30 सितंबर 2026
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उत्तानपादासन से घटाएँ पेट की चर्बी: आयुष मंत्रालय की सलाह, जानें सही विधि और फायदे

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उत्तानपादासन से घटाएँ पेट की चर्बी: आयुष मंत्रालय की सलाह, जानें सही विधि और फायदे

सारांश

पेट की चर्बी और पाचन की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए उत्तानपादासन एक आज़माया हुआ हठयोग उपाय है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन नाभि केंद्र को संतुलित करते हुए रक्त संचार, मानसिक शांति और रीढ़ की मज़बूती में भी योगदान देता है।

मुख्य बातें

उत्तानपादासन एक हठयोग आसन है जिसमें पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाया जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पेट की चर्बी, गैस, कब्ज़ और एसिडिटी में विशेष रूप से लाभकारी है।
यह मणिपुर चक्र (नाभि केंद्र) , रीढ़ की हड्डी और जाँघों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
नियमित अभ्यास से तनाव, अवसाद और चिंता में कमी आती है और रक्त संचार बेहतर होता है।
गर्भवती महिलाओं तथा कमर, पीठ या पेट में गंभीर चोट वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए ।

उत्तानपादासन एक प्रमुख हठयोग आसन है, जिसे आयुष मंत्रालय पेट की चर्बी घटाने, पाचन सुधारने और नाभि केंद्र को संतुलित रखने के लिए विशेष रूप से अनुशंसित करता है। 30 सितंबर 2026 को योग विशेषज्ञों के अनुसार यह आसन आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न शारीरिक और मानसिक असंतुलन को दूर करने में प्रभावी सिद्ध होता है। पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाने की यह सरल मुद्रा शरीर के नाभि केंद्र, अर्थात् मणिपुर चक्र, पर सीधा असर डालती है।

उत्तानपादासन क्या है और इसका अर्थ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्तानपादासन संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'उत्तान' अर्थात् 'ऊपर उठा हुआ' और 'पाद' अर्थात् 'पैर'। सरल शब्दों में, यह 'पैरों को ऊपर उठाकर की जाने वाली मुद्रा' है। यह आसन हठयोग के पारंपरिक और आधुनिक दोनों अभ्यासों में शरीर को स्थिर एवं सुदृढ़ बनाने वाले प्रमुख आसनों में गिना जाता है।

इस आसन में साधक पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को जमीन से एक निश्चित कोण पर ऊपर उठाता है। इस प्रक्रिया में मणिपुर चक्र (नाभि केंद्र) पर सीधा दबाव और खिंचाव उत्पन्न होता है, जो शरीर की आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करने में सहायक है।

मुख्य शारीरिक लाभ

उत्तानपादासन का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव पेट के निचले भाग और पाचन तंत्र पर पड़ता है। यह आसन पेट की मांसपेशियों को सुडौल बनाता है और नाभि को उसके सही स्थान पर बनाए रखने में मदद करता है। जो लोग गैस, कब्ज, एसिडिटी या मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी बताया जाता है।

इसके अतिरिक्त, यह रीढ़ की हड्डी और जाँघों की मांसपेशियों को भी शक्ति प्रदान करता है। नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और नर्वस सिस्टम संतुलित रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

यह आसन केवल शारीरिक लाभ तक सीमित नहीं है। गहरी साँस लेते हुए पैरों को ऊपर उठाने की प्रक्रिया से मन की एकाग्रता बढ़ती है और दिमाग को शांति मिलती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से अवसाद, तनाव और चिंता जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

शरीर की थकान और मानसिक बोझ को कम करके यह आसन सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे मन हल्का और शांत अनुभव करता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब शहरी जीवनशैली में तनाव और नींद की समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, कमर, पीठ या पेट में गंभीर चोट अथवा दर्द की समस्या वाले व्यक्तियों को भी इससे परहेज़ करने की सलाह दी जाती है। किसी भी नए योग अभ्यास को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित योग गुरु अथवा चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।

आगे की राह

आयुष मंत्रालय योग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का अभिन्न हिस्सा मानता है और उत्तानपादासन जैसे आसनों के प्रचार-प्रसार पर निरंतर ज़ोर देता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे रोज़ाना की दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम में एक सस्ता और प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि इन दावों को सुदृढ़ नैदानिक साक्ष्यों से और अधिक समर्थन की ज़रूरत है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के किए गए योग अभ्यास चोट का कारण बन सकते हैं — जिस पर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार में अक्सर पर्याप्त ज़ोर नहीं दिया जाता।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तानपादासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
उत्तानपादासन एक हठयोग आसन है जिसमें पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को जमीन से एक निश्चित कोण पर ऊपर उठाया जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के दौरान गहरी साँस लेते हुए पैरों को धीरे-धीरे ऊँचा उठाना चाहिए।
उत्तानपादासन से पेट की चर्बी कैसे कम होती है?
यह आसन पेट के निचले भाग और नाभि केंद्र (मणिपुर चक्र) पर सीधा खिंचाव उत्पन्न करता है, जिससे पेट की मांसपेशियाँ सक्रिय और सुडौल होती हैं। नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और मोटापे में कमी आती है।
उत्तानपादासन के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या फायदे हैं?
इस आसन के नियमित अभ्यास से नर्वस सिस्टम संतुलित होता है, रक्त संचार बेहतर होता है और मन को शांति मिलती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक है।
उत्तानपादासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं तथा कमर, पीठ या पेट में गंभीर चोट अथवा दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। नया अभ्यास शुरू करने से पहले किसी प्रशिक्षित योग गुरु या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
उत्तानपादासन का नाभि चक्र से क्या संबंध है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन में पैरों को ऊपर उठाने से नाभि केंद्र यानी मणिपुर चक्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यह चक्र पाचन, ऊर्जा संतुलन और आत्मविश्वास से जुड़ा माना जाता है और इस आसन से इसे संतुलित रखने में मदद मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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