जम्मू-कश्मीर में आयुष का विस्तार: ₹91.99 करोड़ की कार्ययोजना, वेलनेस टूरिज्म पर बड़ा दांव
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को आयुष प्रणाली के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने, इसकी पहुँच का विस्तार करने और केंद्र शासित प्रदेश को एक प्रमुख वेलनेस टूरिज्म गंतव्य के रूप में विकसित करने पर ज़ोर दिया। मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत ₹91.99 करोड़ की राज्य वार्षिक कार्य योजना 2026-27 को मंज़ूरी दी गई, जिसे अब केंद्रीय आयुष मंत्रालय को भेजा जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम और मंज़ूरी
जम्मू-कश्मीर आयुष सोसायटी की गवर्निंग बॉडी की बैठक में आयुष निदेशक डॉ. अजय कुमार टिकू ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने ₹58.539 करोड़ के संभावित संसाधन आवंटन का संकेत दिया है, जबकि केंद्र शासित प्रदेश ने बढ़ती माँग को देखते हुए ₹91.997 करोड़ की व्यापक योजना प्रस्तावित की है। इस योजना में 523 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को सुदृढ़ करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में आयुष इकाइयों का विस्तार, और कम स्वास्थ्य सेवा वाले क्षेत्रों में नई सुविधाएँ तेज़ी से पूरी करना शामिल है।
वेलनेस टूरिज्म पर सरकार का ज़ोर
मुख्य सचिव डुल्लू ने कहा कि वेलनेस टूरिज्म पूरे देश में एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रहा है और जम्मू-कश्मीर के विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को देखते हुए यहाँ इसके लिए ‘अपार संभावनाएँ' हैं। केरल, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक प्रमुख वेलनेस और स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने तथा निजी हितधारकों के सहयोग से एक मज़बूत कल्याण नीति तैयार करने की अपील की।
जनकल्याण कार्यक्रमों का दायरा
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि केंद्र शासित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और ज़िला अस्पतालों में आयुष जनकल्याण कार्यक्रमों की सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। इनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस व अन्य मस्कुलोस्केलेटल विकारों, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम के राष्ट्रीय कार्यक्रम, आयुष आधारित मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल, वृद्धावस्था स्वास्थ्य सेवाएँ, स्कूली बच्चों के लिए आयुष-आधारित स्वस्थ जीवनशैली कार्यक्रम, उपशामक सेवाएँ और मोबाइल चिकित्सा इकाइयाँ शामिल हैं।
नशा मुक्ति और आजीविका से जोड़ने की पहल
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की चुनौती को रेखांकित करते हुए नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास में आयुष उपायों को शामिल करने और चल रहे ‘नशा मुक्त अभियान' में सक्रिय योगदान का आग्रह किया। साथ ही सरकारी संस्थानों में हर्बल गार्डन स्थापित करने और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को औषधीय जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन में जोड़ने के निर्देश दिए गए, ताकि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिले और आजीविका के अवसर पैदा हों।
क्या होगा आगे
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के आयुक्त-सचिव एम. राजू ने बताया कि प्रस्तावित कार्य योजना ज़िला-स्तरीय अधिकारियों और आयुष मेडिकल कॉलेजों के प्रमुखों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है, जिसमें बुनियादी ढाँचे, मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता पर बड़े निवेश की परिकल्पना है। बैठक में जम्मू-कश्मीर आयुष सोसायटी की कार्यकारी समिति के पुनर्गठन को भी मंज़ूरी दी गई और फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर सहमति बनी।