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क्या माघ माह में तिल का महत्व बढ़ जाता है? जानें धर्म और आयुर्वेद का गणित

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क्या माघ माह में तिल का महत्व बढ़ जाता है? जानें धर्म और आयुर्वेद का गणित

सारांश

माघ माह में तिल का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। इस लेख में जानें कि कैसे तिल का उपयोग धर्म और आयुर्वेद में किया जाता है और इसके स्वास्थ्य लाभ क्या हैं। विशेष त्योहारों पर तिल का दान और स्नान करने के महत्व पर भी जानकारी प्राप्त करें।

मुख्य बातें

माघ माह में तिल का महत्व बढ़ जाता है।
तिल का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
धर्म और आयुर्वेद में तिल का उपयोग महत्वपूर्ण है।
ठंड में तिल का सेवन शीतजनित रोगों से बचाता है।
तिल का दान और स्नान पुण्यदायी है।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माघ मास में सर्दी अपने चरम पर होती है, जिससे शीतजनित रोगों का प्रकोप भी बढ़ता है। ऐसे में, तिल का उपयोग धर्म और आयुर्वेद दोनों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मकर संक्रांति, तिल द्वादशी, और गणेश चौथ जैसे त्योहारों पर तिल का स्नान, दान, पूजा और भोजन करना विशेष रूप से पुण्यदायी होता है।

माघ माह में ठंड के चलते वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में सूखापन, दर्द, और थकान का अनुभव होता है। तिल की गर्म तासीर और तैलीय गुण इन समस्याओं को समाप्त करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में इस महीने तिल का दान, तिल से स्नान, और तिल-गुड़ के लड्डू खाना अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को तिल के लड्डू चढ़ाने का महत्व है। साथ ही, संक्रांति और षटतिला एकादशी पर तिल के छह प्रकार से प्रयोग का वर्णन मिलता है।

तिल का उपयोग करने की परंपरा में शामिल हैं: तिल मिले हुए पानी से स्नान करना, शरीर पर तिल का लेप करना, हवन में तिल की आहुति देना, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल का दान करना, व्रत के नियमों के अनुसार तिल से बने व्यंजन खाना, और तिल मिश्रित जल पीना या पितरों को तर्पण करना। ये सभी कार्य व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करते हैं।

धर्म के अनुसार, जो लोग नदी में स्नान नहीं कर पाते, वे घर पर तिल मिलाकर स्नान करें तो भी संक्रांति का पूरा फल प्राप्त होता है। आयुर्वेद में तिल को ‘सर्वदोष हारा’ कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। माघ में तिल का सेवन न केवल धार्मिक पुण्य देता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक वरदान साबित होता है।

आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, तिल की तासीर गर्म होती है। यह शरीर में गर्मी उत्पन्न करता है, जिससे सर्दी, खांसी, और जोड़ों का दर्द दूर रहता है। तिल वात और कफ दोष को संतुलित करता है, जबकि पित्त को थोड़ा बढ़ा सकता है, इसलिए गर्मियों में इसका कम उपयोग करना चाहिए। यह भारी, तैलीय, और पौष्टिक होता है, जो ऊतकों को नमी देता है और शरीर को मजबूत बनाता है।

तिल में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ई, और एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा होती है। रोजाना तिल खाने या तिल के तेल से मालिश करने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं, दांत स्वस्थ रहते हैं, और बालों का झड़ना कम होता है। यह पाचन तंत्र को सुधारता है, कब्ज दूर करता है, और पेट की गैस-एसिडिटी में राहत देता है। तिल का तेल त्वचा को मुलायम बनाता है, घाव भरने में सहायता करता है, और एंटी-एजिंग गुणों से त्वचा को जवां बनाए रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि माघ माह में तिल का उपयोग न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। धार्मिक परंपराओं और आयुर्वेद की शिक्षाओं के अनुसार, तिल का सेवन सर्दियों में विशेष रूप से लाभदायक होता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माघ माह में तिल का सेवन क्यों महत्वपूर्ण है?
माघ माह में ठंड से होने वाली समस्याओं को दूर करने और धार्मिक पुण्य प्राप्त करने के लिए तिल का सेवन महत्वपूर्ण है।
तिल के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?
तिल में कैल्शियम, आयरन, और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और त्वचा को स्वस्थ रखते हैं।
तिल का दान कब करना चाहिए?
तिल का दान मकर संक्रांति, तिल द्वादशी, और गणेश चौथ जैसे त्योहारों पर किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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