने इन प्रयोगशालाओं का औपचारिक शुभारंभ किया।
इन लैब्स में किस तरह के चिकित्सा उपकरण बनाए जा सकेंगे?
इन प्रयोगशालाओं में चिकित्सा प्रत्यारोपण, सर्जिकल उपकरण, दंत चिकित्सा उपकरण और नैदानिक जाँचों में उपयोग होने वाले पुर्जे देश में ही उच्च सटीकता के साथ तैयार किए जा सकेंगे। रोगी-विशिष्ट और मानकीकृत — दोनों प्रकार के उत्पाद बनाना संभव होगा।
क्या ये सुविधाएँ केवल आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं के लिए हैं?
नहीं, आईआईटी दिल्ली के अनुसार ये सुविधाएँ पूरे देश के मेडटेक क्षेत्र के लिए उपलब्ध होंगी। इनका उद्देश्य शोधकर्ताओं के साथ-साथ स्टार्टअप्स और उद्योग को भी भारत में विकसित चिकित्सा तकनीकों को व्यावसायिक रूप देने में सहायता करना है।
राष्ट्र प्रेस
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