केरल हाई कोर्ट ने केंद्र से कहा — पेटेंट अधिनियम धारा 100 से महंगी कैंसर दवाओं की पहुँच सुधारें
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार से यह समीक्षा करने को कहा कि क्या पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग महंगी पेटेंटेड जीवन-रक्षक दवाओं तक आम मरीजों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की जो मूल रूप से स्तन कैंसर की महंगी दवा रिबोसिक्लिब की किफायती उपलब्धता से जुड़ी थी।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति हरिशंकर वी. मेनन ने स्पष्ट किया कि धारा 100 का क्रियान्वयन अंततः एक नीतिगत निर्णय है, किंतु जहाँ दवाएँ अत्यधिक कीमतों पर बेची जा रही हों, वहाँ सरकारी हस्तक्षेप पर विचार किया जाना उचित है। अदालत ने केंद्र को इस प्रावधान को तत्काल लागू करने का कोई प्रत्यक्ष निर्देश नहीं दिया, बल्कि सरकार से वहनीयता के आकलन के लिए डेटा एकत्र करने और आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप पर विचार करने को कहा।
गौरतलब है कि पेटेंट अधिनियम की धारा 100 केंद्र सरकार को पेटेंट धारक की सहमति के बिना सरकारी प्रयोजनों के लिए पेटेंट प्राप्त आविष्कार के उपयोग को अधिकृत करने का अधिकार देती है — एक ऐसा प्रावधान जिसका भारत में अब तक बहुत सीमित उपयोग हुआ है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कार्यवाही मुख्यतः दो स्तन कैंसर दवाओं पर केंद्रित रही — नोवार्टिस द्वारा निर्मित पेटेंटेड दवा रिबोसिक्लिब और एक अन्य दवा पालबोसिक्लिब, जिसका पेटेंट समाप्त हो चुका है और जो अपेक्षाकृत कम मूल्य पर उपलब्ध है। कैंसर उपचार संस्थानों और भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल की विशेषज्ञ राय ने पुष्टि की कि इन दोनों दवाओं को एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग नहीं किया जा सकता।
यह मामला 2022 में कैंसर के एक मरीज की याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें रिबोसिक्लिब को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की माँग की गई थी। उस समय इस दवा की कीमत लगभग ₹78,468.75 प्रति माह थी। याचिकाकर्ता की सितंबर 2022 में मृत्यु हो गई, परंतु केरल हाई कोर्ट ने जनहित को देखते हुए इस मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया।
अदालत का आदेश और दायरा
न्यायालय ने कहा कि किफायती मूल्य का सही आकलन करने के लिए उचित डेटा-आधारित जाँच आवश्यक है। अदालत के अनुसार यदि हस्तक्षेप आवश्यक पाया जाए, तो केंद्र सरकार केवल इस मामले तक सीमित न रहे, बल्कि अन्य जीवन-रक्षक दवाओं के मामलों में भी धारा 100 लागू करने पर विचार कर सकती है। यह टिप्पणी भविष्य में दवा-मूल्य नीति के लिए एक व्यापक संकेत के रूप में देखी जा रही है।
आम जनता पर असर
भारत में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली पेटेंटेड दवाओं की कीमतें अधिकांश मरीजों की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में स्वास्थ्य देखभाल की वहनीयता को लेकर बहस तेज हो रही है और सरकारी बीमा योजनाओं की सीमाएँ उजागर हो रही हैं। यदि केंद्र सरकार धारा 100 के तहत कदम उठाती है, तो यह लाखों कैंसर मरीजों के लिए जीवन-रक्षक उपचार को और अधिक सुलभ बना सकता है।
क्या होगा आगे
केरल हाई कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों पर यह दबाव है कि वे वहनीयता डेटा संकलन की प्रक्रिया शुरू करें। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि केंद्र इस दिशा में ठोस कदम उठाता है तो यह भारत की बौद्धिक संपदा और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।