एससीटीआईएमएसटी के 42वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सराही तकनीक हस्तांतरण की भूमिका

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एससीटीआईएमएसटी के 42वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सराही तकनीक हस्तांतरण की भूमिका

सारांश

तिरुवनंतपुरम के एससीटीआईएमएसटी के 42वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संस्थान के उद्योग-अकादमिक सहयोग और स्वदेशी चिकित्सा उपकरण नवाचार की सराहना की। 130 स्नातकों को उपाधियाँ मिलीं। स्वास्थ्य सचिव ने आयुष्मान भारत और विनियामक सुधारों पर जोर दिया।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 16 मई 2025 को एससीटीआईएमएसटी के 42वें बैच के दीक्षांत समारोह को वर्चुअल संबोधित किया।
समारोह में कुल 130 स्नातकों को डीएम, एमसीएच, पीएचडी, एमपीएच सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
मंत्री ने स्वदेशी, किफायती चिकित्सा उपकरणों के विकास और उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में संस्थान की भूमिका की सराहना की।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने आयुष्मान भारत के तहत डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण और विनियामक सुधारों पर जोर दिया।
संस्थान के 'इंजीनियर-डॉक्टर सहयोग' मॉडल को चिकित्सा नवाचार के लिए अनुकरणीय बताया गया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 16 मई 2025 को तिरुवनंतपुरम स्थित श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) के 42वें बैच के वार्षिक दीक्षांत समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया और स्वदेशी, किफायती चिकित्सा उपकरणों के विकास तथा उद्योग जगत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में संस्थान की सराहना की। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव भी समारोह में उपस्थित रहीं।

मुख्य घटनाक्रम

दीक्षांत समारोह में कुल 130 स्नातकों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें डीएम, एमसीएच, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ, पीएचडी, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और न्यूरोलॉजिकल साइंसेज में एसीपी कार्यक्रम सम्मिलित रहे। यह संस्थान चिकित्सा अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश के अग्रणी केंद्रों में गिना जाता है।

केंद्रीय मंत्री का संबोधन

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एससीटीआईएमएसटी की उस विशेष क्षमता को रेखांकित किया जिसके तहत संस्थान ने अनुसंधान प्रयोगशाला से उद्योग तक प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी और किफायती चिकित्सा उपकरणों का निर्माण न केवल स्वास्थ्य सेवा को सुलभ बनाता है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में भी एक ठोस कदम है।

स्वास्थ्य सचिव की प्राथमिकताएँ

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने आयुष्मान भारत के अंतर्गत कल्याण-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण के माध्यम से 'देखभाल की निरंतरता' सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से जुड़े विनियामक सुधारों को नवाचार के लिए आवश्यक बताया।

श्रीवास्तव ने संस्थान के 'इंजीनियर-डॉक्टर सहयोग' मॉडल की विशेष प्रशंसा की और स्नातकों से आग्रह किया कि वे नैतिकता, करुणा और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के मूल्यों को अपनाते हुए एक 'विकसित भारत' के निर्माण में योगदान दें।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि 14 मई को डॉ. जितेंद्र सिंह ने 200 मेगावाट की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग लाइन के शुरू होने को भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में रिन्यूएबल और स्वच्छ ऊर्जा की निर्णायक भूमिका रहेगी।

आगे की राह

एससीटीआईएमएसटी जैसे संस्थानों का उद्योग-अकादमिक सहयोग मॉडल आने वाले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य तकनीक क्षमता को और मज़बूत करने में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, विनियामक सुधारों और डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचे के साथ मिलकर यह दिशा देश में चिकित्सा नवाचार की गति को तेज़ करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये प्रौद्योगिकियाँ कितनी तेज़ी से बाज़ार तक पहुँचती हैं और आम मरीज़ों की पहुँच में आती हैं। विनियामक सुधारों की बात हर मंच पर होती है, पर चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में स्वीकृति की धीमी प्रक्रिया अभी भी नवाचार की रफ्तार पर ब्रेक लगाती है। आयुष्मान भारत के डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण के साथ यदि ऐसे संस्थानों की तकनीकें जुड़ें, तो 'विकसित भारत' का स्वास्थ्य लक्ष्य केवल भाषण नहीं, ज़मीनी हकीकत बन सकता है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससीटीआईएमएसटी क्या है और यह कहाँ स्थित है?
श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित एक राष्ट्रीय महत्व का चिकित्सा अनुसंधान एवं शिक्षा संस्थान है। यह चिकित्सा उपकरण नवाचार और उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
42वें दीक्षांत समारोह में कितने और किन पाठ्यक्रमों के स्नातकों को उपाधि मिली?
समारोह में कुल 130 स्नातकों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें डीएम, एमसीएच, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ, पीएचडी, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और न्यूरोलॉजिकल साइंसेज में एसीपी कार्यक्रम शामिल रहे।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एससीटीआईएमएसटी की किस बात की सराहना की?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने संस्थान द्वारा स्वदेशी और किफायती चिकित्सा उपकरणों के विकास तथा उद्योग जगत को सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में निभाई गई भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने इसे 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने दीक्षांत समारोह में क्या संदेश दिया?
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने आयुष्मान भारत के तहत डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण और 'देखभाल की निरंतरता' पर जोर दिया। उन्होंने जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से जुड़े विनियामक सुधारों को नवाचार के लिए ज़रूरी बताया और स्नातकों से नैतिकता व वैज्ञानिक उत्कृष्टता बनाए रखने का आग्रह किया।
एससीटीआईएमएसटी का 'इंजीनियर-डॉक्टर सहयोग' मॉडल क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मॉडल चिकित्सा और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को एक साथ जोड़कर ऐसे उपकरण विकसित करता है जो क्लिनिकल जरूरतों और तकनीकी व्यवहार्यता दोनों को पूरा करते हैं। इसी वजह से संस्थान अनुसंधान को सफलतापूर्वक उद्योग तक पहुँचाने में सक्षम रहा है, जिसकी केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने भी विशेष प्रशंसा की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले