डेस्क जॉब करने वालों के लिए 'मार्जरी आसन': गर्दन और पीठ के दर्द से मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑफिस में कुर्सी पर लंबे समय तक बैठे रहने से कमर और गर्दन पर भारी दबाव पड़ता है। कंप्यूटर स्क्रीन की ओर झुककर काम करने से पीठ में अकड़न, कमर दर्द, और गर्दन की जकड़न होना सामान्य है। थोड़ी सी लापरवाही से ये समस्याएं बढ़ जाती हैं। इनसे बचने के लिए सही खान-पान के साथ नियमित व्यायाम भी अत्यंत आवश्यक है।
मार्जरी आसन, जिसे मार्जरासन या बिल्ली आसन भी कहा जाता है, एक प्रभावी योगासन है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में उत्पन्न होने वाली इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ के तनाव को खत्म करने में सहायक होता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मार्जरी आसन (बिल्ली मुद्रा) एक ऐसा योगासन है जो रीढ़ की हड्डी को मजबूत और स्वस्थ बनाने में मदद करता है। यह आसन पीठ को बिल्ली की तरह मोड़ने की मुद्रा में किया जाता है, जिससे रीढ़ की मांसपेशियों को आराम मिलता है, पाचन में सुधार होता है और थायराइड के लिए भी फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना कुछ मिनट मार्जरी आसन का अभ्यास करके दर्द से निजात पाया जा सकता है। इस आसन के दौरान शरीर बिल्ली की मुद्रा में होता है और रीढ़ की हड्डी को आगे-पीछे लहर की तरह हिलाया जाता है, जिससे संपूर्ण स्पाइन लचीला और मजबूत बनता है।
आयुर्वेद के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास करने से लंबर पेन और सायटिका में राहत मिलती है। गर्दन और कंधों की जकड़न दूर होती है, सर्वाइकल पेन में आराम मिलता है। रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, स्पॉन्डिलाइटिस में लाभ पहुँचाता है। पेट की चर्बी कम होती है और पाचन में सुधार होता है। इससे तनाव और चिड़चिड़ापन कम होता है, नींद बेहतर आती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही, यह पूरे शरीर को सक्रिय रखता है और दर्द से राहत दिलाता है।
हालांकि, किसी भी प्रकार के ज्वाइंट पेन से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।