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क्या असम में ‘मतदाता सूची से नाम हटाने’ पर लोकतंत्र को गंभीर खतरा है?

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क्या असम में ‘मतदाता सूची से नाम हटाने’ पर लोकतंत्र को गंभीर खतरा है?

सारांश

असम के नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरनाक बताया है। जानिए नजीरा विधानसभा क्षेत्र में क्या हो रहा है!

मुख्य बातें

मतदाता सूची में नाम हटाने पर गंभीर चिंता लोकतांत्रिक मूल्यों का खतरा निर्वाचन आयोग से हस्तक्षेप की मांग स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा भेदभावपूर्ण प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता

गुवाहाटी, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने गुरुवार को मतदाता सूची के संक्षिप्त और विशेष पुनरीक्षण में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक गंभीर खतरा बताया और आरोप लगाया कि नजीरा विधानसभा क्षेत्र में कई मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

देबब्रत सैकिया ने इस मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन देते हुए भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि नजीरा के कई स्थायी निवासी, जिन्होंने पूर्व चुनावों में मतदान किया था, उनके नाम बिना उचित कारण के अद्यतन मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

विपक्ष के नेता का आरोप है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई। उनके अनुसार, प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या ऐसे स्वदेशी समुदायों की है, जो पीढ़ियों से नजीरा क्षेत्र में रह रहे हैं, जिनमें आज़ादी से पहले के समय से बसे परिवार भी शामिल हैं।

सैकिया ने बताया कि कई मामलों में गांव के मुखिया और प्रधानों ने आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया था कि संबंधित मतदाता स्थायी निवासी हैं और अब भी अपने गांवों में रहते हैं। इसके बावजूद, उनके नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिए गए या फिर “संदिग्ध” के रूप में चिह्नित कर दिए गए।

प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा करते हुए सैकिया ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से बातचीत में स्पष्टता और एकरूपता की कमी सामने आई। उनका दावा है कि बीएलओ नाम हटाए जाने के ठोस कारण नहीं बता सके, जिससे नजीरा में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्धारित मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय की है, साथ ही अन्य लंबे समय से बसे स्वदेशी निवासी भी शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के रुझानों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन की प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैये की ओर इशारा कर सकता है।

सैकिया ने कुछ ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया, जहां फील्ड सत्यापन के दौरान जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सत्यापन व्यवस्था में गंभीर खामियों को दर्शाती हैं और जमीनी स्तर पर लापरवाही, गलत सूचना या गंभीर प्रक्रियागत अनियमितताओं की आशंका पैदा करती हैं।

तत्काल सुधारात्मक कदमों की मांग करते हुए देबब्रत सैकिया ने निर्वाचन आयोग से नजीरा की मतदाता सूची की व्यापक पुनः जांच कराने का आग्रह किया। उन्होंने झूठी रिपोर्टिंग, गलत डेटा एंट्री और जवाबदेही में चूक की सख्त जांच की मांग की और जोर दिया कि अंतिम मतदाता सूची में किसी भी समुदाय या वर्ग को चयनात्मक या असमान रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने बीएलओ और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की कड़ी निगरानी की भी मांग की और कहा कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित नोटिस, निष्पक्ष सुनवाई और सक्षम प्राधिकारी के तर्कसंगत आदेश के बिना नहीं हटाया जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह घटना लोकतंत्र की मूलभूत संरचना पर गंभीर सवाल उठाती है। नजीरा क्षेत्र में मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता है। ऐसी घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नजीरा विधानसभा में मतदाता सूची में बदलाव का क्या कारण है?
इसका कारण मतदाता सूची के संक्षिप्त और विशेष पुनरीक्षण के दौरान नामों का हटाया जाना बताया जा रहा है।
क्या यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है?
जी हाँ, विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बड़ा खतरा बताया है।
क्या निर्वाचन आयोग इस पर कार्रवाई करेगा?
सैकिया ने निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या इस प्रक्रिया में भेदभाव हो रहा है?
सैकिया ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
क्या इस संदर्भ में कोई सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा?
सैकिया ने सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है और निर्वाचन आयोग से व्यापक पुनः जांच कराने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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