4 नवंबर 2026
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आईआईटी दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य सुधार: नए मनोवैज्ञानिक, काउंसलर और स्वतंत्र लोकपाल की नियुक्ति होगी

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आईआईटी दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य सुधार: नए मनोवैज्ञानिक, काउंसलर और स्वतंत्र लोकपाल की नियुक्ति होगी

सारांश

ऋषिकेश कुमार की दुखद मौत के बाद आईआईटी दिल्ली ने पहली बार व्यापक संस्थागत सुधारों का खाका खींचा है — नए मनोवैज्ञानिक, अनिवार्य कार्यशालाएं और स्वतंत्र लोकपाल। सवाल यह है कि क्या ये बदलाव सिर्फ कागज़ पर रहेंगे या परिसर की ज़मीनी हकीकत बदलेंगे।

मुख्य बातें

छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त 2026 को मृत्यु के बाद गठित बाहरी जांच समिति ने आईआईटी दिल्ली को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने की; रिपोर्ट गोपनीय है।
अतिरिक्त पूर्णकालिक नैदानिक मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की भर्ती होगी; विज़िटिंग मनोचिकित्सकों की संख्या भी बढ़ेगी।
प्रशासनिक, छात्रावास कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य विषयक कार्यशालाएं अनिवार्य की जाएंगी।
एक स्वतंत्र छात्र शिकायत निवारण लोकपाल नियुक्त किया जाएगा।
31 अक्टूबर 2026 को सिफारिशें साझा की गईं; 3 नवंबर 2026 को छात्र मामलों की परिषद बैठक में छात्रों के सुझाव कार्ययोजना में शामिल हुए।

आईआईटी दिल्ली ने 4 नवंबर 2026 को छात्र कल्याण के क्षेत्र में व्यापक सुधारों की घोषणा की, जिसमें अतिरिक्त पूर्णकालिक नैदानिक मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की भर्ती, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और एक स्वतंत्र छात्र शिकायत निवारण लोकपाल की नियुक्ति शामिल है। ये बदलाव संस्थान के छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त 2026 को हुई दुखद मृत्यु के बाद गठित बाहरी जांच समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं।

जांच समिति और उसकी रिपोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में गठित इस समिति में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ और दो छात्र प्रतिनिधि भी शामिल थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट को गोपनीय रखने का निर्देश दिया है, इसलिए संस्थान ने विस्तृत जानकारियाँ सार्वजनिक नहीं की हैं।

आईआईटी दिल्ली के अनुसार, समिति की सिफारिशों का मुख्य जोर मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था और संस्थान की संबंधित प्रणालियों में सुधार पर है। 31 अक्टूबर 2026 को बाहरी समिति की सभी सिफारिशें और प्रस्तावित कार्ययोजना छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ साझा की गई।

मुख्य सुधार और कार्ययोजना

संस्थान ने सिफारिशों पर अमल के लिए एक आंतरिक समिति बनाई थी, जिसमें उप निदेशक (संचालन), छात्र मामलों के डीन, अकादमिक डीन और छात्र कल्याण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल थे। 3 नवंबर 2026 को छात्र मामलों की परिषद की बैठक में छात्रों से सीधे सुझाव लेकर उन्हें समयबद्ध कार्ययोजना में शामिल किया गया।

इस योजना के तहत अतिरिक्त पूर्णकालिक नैदानिक मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की भर्ती की जाएगी। साथ ही, समय-समय पर विशेष परामर्श देने वाले मनोचिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। गौरतलब है कि आईआईटी जैसे उच्च-दबाव वाले संस्थानों में पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य अवसंरचना की माँग लंबे समय से उठती रही है।

जागरूकता अभियान और अनिवार्य प्रशिक्षण

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और नशीले पदार्थों के उपयोग से संबंधित कानूनों पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। प्रशासनिक कर्मचारियों, छात्रावास कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, संवाद कौशल और मानसिक स्वास्थ्य विषयों पर कार्यशालाएं अनिवार्य की जाएंगी।

यह कदम इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर मानसिक संकट में छात्रों की पहली पहचान कक्षा या छात्रावास में उनके आसपास के लोग करते हैं — न कि परामर्श केंद्र के विशेषज्ञ। प्रशिक्षित कर्मचारी और साथी छात्र इस प्रारंभिक पहचान की खाई को पाट सकते हैं।

