17 अगस्त 2026
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नागालैंड: सैनिक स्कूल पुंगलवा में 678 छात्रों-कर्मचारियों को मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस का टीका लगाया

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नागालैंड: सैनिक स्कूल पुंगलवा में 678 छात्रों-कर्मचारियों को मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस का टीका लगाया

सारांश

सेना की स्पीयर कोर ने नागालैंड के पुंगलवा सैनिक स्कूल में 678 छात्रों और कर्मचारियों को मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस का टीका लगाया। यह कदम राज्य में एक 14 वर्षीय बच्चे में बीमारी के संदिग्ध मामले के बाद जारी स्वास्थ्य एडवाइजरी के मद्देनज़र उठाया गया।

मुख्य बातें

स्पीयर कोर की चिकित्सा टीम ने 17 अगस्त को पुंगलवा सैनिक स्कूल में 678 छात्रों और कर्मचारियों को मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस का टीका लगाया।
टीकाकरण प्रक्रिया में चिकित्सा जाँच, परामर्श और टीके के बाद की निगरानी शामिल थी; कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया नहीं आई।
नागालैंड के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एक 14 वर्षीय बच्चे में संदिग्ध मेनिंगोकोकल रोग के बाद राज्यभर के आवासीय संस्थानों को एडवाइजरी जारी की थी।
बच्चे को 2 अगस्त को सीएचआईएसआर अस्पताल के PICU में भर्ती किया गया; माइक्रोबायोलॉजिकल पुष्टि अभी प्रतीक्षित है।
मेनिंगोकोकल बीमारी 'नीसेरिया मेनिन्जाइटिडिस' बैक्टीरिया से होती है और हॉस्टल जैसे घनी आबादी वाले स्थानों पर तेज़ी से फैल सकती है।

सेना की पूर्वी कमान की स्पीयर कोर ने सोमवार, 17 अगस्त को नागालैंड के पुंगलवा स्थित सैनिक स्कूल में मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के विरुद्ध एक व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया। कोर की विशेष चिकित्सा टीम ने इस अभियान में 678 छात्रों और कर्मचारियों को सफलतापूर्वक टीका लगाया और अधिकारियों के अनुसार कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

अभियान का स्वरूप और प्रक्रिया

टीकाकरण अभियान में केवल टीका लगाना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की पहले चिकित्सा जाँच की गई, फिर परामर्श दिया गया और टीकाकरण के बाद निगरानी भी की गई। स्पीयर कोर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी आधिकारिक पोस्ट में यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि पूरी प्रक्रिया सुचारू रही।

पृष्ठभूमि: क्यों जारी हुई थी एडवाइजरी

यह अभियान नागालैंड के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इसी महीने की शुरुआत में जारी एक सलाह के बाद आयोजित किया गया। विभाग ने राज्य के सभी आवासीय स्कूलों, छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों को मेनिंगोकोकल रोग के लक्षणों के प्रति सतर्क रहने को कहा था।

यह एडवाइजरी एक 14 वर्षीय लड़के में मेनिंगोकोकल रोग के संदिग्ध मामले के बाद जारी की गई थी। बच्चे को 2 अगस्त को सीएचआईएसआर अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती कराया गया था। उसमें तेज बुखार, उल्टी, हाइपोटेंशन, होश में बदलाव और असामान्य शारीरिक मुद्रा जैसे गंभीर लक्षण थे, जो बाद में तेज़ी से फैलने वाले त्वचा के घावों (स्किन लीजन्स) में बदल गए।

विभाग के अनुसार, बच्चे का इलाज अभी सेप्टिक शॉक और पुरपुरा फुलमिनन्स के आधार पर किया जा रहा है और इनवेसिव मेनिंगोकोकल बीमारी (मेनिन्गोकोकेमिया) का संदेह है। माइक्रोबायोलॉजिकल पुष्टि अभी प्रतीक्षित है। बच्चे को इनवेसिव मैकेनिकल वेंटिलेशन, वासोएक्टिव सपोर्ट और गहन देखभाल दी जा रही है।

मेनिंगोकोकल बीमारी: क्या है और कैसे फैलती है

मेनिंगोकोकल बीमारी 'नीसेरिया मेनिन्जाइटिडिस' बैक्टीरिया के कारण होती है और यह मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी की झिल्लियों का संक्रमण) या सेप्टिसीमिया (रक्त का संक्रमण) के रूप में प्रकट हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर दोनों ही स्थितियाँ जानलेवा हो सकती हैं।

यह बीमारी सांस की बूंदों (रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स) और लंबे समय तक करीबी संपर्क से फैलती है — जैसे खाँसना, छींकना, या खाने के बर्तन, पानी की बोतलें और सिगरेट साझा करना। हॉस्टल और डॉर्मेट्री जैसे घनी आबादी वाले स्थानों पर इसके फैलने की आशंका अधिक होती है।

किन लक्षणों पर रखें नज़र

एडवाइजरी में छात्रों, स्टाफ, हॉस्टल वॉर्डन और स्वास्थ्यकर्मियों से इन लक्षणों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है: अचानक तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी, रोशनी से परेशानी, सुस्ती या उलझन, दौरे, और लाल-बैंगनी रंग के चकत्ते जो दबाने पर भी न मिटें। गंभीर मामलों में हाथ-पैर ठंडे पड़ना या शॉक के लक्षण भी हो सकते हैं।

एडवाइजरी में स्पष्ट निर्देश है कि ऐसे लक्षण दिखने पर संबंधित व्यक्ति को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाए। शुरुआती पहचान, त्वरित रिपोर्टिंग और तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई को बीमारी की रोकथाम के लिए अनिवार्य बताया गया है।

आगे की राह

इस टीकाकरण अभियान के बाद सैनिक स्कूल पुंगलवा के 678 छात्र और कर्मचारी अगले कई वर्षों तक मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस से सुरक्षित रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग की सलाह अभी भी प्रदेश के बाकी आवासीय संस्थानों के लिए प्रभावी है और निगरानी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य के बाकी आवासीय संस्थानों तक यह सुरक्षा कब और कैसे पहुँचेगी। एक संदिग्ध मामले के बाद जारी एडवाइजरी और फिर सैनिक स्कूल में त्वरित कार्रवाई — यह अनुक्रम दर्शाता है कि सरकारी तंत्र प्रतिक्रियाशील है, न कि निवारक। नागालैंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहाँ स्वास्थ्य अवसंरचना पहले से सीमित है, हॉस्टल और छात्रावासों में नियमित टीकाकरण प्रोटोकॉल की अनुपस्थिति एक बड़ी नीतिगत खामी है जिसे इस घटना ने उजागर किया है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड के सैनिक स्कूल में किस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण किया गया?
पुंगलवा स्थित सैनिक स्कूल में मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के विरुद्ध टीकाकरण किया गया। यह बीमारी 'नीसेरिया मेनिन्जाइटिडिस' बैक्टीरिया से होती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती है।
यह टीकाकरण अभियान क्यों चलाया गया?
नागालैंड के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एक 14 वर्षीय बच्चे में मेनिंगोकोकल रोग के संदिग्ध मामले के बाद राज्यभर के आवासीय संस्थानों को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की थी। इसी के मद्देनज़र सेना की स्पीयर कोर ने यह अभियान आयोजित किया।
मेनिंगोकोकल बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी, रोशनी से परेशानी, सुस्ती या उलझन, दौरे और लाल-बैंगनी रंग के चकत्ते शामिल हैं जो दबाने पर भी नहीं मिटते। गंभीर मामलों में हाथ-पैर ठंडे पड़ना या शॉक के लक्षण भी हो सकते हैं।
यह बीमारी कैसे फैलती है और हॉस्टल में इसका खतरा क्यों अधिक है?
मेनिंगोकोकल बीमारी सांस की बूंदों और लंबे समय तक करीबी संपर्क से फैलती है — जैसे खाँसना, छींकना, या खाने के बर्तन व पानी की बोतलें साझा करना। हॉस्टल और डॉर्मेट्री जैसे घनी आबादी वाले स्थानों पर एक-दूसरे की निकटता के कारण संक्रमण तेज़ी से फैल सकता है।
संदिग्ध मरीज 14 वर्षीय बच्चे की अभी क्या स्थिति है?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बच्चे को 2 अगस्त को सीएचआईएसआर अस्पताल के PICU में भर्ती किया गया था और उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उसे इनवेसिव मैकेनिकल वेंटिलेशन, वासोएक्टिव सपोर्ट और गहन देखभाल दी जा रही है; माइक्रोबायोलॉजिकल पुष्टि प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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