बिहार LEADS 2025 में 'हाई परफॉर्मर्स' श्रेणी में शामिल, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक सुधारों को मिली राष्ट्रीय मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
बिहार ने 16 मई 2025 को राष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की, जब वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी लॉजिस्टिक इजी एक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (LEADS) 2025 फ्रेमवर्क में राज्य को 'हाई परफॉर्मर्स' श्रेणी में स्थान मिला। यह मान्यता बिहार के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम, औद्योगिक अवसंरचना और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में हुए ठोस सुधारों की स्वीकृति है।
मुख्य घटनाक्रम
LEADS 2025 फ्रेमवर्क में बिहार ने पिछली 'फास्ट मूवर' श्रेणी से आगे बढ़कर 'हाई परफॉर्मर्स' का दर्जा हासिल किया है। यह केवल रैंकिंग में एक पायदान की छलांग नहीं है — यह राज्य की नीतिगत प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और दीर्घकालिक औद्योगिक दृष्टि के क्रियान्वयन का प्रमाण है। DPIIT का LEADS सूचकांक राज्यों की लॉजिस्टिक्स दक्षता, कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल वातावरण के आधार पर मूल्यांकन करता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
बिहार के उद्योग विभाग की मंत्री श्रेयसी सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार सरकार उद्योग, निवेश और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यापक सुधारों के ज़रिए राज्य को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार की नीतियों के सम्मिलित प्रयासों का परिणाम बताया।
उद्योग विभाग के सचिव एवं बियाडा और आईडा के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि LEADS 2025 में 'हाई परफॉर्मर्स' श्रेणी में शामिल होना बिहार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक्स अवसंरचना, निवेश सुविधा, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सुदृढ़ करने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है।
बिहार की औद्योगिक प्रगति का संदर्भ
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब बिहार लंबे समय से औद्योगिक पिछड़ेपन की छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि पूर्वी भारत के राज्यों में लॉजिस्टिक्स अवसंरचना ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रही है, और LEADS जैसे राष्ट्रीय सूचकांकों में बेहतर प्रदर्शन निवेशकों की धारणा को प्रभावित करता है। राज्य सरकार का 'विकसित बिहार' विज़न इसी दिशा में एक व्यापक रणनीतिक ढाँचे का हिस्सा है।
आम जनता और उद्योग पर असर
लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार से राज्य में माल ढुलाई की लागत घटती है, जिससे स्थानीय उद्योग और कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। बेहतर औद्योगिक कनेक्टिविटी से नए निवेश आकर्षित होने और रोज़गार के अवसर बढ़ने की संभावना है। बियाडा और आईडा जैसी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका इस बदलाव को ज़मीनी स्तर पर मूर्त रूप देने में अहम मानी जा रही है।
क्या होगा आगे
बिहार सरकार के अनुसार, राज्य में निवेश, उद्योग और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। आलोचकों का कहना है कि रैंकिंग में सुधार को तब तक वास्तविक सफलता नहीं माना जाना चाहिए जब तक ज़मीन पर रोज़गार और निवेश के ठोस आँकड़े सामने न आएँ। अगला पड़ाव यह होगा कि बिहार इस मान्यता को वास्तविक औद्योगिक निवेश में कैसे परिवर्तित करता है।