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पद्म श्री 2026: हीमोफीलिया विशेषज्ञ डॉ. हनगवाड़ी और कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रेड्डी होंगे सम्मानित

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पद्म श्री 2026: हीमोफीलिया विशेषज्ञ डॉ. हनगवाड़ी और कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रेड्डी होंगे सम्मानित

सारांश

25 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में होने वाले पद्म अलंकरण समारोह में दो चिकित्सकों को विशेष पहचान मिलेगी — हीमोफीलिया के लिए डॉ. सुरेश हनगवाड़ी और कैंसर उपचार के लिए डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी। दोनों ने इसे व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय की उपलब्धि बताया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 25 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में पद्म श्री 2026 पुरस्कार प्रदान करेंगी।
सुरेश हनगवाड़ी ( दावणगेरे, कर्नाटक ) को हीमोफीलिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म श्री मिलेगा।
विजय आनंद रेड्डी ( हैदराबाद, तेलंगाना ) को कैंसर (ऑन्कोलॉजी) में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा।
हनगवाड़ी ने सरकार से आरपीडब्ल्यूडी एक्ट के तहत हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों को नौकरियों में आरक्षण देने की अपील की।
पद्म पुरस्कारों की घोषणा 25 जनवरी 2026 को भारत सरकार द्वारा की गई थी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 25 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में पद्म श्री 2026 पुरस्कार प्रदान करेंगी, जिसमें चिकित्सा क्षेत्र के दो विशिष्ट विशेषज्ञों — दावणगेरे (कर्नाटक) के हीमोफीलिया विशेषज्ञ डॉ. सुरेश हनगवाड़ी और हैदराबाद (तेलंगाना) के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी — को यह सम्मान दिया जाएगा। भारत सरकार ने 25 जनवरी 2026 को इन पुरस्कारों की घोषणा की थी।

किसे और क्यों मिल रहा है सम्मान

डॉ. सुरेश हनगवाड़ी को हीमोफीलिया के उपचार और जागरूकता के क्षेत्र में दशकों की अनवरत सेवा के लिए पद्म श्री से नवाज़ा जा रहा है। वहीं डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी को कैंसर (ऑन्कोलॉजी) के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो रहा है। उल्लेखनीय है कि पद्म श्री देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, विज्ञान, चिकित्सा और सामाजिक कार्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

डॉ. हनगवाड़ी का संदेश: हीमोफीलिया से जंग

डॉ. हनगवाड़ी ने इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मुझे प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार पाकर सचमुच बहुत खुशी हो रही है। हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जो कम लोगों में होती है लेकिन इसका इलाज बहुत महंगा है। इस क्षेत्र में मेरी सेवा को पहचान मिलना मेरा सौभाग्य है।' उन्होंने भारत सरकार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री और पूरे मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

डॉ. हनगवाड़ी ने बताया कि हीमोफीलिया से पीड़ित अधिकांश बच्चे किशोरावस्था तक पहुँचते-पहुँचते विकलांग हो जाते हैं, लेकिन यह विकलांगता रोकी जा सकती है। उन्होंने कहा, 'प्रोफिलैक्टिक इलाज और नॉन-फैक्टर थेरेपी जैसे नए उपचार उपलब्ध कराने से खून न बहने की स्थिति बनाई जा सकती है, जिससे जोड़ों को नुकसान नहीं पहुँचेगा और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।'

उन्होंने शिक्षा पर भी ज़ोर दिया और बताया कि हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चे बार-बार स्कूल से अनुपस्थित रहने के कारण शैक्षणिक रूप से पिछड़ जाते हैं। डॉ. हनगवाड़ी ने सरकार से अपील की कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट के तहत इन बच्चों को नौकरियों में आरक्षण दिया जाए ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें। यह पुरस्कार उन्होंने पूरे हीमोफीलिया समुदाय, अपने 'ब्लड ब्रदर्स', छात्रों और उन सभी सहयोगियों को समर्पित किया जिन्होंने इस यात्रा में योगदान दिया।