छुट्टी से लौटने वाले छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था

लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बाद परिसर लौटने वाले छात्रों के लिए एक औपचारिक पुनर्एकीकरण व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके तहत विशेष परामर्श, अकादमिक स्तर पर समन्वय और साथी छात्रों का एक सहयोग नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए विशेष रूप से अहम होगी जो मानसिक स्वास्थ्य कारणों से पढ़ाई छोड़कर लौटे हों।

स्वतंत्र लोकपाल और व्यापक नीति समीक्षा

छात्रों की शिकायतों के निष्पक्ष समाधान के लिए एक स्वतंत्र छात्र शिकायत निवारण लोकपाल नियुक्त किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली और कल्याण नीति की व्यापक समीक्षा के लिए एक नई समिति गठित होगी, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के दो वरिष्ठ विशेषज्ञ, एक कल्याण पेशेवर और दो छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह समिति आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रिया, विशेषज्ञों के पास रेफरल व्यवस्था और निगरानी तंत्र का मूल्यांकन कर आवश्यक बदलाव सुझाएगी। संस्थान का कहना है कि इन सुधारों का लक्ष्य परिसर में सहानुभूति, पारदर्शिता और सहयोग पर आधारित माहौल तैयार करना है — और यह केवल प्रक्रियागत बदलाव नहीं, बल्कि छात्र कल्याण को संस्थागत प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है कि किसी प्रमुख तकनीकी संस्थान में छात्र मृत्यु के बाद व्यापक बदलाव की घोषणा हुई हो — और इतिहास बताता है कि अक्सर ऐसी घोषणाएं क्रियान्वयन की धीमी गति में दम तोड़ देती हैं। रिपोर्ट को गोपनीय रखना संस्था की पारदर्शिता की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा करता है — छात्र और उनके परिजन यह जानने के हकदार हैं कि क्या चूका और क्यों। लोकपाल और समीक्षा समितियों की घोषणाओं की असली परीक्षा उनकी स्वायत्तता, नियुक्ति की पारदर्शिता और नतीजों की जवाबदेही में होगी। जब तक इन सुधारों की प्रगति सार्वजनिक रूप से मापने योग्य नहीं होगी, तब तक ये संकट-प्रबंधन से अधिक कुछ नहीं लगेंगे।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी दिल्ली में ये सुधार क्यों किए जा रहे हैं?
ये सुधार छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त 2026 को हुई मृत्यु के बाद गठित बाहरी जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जा रहे हैं। समिति ने मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था और संस्थान की संबंधित प्रणालियों में व्यापक सुधार की सिफारिश की है।
जांच समिति का नेतृत्व किसने किया और रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हुई?
समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने की, जिसमें एम्स के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ और दो छात्र प्रतिनिधि भी थे। समिति ने रिपोर्ट को गोपनीय रखने का निर्देश दिया है, इसलिए संस्थान ने विस्तृत जानकारियाँ सार्वजनिक नहीं की हैं।
आईआईटी दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कौन-कौन से नए कदम उठाए जाएंगे?
अतिरिक्त पूर्णकालिक नैदानिक मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की भर्ती होगी और विज़िटिंग मनोचिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी। प्रशासनिक, छात्रावास कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य विषयक कार्यशालाएं अनिवार्य की जाएंगी, और मानसिक स्वास्थ्य व नशीले पदार्थों से संबंधित जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
स्वतंत्र छात्र शिकायत निवारण लोकपाल क्या होगा?
यह एक निष्पक्ष अधिकारी होगा जो छात्रों की शिकायतों का स्वतंत्र रूप से समाधान करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को प्रशासन के बाहर भी एक विश्वसनीय शिकायत माध्यम मिले।
लंबी छुट्टी के बाद परिसर लौटने वाले छात्रों के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाएगी?
ऐसे छात्रों के लिए विशेष परामर्श, अकादमिक समन्वय और साथी छात्रों का सहयोग नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसका लक्ष्य यह है कि परिसर लौटने के बाद वे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों से आसानी से जुड़ सकें।
राष्ट्र प्रेस
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