आईसीएमआर का 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' लॉन्च, 41 स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग को हस्तांतरित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 26 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में देश के सबसे बड़े जैव चिकित्सा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (आई2आई) कनेक्ट' का आयोजन किया, जिसमें 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग भागीदारों को हस्तांतरित की गईं। यह आयोजन जैव चिकित्सा नवाचार को प्रयोगशाला से बाज़ार तक पहुँचाने के लिए भारत के पहले संरचित समर्पित प्लेटफार्मों में से एक की स्थापना का प्रतीक है।
कार्यक्रम का उद्घाटन और मुख्य वक्तव्य
कार्यक्रम का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोबरधन दास की उपस्थिति में किया। मंत्री जाधव ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित होंगे जो जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करें और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएं।
जाधव ने यह भी कहा कि भारत अब स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का केवल उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि आईसीएमआर जैसे संस्थानों और सशक्त उद्योग साझेदारियों के बल पर किफायती एवं नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की दिशा में अग्रसर है।
विशेषज्ञों की राय
नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बनने की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। उन्होंने कहा कि 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्वदेशी नवाचारों को समाज तक पहुँचाने की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आईसीएमआर के महानिदेशक एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा कि यह पहल आईसीएमआर की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं की सीमाओं से आगे बढ़कर मजबूत उद्योग साझेदारी और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचना है।
हस्तांतरित प्रौद्योगिकियाँ और प्रमुख उपलब्धियाँ
इस आयोजन में 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग भागीदारों को हस्तांतरित की गईं, जिनमें उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं। विशेष रूप से टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट एवं रिकॉम्बिनेंट टीके, तथा जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान प्रौद्योगिकियाँ हस्तांतरित की गईं।
इसके अतिरिक्त, निष्क्रिय केएफडी और चंदीपुरा वायरस सहित महत्वपूर्ण जैव सामग्री भी उद्योग भागीदारों को सौंपी गई, जिससे भारत के जैव चिकित्सा अनुसंधान और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती मिली। आयोजन में 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी किया गया, जो आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित हैं।
रिपोर्ट और दस्तावेज़ जारी
कार्यक्रम के दौरान 'इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट' और 'टेक्नोलॉजी कंपेंडियम' भी जारी किए गए। ये दस्तावेज़ भारत के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत के रूप में काम करेंगे।
आगे की राह
यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर किफायती स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और भारत इस अंतर को पाटने की स्थिति में है।