डॉ. रेड्डी की प्रतिक्रिया: पूरे ऑन्कोलॉजी समुदाय की उपलब्धि

हैदराबाद के प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी ने कहा, 'मैं भारत सरकार द्वारा मुझे दिए गए इस अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान को स्वीकार करता हूँ। इस पुरस्कार को पाकर मैं अत्यंत विनम्र और सम्मानित महसूस कर रहा हूँ।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के ऑन्कोलॉजी समुदाय, उनके मरीजों, मार्गदर्शकों, शिक्षकों और परिवार की साझा उपलब्धि है।

राष्ट्रीय महत्व और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में दुर्लभ बीमारियों और कैंसर के उपचार में नवाचार तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि क्षेत्रीय स्तर पर काम करने वाले चिकित्सकों को राष्ट्रीय सम्मान मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार महानगरों से परे स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान को भी पहचान दे रही है। दावणगेरे और हैदराबाद जैसे शहरों से आए इन विशेषज्ञों का चयन दुर्लभ और जटिल बीमारियों के क्षेत्र में हो रहे ज़मीनी कार्य को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करता है।

आगे, इस समारोह के बाद दोनों चिकित्सकों के कार्यों और उनके संस्थानों को और अधिक राष्ट्रीय ध्यान मिलने की उम्मीद है, जो हीमोफीलिया और कैंसर उपचार में नीति-निर्माण को भी प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

डॉ. हनगवाड़ी की आरपीडब्ल्यूडी एक्ट के तहत आरक्षण की माँग यह भी उजागर करती है कि पुरस्कार के बावजूद हीमोफीलिया पीड़ितों के लिए नीतिगत ढाँचा अभी अधूरा है। कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के क्षेत्र में व्यक्तिगत उत्कृष्टता को मान्यता देना ज़रूरी है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इन विशेषज्ञों के अनुभव को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में कितना शामिल किया जाता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्म श्री 2026 के चिकित्सा क्षेत्र के विजेता कौन हैं?
पद्म श्री 2026 में चिकित्सा क्षेत्र से दो विशेषज्ञों को सम्मानित किया जा रहा है — दावणगेरे (कर्नाटक) के हीमोफीलिया विशेषज्ञ डॉ. सुरेश हनगवाड़ी और हैदराबाद (तेलंगाना) के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी। यह घोषणा 25 जनवरी 2026 को की गई थी।
पद्म श्री समारोह 2026 कब और कहाँ होगा?
पद्म श्री 2026 का नागरिक अलंकरण समारोह 25 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुरस्कार प्रदान करेंगी।
डॉ. सुरेश हनगवाड़ी हीमोफीलिया के बारे में क्या कहते हैं?
डॉ. हनगवाड़ी के अनुसार हीमोफीलिया पीड़ित अधिकांश बच्चे किशोरावस्था तक विकलांग हो जाते हैं, लेकिन प्रोफिलैक्टिक इलाज और नॉन-फैक्टर थेरेपी से यह विकलांगता रोकी जा सकती है। उन्होंने सरकार से आरपीडब्ल्यूडी एक्ट के तहत इन बच्चों को नौकरियों में आरक्षण देने की अपील भी की है।
पद्म श्री पुरस्कार क्या है और इसका महत्व क्या है?
पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, सामाजिक कार्य और सार्वजनिक जीवन में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। इस वर्ष चिकित्सा क्षेत्र के विजेताओं का चयन दुर्लभ बीमारियों और कैंसर उपचार में हो रहे नवाचारों को राष्ट्रीय मान्यता देता है।
डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी ने पद्म श्री पर क्या कहा?
डॉ. रेड्डी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के ऑन्कोलॉजी समुदाय, उनके मरीजों, मार्गदर्शकों, शिक्षकों और परिवार की साझा उपलब्धि है। उन्होंने इसे अत्यंत विनम्रता के साथ स्वीकार किया।
राष्ट्र प्रेस
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