10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईसीएमआर का 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' लॉन्च, 41 स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग को हस्तांतरित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईसीएमआर का 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' लॉन्च, 41 स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग को हस्तांतरित

सारांश

आईसीएमआर ने नई दिल्ली में देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम आयोजित किया — 41 स्वास्थ्य तकनीकें उद्योग को सौंपी गईं और 100 से अधिक का प्रदर्शन हुआ। यह पहल भारत को स्वास्थ्य तकनीकों के उपभोक्ता से वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

आईसीएमआर ने 26 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: आई2आई कनेक्ट' कार्यक्रम का आयोजन किया।
41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग भागीदारों को विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण के लिए हस्तांतरित की गईं।
हस्तांतरित तकनीकों में टाइफाइड, पैराटाइफाइड, जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक के लिए टीके व निदान उपकरण शामिल।
100 से अधिक प्रौद्योगिकियाँ प्रदर्शित; इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट और टेक्नोलॉजी कंपेंडियम जारी।
राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा — भारत किफायती स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की ओर अग्रसर है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 26 मई 2025 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में देश के सबसे बड़े जैव चिकित्सा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (आई2आई) कनेक्ट' का आयोजन किया, जिसमें 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग भागीदारों को हस्तांतरित की गईं। यह आयोजन जैव चिकित्सा नवाचार को प्रयोगशाला से बाज़ार तक पहुँचाने के लिए भारत के पहले संरचित समर्पित प्लेटफार्मों में से एक की स्थापना का प्रतीक है।

कार्यक्रम का उद्घाटन और मुख्य वक्तव्य

कार्यक्रम का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोबरधन दास की उपस्थिति में किया। मंत्री जाधव ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित होंगे जो जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करें और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएं।

जाधव ने यह भी कहा कि भारत अब स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का केवल उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि आईसीएमआर जैसे संस्थानों और सशक्त उद्योग साझेदारियों के बल पर किफायती एवं नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की दिशा में अग्रसर है।

विशेषज्ञों की राय

नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बनने की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। उन्होंने कहा कि 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्वदेशी नवाचारों को समाज तक पहुँचाने की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आईसीएमआर के महानिदेशक एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा कि यह पहल आईसीएमआर की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं की सीमाओं से आगे बढ़कर मजबूत उद्योग साझेदारी और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचना है।

हस्तांतरित प्रौद्योगिकियाँ और प्रमुख उपलब्धियाँ

इस आयोजन में 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ उद्योग भागीदारों को हस्तांतरित की गईं, जिनमें उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं। विशेष रूप से टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट एवं रिकॉम्बिनेंट टीके, तथा जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान प्रौद्योगिकियाँ हस्तांतरित की गईं।

इसके अतिरिक्त, निष्क्रिय केएफडी और चंदीपुरा वायरस सहित महत्वपूर्ण जैव सामग्री भी उद्योग भागीदारों को सौंपी गई, जिससे भारत के जैव चिकित्सा अनुसंधान और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती मिली। आयोजन में 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी किया गया, जो आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित हैं।

रिपोर्ट और दस्तावेज़ जारी

कार्यक्रम के दौरान 'इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट' और 'टेक्नोलॉजी कंपेंडियम' भी जारी किए गए। ये दस्तावेज़ भारत के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत के रूप में काम करेंगे।

आगे की राह

यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर किफायती स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और भारत इस अंतर को पाटने की स्थिति में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि हस्तांतरित 41 प्रौद्योगिकियाँ वास्तव में बाज़ार तक कितनी जल्दी और किस कीमत पर पहुँचती हैं। भारत में प्रयोगशाला-से-बाज़ार की यात्रा ऐतिहासिक रूप से नियामकीय अड़चनों और विनिर्माण क्षमता की कमी से बाधित रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा किफायती निदान और टीकों की माँग कर रहा है — भारत के लिए यह एक वास्तविक अवसर है, बशर्ते सार्वजनिक-निजी भागीदारी केवल समझौता-पत्रों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीएमआर का 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' कार्यक्रम क्या है?
यह भारत के पहले संरचित जैव चिकित्सा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्लेटफार्मों में से एक है, जिसे आईसीएमआर ने स्थापित किया है। इसका उद्देश्य स्वदेशी बायोमेडिकल अनुसंधान को उद्योग साझेदारी के माध्यम से वास्तविक स्वास्थ्य सेवा समाधानों में बदलना और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इस कार्यक्रम में कौन-सी प्रौद्योगिकियाँ हस्तांतरित की गईं?
कार्यक्रम में 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ हस्तांतरित की गईं, जिनमें टाइफाइड, पैराटाइफाइड, जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक के लिए टीके व निदान तकनीकें शामिल हैं। इसके अलावा निष्क्रिय केएफडी और चंदीपुरा वायरस जैसी जैव सामग्री भी उद्योग भागीदारों को सौंपी गई।
इस पहल का भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर क्या असर होगा?
यह पहल भारत को स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के उपभोक्ता से वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को बल मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में कौन-से दस्तावेज़ जारी किए गए?
'इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट' और 'टेक्नोलॉजी कंपेंडियम' जारी किए गए। ये दस्तावेज़ भारत के बायोमेडिकल नवाचार और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत के रूप में काम करेंगे।
इस कार्यक्रम में किसने भाग लिया?
कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल भी उपस्थित रहे। इसके अलावा आईसीएमआर संस्थानों के शोधकर्ता, स्टार्टअप और उद्योग हितधारक भी शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले