क्या मोमोज और चाऊमीन से डायबिटीज का खतरा और दिल की सेहत प्रभावित होती है?
सारांश
Key Takeaways
- फास्ट फूड से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
- मोमोज और चाऊमीन में उच्च मात्रा में मैदा और नमक होता है।
- बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।
- संतुलित आहार और व्यायाम आवश्यक हैं।
- फास्ट फूड का सेवन मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आजकल फास्ट फूड हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। जब भूख लगती है, तो लोग मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजें आसानी से खरीद लेते हैं। ये चीजें निश्चित रूप से स्वादिष्ट होती हैं, लेकिन ये हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरे का संकेत भी दे सकती हैं।
हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि जिन क्षेत्रों में फास्ट फूड की दुकानें आसानी से उपलब्ध हैं, वहां के निवासियों में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह अध्ययन चेन्नई के विभिन्न इलाकों में किया गया था, और इसके परिणाम अत्यंत चौंकाने वाले हैं।
अध्ययन में यह पाया गया कि जिन लोगों के घर के 400 मीटर के दायरे में मोमोज और चाऊमीन जैसी फास्ट फूड की दुकानें होती हैं, वे बार-बार बाहर का खाना खाने लगते हैं। इससे घर के स्वास्थ्यवर्धक भोजन का सेवन कम होता है। लगातार बाहर का खाना खाने से शरीर में फैट जमा होने लगता है, जिससे मोटापा बढ़ता है और ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है। यही कारण है कि टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
यदि हम मोमोज और चाऊमीन की बात करें, तो ये खाने में बेहद स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन इनमें मैदा, रिफाइंड ऑयल और अधिक नमक होता है। मैदा ब्लड शुगर स्तर को तेजी से बढ़ाता है, जिससे शरीर को इंसुलिन की आवश्यकता बढ़ जाती है। अगर शरीर को बार-बार इतनी अधिक इंसुलिन का सामना करना पड़ता है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस उत्पन्न होने लगता है और यही डायबिटीज की शुरुआत हो सकती है। इसके अलावा, अधिक तेल और नमक का सेवन दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को भी बढ़ाता है।
यह समस्या केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। रिसर्च में यह भी पाया गया है कि स्कूल-कॉलेज के आसपास फास्ट फूड स्टॉल होने से बच्चों और युवाओं में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। आजकल बच्चे हर दूसरे दिन मोमोज और चाऊमीन खा रहे हैं। इससे उनका शरीर जल्दी कैलोरी प्राप्त करने लगता है, वजन बढ़ता है, और ब्लड शुगर स्तर असंतुलित होता है। कम उम्र में ही बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का खतरा उत्पन्न हो रहा है।
फास्ट फूड का नियमित सेवन करने से न केवल वजन और ब्लड शुगर प्रभावित होते हैं, बल्कि इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। तैलीय और नमकीन खाने से शरीर में ऊर्जा का असंतुलन होता है, जिससे बच्चे और युवा जल्दी थक जाते हैं, उनकी एकाग्रता कम होती है, और उन्हें नींद की कमी भी महसूस होती है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने फास्ट फूड को केवल पेट भरने वाली चीज नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे के रूप में बताया है।
लेकिन इससे बचाव संभव है। सबसे महत्वपूर्ण है कि हम अपने खाने की आदतों में संतुलन बनाएं। मोमोज, चाऊमीन और बर्गर जैसी चीजें महीने में सिर्फ एक या दो बार ही खाएं। घर का ताजा और पौष्टिक खाना खाने की आदत डालें, जिसमें दाल, सब्जी, चावल, रोटी और फल शामिल हों। रोजाना कम से कम तीस मिनट की हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। इससे शरीर की कैलोरी बर्न होगी और ब्लड शुगर नियंत्रित रहेगा। इसके अलावा, पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी भी शरीर में मोटापे और डायबिटीज का कारण बन सकती है।