आरजीपीवी को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी: अजय सिंह बोले — राजीव गांधी का नाम मिटाने की साज़िश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरजीपीवी को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी: अजय सिंह बोले — राजीव गांधी का नाम मिटाने की साज़िश

सारांश

भोपाल के आरजीपीवी को तीन शहरों में बांटने की सरकारी तैयारी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का आरोप है कि यह विभाजन राजीव गांधी का नाम मिटाने की राजनीतिक चाल है — शैक्षणिक सुधार महज बहाना है।

मुख्य बातें

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) , भोपाल को उज्जैन और जबलपुर में भी स्थापित कर तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी है।
कांग्रेस विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने 16 मई को विधानसभा में इसका कड़ा विरोध किया।
सिंह का आरोप है कि विभाजन का असली मकसद स्वर्गीय राजीव गांधी का नाम विश्वविद्यालय से हटाना है।
पुनर्गठन के साथ विश्वविद्यालय का नाम बदलने की भी चर्चा है, जिसे कांग्रेस ने 'राजनीतिक दुर्भावना' बताया।
राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को प्रशासनिक रूप से तीन हिस्सों में विभाजित करने की राज्य सरकार की कथित तैयारी पर सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने 16 मई को विधानसभा में सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि यह विभाजन विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का नाम संस्था से हटाने के इरादे से किया जा रहा है।

विभाजन की क्या है योजना

सूत्रों के अनुसार, आरजीपीवी को भोपाल के अतिरिक्त उज्जैन और जबलपुर में भी स्थापित करने की तैयारी है, जिससे यह विश्वविद्यालय प्रशासनिक दृष्टि से तीन स्वतंत्र इकाइयों में बंट जाएगा। इस पुनर्गठन के साथ संस्था का नाम बदलने की भी चर्चा है, जिस पर कांग्रेस ने कड़ा एतराज जताया है। राज्य सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।

अजय सिंह का विरोध और तर्क

अजय सिंह ने इस प्रस्ताव को 'पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित' बताया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में देश में कंप्यूटर युग की शुरुआत की और डिजिटल भारत की मजबूत नींव रखी — यही ऐतिहासिक तकनीकी योगदान इस विश्वविद्यालय के नामकरण का आधार था। उन्होंने कहा, 'किसी भी महापुरुष को उनके देशहित में किए गए कार्यों के लिए जाना जाता है — उन्हें किसी पार्टी के संकीर्ण चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।'

कांग्रेस की चेतावनी

सिंह ने स्पष्ट किया कि इतिहास और राष्ट्रीय नायकों के योगदान को राजनीतिक दुर्भावना से मिटाना जनभावनाओं का अनादर है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी और जनता इस 'विभाजनकारी नीति' का हर स्तर पर विरोध करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कांग्रेस-युग की संस्थाओं और स्थानों के नाम बदलने के आरोप पहले से लगते रहे हैं।

आगे क्या होगा

विधानसभा में उठाए गए इस सवाल के बाद राज्य सरकार पर आरजीपीवी पुनर्गठन के उद्देश्यों और नामकरण नीति पर स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ गया है। आलोचकों का कहना है कि बिना पारदर्शी शैक्षणिक तर्क के किया गया यह विभाजन विश्वविद्यालय की संरचनात्मक एकता को कमज़ोर कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आरजीपीवी का मामला इसलिए अलग है क्योंकि यहाँ एक प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढाँचे को बदलने का औज़ार इस्तेमाल किया जा रहा है। असली सवाल यह है कि क्या तीन शहरों में विभाजन से शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ेगी या संसाधनों का बिखराव होगा — इसका जवाब सरकार ने अब तक नहीं दिया। जब तक कोई ठोस शैक्षणिक औचित्य सामने नहीं आता, विपक्ष के 'नाम मिटाओ' वाले आरोप को खारिज करना मुश्किल होगा। यह विवाद दरअसल उस बड़े पैटर्न का हिस्सा है जिसमें संस्थाओं के नाम राजनीतिक विरासत की लड़ाई का मैदान बन जाते हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरजीपीवी को तीन हिस्सों में क्यों बांटा जा रहा है?
राज्य सरकार की कथित योजना के अनुसार आरजीपीवी को भोपाल के अलावा उज्जैन और जबलपुर में भी स्थापित किया जाएगा, जिससे यह प्रशासनिक रूप से तीन इकाइयों में बंट जाएगा। सरकार ने इसका कोई आधिकारिक शैक्षणिक कारण अब तक नहीं बताया है।
अजय सिंह ने आरजीपीवी विभाजन पर क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने आरोप लगाया कि विभाजन का असली मकसद पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का नाम विश्वविद्यालय से हटाना है। उन्होंने इसे 'राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम' बताया।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर क्यों रखा गया था?
अजय सिंह के अनुसार, स्वर्गीय राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में भारत में कंप्यूटर युग की शुरुआत की और डिजिटल भारत की नींव रखी। इसी ऐतिहासिक तकनीकी योगदान के सम्मान में विश्वविद्यालय का नामकरण किया गया था।
क्या आरजीपीवी का नाम बदला जाएगा?
विश्वविद्यालय के पुनर्गठन के साथ नाम बदलने की चर्चा है, हालांकि राज्य सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। कांग्रेस ने किसी भी नाम परिवर्तन का विरोध करने की चेतावनी दी है।
कांग्रेस इस विभाजन के खिलाफ क्या करेगी?
अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और जनता इस प्रस्ताव का हर स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाने के साथ-साथ व्यापक जन-आंदोलन का भी संकेत दिया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले