ऑपरेशन सिंदूर 88 घंटों में बदली युद्ध की परिभाषा, सीडीएस जनरल अनिल चौहान बोले — यह पहले के सभी संघर्षों से अलग

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ऑपरेशन सिंदूर 88 घंटों में बदली युद्ध की परिभाषा, सीडीएस जनरल अनिल चौहान बोले — यह पहले के सभी संघर्षों से अलग

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था — यह भारत की युद्धनीति का कायापलट था। सीडीएस जनरल अनिल चौहान के अनुसार, 88 घंटों में स्थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष — पाँचों मोर्चों पर एकसाथ कार्रवाई हुई। यह भारतीय सेना के आधुनिक युद्ध में प्रवेश की आधिकारिक घोषणा है।

मुख्य बातें

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने 16 मई को नई दिल्ली में 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारत का पहला पूर्ण मल्टी-डोमेन ऑपरेशन बताया।
यह अभियान 88 घंटे चला और इसमें स्थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का एकसाथ उपयोग हुआ।
ऑपरेशन मुख्यतः नॉन-कॉन्टैक्ट पद्धति पर आधारित था; 300-400 किलोमीटर दूर से सटीक हमले किए गए।
तीनों सेनाओं के साथ-साथ सरकार के अन्य अंगों और एजेंसियों के बीच अभूतपूर्व तालमेल देखा गया।
जनरल चौहान ने मणिपुर के सेनापति और बारामूला में अपने फील्ड अनुभव साझा किए और तवांग संग्रहालय की स्थापना में भूमिका का उल्लेख किया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार, 16 मई को नई दिल्ली में आयोजित 'सेना से संवाद' कार्यक्रम में 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारत के सैन्य इतिहास का सबसे अलग और आधुनिक अभियान करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ऑपरेशन न केवल अपनी तकनीकी जटिलता में, बल्कि बहु-आयामी समन्वय और नॉन-कॉन्टैक्ट युद्धशैली के कारण भारत के पिछले सभी सैन्य संघर्षों से मौलिक रूप से भिन्न है।

मल्टी-डोमेन ऑपरेशन: नई युद्ध नीति

जनरल चौहान ने कहा, 'मैं सिर्फ फौजी नजरिए से बात करूंगा। ऑपरेशन सिंदूर अलग है। यह अभी जारी है, इसलिए मैं कह रहा हूं कि यह पहले लड़े सभी संघर्षों से अलग है।' उन्होंने बताया कि पहली बार भारत ने एक पूर्ण मल्टी-डोमेन ऑपरेशन संचालित किया, जिसमें स्थल, जल और वायु — तीनों क्षेत्रों में एक साथ समन्वित कार्रवाई हुई। गौरतलब है कि अतीत में लगभग सभी सैन्य अभियानों में प्रत्यक्ष संपर्क-आधारित लड़ाई होती थी, जबकि इस ऑपरेशन में अधिकांश कार्रवाई नॉन-कॉन्टैक्ट पद्धति से हुई।

साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का उपयोग

सीडीएस ने बताया कि 88 घंटे चले इस ऑपरेशन में साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का भी प्रभावी उपयोग किया गया — जो किसी भारतीय सैन्य अभियान में पहली बार इस पैमाने पर देखा गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच ही नहीं, बल्कि सरकार के अन्य अंगों और विभिन्न एजेंसियों के साथ भी अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला।

जीत की परिभाषा बदली

जनरल चौहान ने जीत के पारंपरिक पैमानों की तुलना आधुनिक युद्धशैली से करते हुए कहा, 'पहले जीत इस बात से मापी जाती थी कि कितना इलाका कब्जाया गया, कितने युद्धबंदी बनाए गए या कितना सामान नष्ट किया गया, लेकिन अब 300-400 किलोमीटर दूर से सटीक हमला किया जा सकता है। यह पहले कभी नहीं हुआ था।' यह टिप्पणी भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती रणनीतिक सोच को रेखांकित करती है।

व्यक्तिगत अनुभव और फील्ड यादें

जनरल चौहान ने अपनी सिविलियन पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछली दो-तीन पीढ़ियों में उनके परिवार से कोई सशस्त्र बलों में नहीं रहा और उनकी बेटी एक आर्किटेक्ट हैं। उन्होंने मणिपुर के सेनापति जिले और बारामूला में ब्रिगेड की कमान के अपने अनुभव साझा किए — दोनों उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने कहा, '15-20 साल बाद भी वहां के लोग मुझे याद करते हैं और संपर्क करते हैं।' उन्होंने नेलांग और जादुंग गांवों के पुनर्वास और तवांग में मेजर बॉब खाथिंग के नाम पर संग्रहालय की स्थापना में अपनी भूमिका का भी जिक्र किया, जो अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल बी.डी. मिश्रा और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के सहयोग से संभव हुआ।

युवाओं को सेना से जोड़ने का आह्वान

'सेना से संवाद' कार्यक्रम के माध्यम से सीडीएस ने युवाओं और नागरिकों से अपील की कि वे सशस्त्र बलों के बलिदान और चुनौतियों को समझें। उन्होंने कहा कि सैनिकों का जज्बा देश की एकता और सुरक्षा की नींव है। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों के जरिए सेना और नागरिक समाज के बीच की खाई को पाटने की कोशिश जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उससे कहीं अधिक छुपाते भी हैं — ऑपरेशन के वास्तविक लक्ष्यों, परिणामों और मानवीय असर पर अभी तक कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। आधुनिक युद्धशैली की यह घोषणा रणनीतिक दृष्टि से उत्साहजनक है, परंतु जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल अनुत्तरित हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या है और यह पिछले संघर्षों से कैसे अलग है?
ऑपरेशन सिंदूर भारत का पहला मल्टी-डोमेन सैन्य अभियान है, जिसमें स्थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का एकसाथ उपयोग हुआ। सीडीएस जनरल अनिल चौहान के अनुसार, यह मुख्यतः नॉन-कॉन्टैक्ट पद्धति पर आधारित था, जो पिछले सभी भारतीय सैन्य संघर्षों से इसे मौलिक रूप से अलग बनाता है।
ऑपरेशन सिंदूर कितने घंटे चला और इसमें क्या हासिल हुआ?
सीडीएस के अनुसार यह ऑपरेशन 88 घंटे चला। इस दौरान 300-400 किलोमीटर दूर से सटीक हमले किए गए और तीनों सेनाओं के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखा गया। ऑपरेशन के विस्तृत परिणामों का आधिकारिक ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मल्टी-डोमेन ऑपरेशन का क्या अर्थ है?
मल्टी-डोमेन ऑपरेशन वह सैन्य अभियान होता है जिसमें एक साथ कई क्षेत्रों — जैसे स्थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष — में समन्वित कार्रवाई की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार भारत ने इन सभी डोमेन को एकसाथ सक्रिय किया, जो आधुनिक युद्धनीति में एक बड़ा बदलाव है।
'सेना से संवाद' कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों और नागरिक समाज — विशेषकर युवाओं — के बीच संवाद और समझ बढ़ाना था। सीडीएस जनरल चौहान ने इसमें सैनिकों के बलिदान, फील्ड अनुभव और ऑपरेशन सिंदूर की विशेषताओं पर विस्तार से बात की।
जनरल अनिल चौहान ने अपने फील्ड अनुभव के बारे में क्या बताया?
जनरल चौहान ने मणिपुर के सेनापति जिले और बारामूला में ब्रिगेड की कमान के अनुभव साझा किए — दोनों उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने नेलांग और जादुंग गांवों के पुनर्वास और तवांग में मेजर बॉब खाथिंग संग्रहालय की स्थापना में अपनी भूमिका का भी उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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