एनआरसी वेबसाइट और हेल्पलाइन की बदहाली पर कांग्रेस का हमला, ₹1,600 करोड़ खर्च के बाद भी बुनियादी सेवाएं ठप

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एनआरसी वेबसाइट और हेल्पलाइन की बदहाली पर कांग्रेस का हमला, ₹1,600 करोड़ खर्च के बाद भी बुनियादी सेवाएं ठप

सारांश

₹1,600 करोड़ से अधिक खर्च के बाद भी एनआरसी असम की वेबसाइट ठप और हेल्पलाइन कॉल पशु चिकित्सालय में ट्रांसफर — कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल जाँच और सुधार की माँग की है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने 16 मई को असम के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एनआरसी वेबसाइट और हेल्पलाइन में गंभीर खामियों का आरोप लगाया।
राज्य हेल्पलाइन नंबर 15107 पर बार-बार फोन करने के बाद भी कोई कॉल रिसीव नहीं हुई।
बाहरी कॉलर्स का टोल-फ्री नंबर शिलांग के एक पशु चिकित्सालय में ट्रांसफर हो गया।
एनआरसी अपडेट प्रक्रिया पर ₹1,600 करोड़ से अधिक सार्वजनिक धन खर्च हो चुका है।
सैकिया ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने उपेक्षा के ज़रिए एनआरसी की प्रासंगिकता को अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त कर दिया है।

असम विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने शनिवार, 16 मई को राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) असम की आधिकारिक वेबसाइट और हेल्पलाइन सेवाओं में गंभीर तकनीकी खामियों का आरोप लगाया है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को 'बेहद गैर-पेशेवर' और नागरिकों के लिए 'अस्वीकार्य' करार दिया।

क्या हैं शिकायतें

सैकिया ने अपने पत्र में बताया कि जब उन्होंने एनआरसी पोर्टल के 'नो योर एआरएन' सेक्शन के माध्यम से अपनी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, तो उन्हें कई स्तरों पर तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। वेबसाइट पर सहायता के लिए राज्य हेल्पलाइन नंबर 15107 पर संपर्क करने का निर्देश था, लेकिन कई बार फोन करने के बाद भी कोई कॉल रिसीव नहीं हुई।

इससे भी गंभीर मामला तब सामने आया जब सैकिया ने असम के बाहर पंजीकृत सिम कार्ड से बाहरी कॉलर्स के लिए जारी टोल-फ्री नंबर पर संपर्क किया — कॉल शिलांग के एक पशु चिकित्सालय में ट्रांसफर हो गई। यह तथ्य, उनके अनुसार, डिजिटल बुनियादी ढाँचे की दयनीय स्थिति को उजागर करता है।

₹1,600 करोड़ के खर्च पर सवाल

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके सैकिया ने तर्क दिया कि एनआरसी अपडेट प्रक्रिया पर ₹1,600 करोड़ से अधिक का सार्वजनिक धन खर्च किया जा चुका है। इतनी बड़ी राशि के बावजूद वेबसाइट और हेल्पलाइन जैसी मूलभूत सेवाएं सुचारु रूप से संचालित न होना, उनके अनुसार, जवाबदेही का गंभीर सवाल खड़ा करता है।

गौरतलब है कि एनआरसी असम में नागरिकता सत्यापन की एक जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया रही है, जो वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों असम निवासियों को कानूनी और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए एनआरसी दस्तावेज़ों की नियमित आवश्यकता पड़ती है।

एनआरसी की प्रासंगिकता पर अप्रत्यक्ष सवाल

सैकिया ने पत्र में एक तीखा सवाल उठाया — क्या राज्य सरकार ने वेबसाइट और हेल्पलाइन की 'उपेक्षित स्थिति' के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से एनआरसी की प्रासंगिकता और महत्व को ही समाप्त कर दिया है? यह आरोप सरकार की प्राथमिकताओं पर सीधा राजनीतिक प्रश्न है।

आलोचकों का कहना है कि एनआरसी पोर्टल की बदहाली केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी का संकेत है — विशेषकर तब, जब राज्य में नागरिकता से जुड़े मामले न्यायालयों और विदेशी न्यायाधिकरणों में सक्रिय रूप से विचाराधीन हैं।

माँगें और अगला कदम

सैकिया ने मुख्य सचिव से चार सुनिश्चित कदम उठाने की माँग की है: मामले की तत्काल जाँच, एनआरसी वेबसाइट को फिर से सक्रिय और कार्यशील बनाना, हेल्पलाइन प्रणाली का पूर्ण सुधार, और नागरिकों को बेहतर सहायता सुनिश्चित करना। अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं, फिर भी एक वरिष्ठ नेता को हेल्पलाइन कॉल पशु चिकित्सालय में ट्रांसफर होती मिलती है — यह महज तकनीकी लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक है। सवाल यह नहीं कि वेबसाइट काम क्यों नहीं कर रही, बल्कि यह है कि इतने विवादास्पद और संवेदनशील रजिस्टर की डिजिटल आधारभूत संरचना वर्षों बाद भी इस हाल में क्यों है। जब लाखों नागरिकों की नागरिकता इन दस्तावेज़ों से जुड़ी हो, तो पोर्टल की 'उपेक्षित स्थिति' केवल तकनीकी विफलता नहीं — यह जवाबदेही का संकट है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआरसी असम वेबसाइट और हेल्पलाइन में क्या खामियाँ पाई गई हैं?
कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया के अनुसार, एनआरसी पोर्टल का 'नो योर एआरएन' सेक्शन ठीक से काम नहीं कर रहा, राज्य हेल्पलाइन 15107 पर कोई कॉल नहीं उठाता, और बाहरी कॉलर्स के लिए टोल-फ्री नंबर शिलांग के एक पशु चिकित्सालय में ट्रांसफर हो जाता है।
देबब्रत सैकिया ने मुख्य सचिव से क्या माँगें की हैं?
सैकिया ने मुख्य सचिव से मामले की तत्काल जाँच कराने, एनआरसी वेबसाइट को पुनः सक्रिय करने, हेल्पलाइन प्रणाली को दुरुस्त करने और नागरिकों को बेहतर डिजिटल सहायता उपलब्ध कराने की माँग की है।
एनआरसी असम पर अब तक कितना खर्च हो चुका है?
सैकिया के पत्र के अनुसार, एनआरसी अपडेट प्रक्रिया पर ₹1,600 करोड़ से अधिक सार्वजनिक धन खर्च किया जा चुका है। इस खर्च के बावजूद बुनियादी डिजिटल सेवाएं सुचारु न होना उनके सवालों का केंद्र है।
असम में एनआरसी की ज़रूरत आम नागरिकों को क्यों पड़ती है?
असम के निवासियों को कानूनी, प्रशासनिक और न्यायालयी मामलों में एनआरसी दस्तावेज़ों और संबंधित आँकड़ों की नियमित आवश्यकता होती है। विदेशी न्यायाधिकरणों और अदालती कार्यवाहियों में भी इन दस्तावेज़ों का हवाला दिया जाता है।
क्या राज्य सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक असम राज्य सरकार की ओर से सैकिया के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जाँच या सुधार के संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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