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उत्थित पार्श्वकोणासन: तनाव से मुक्ति और एकाग्रता बढ़ाने का सरल योगाभ्यास

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उत्थित पार्श्वकोणासन: तनाव से मुक्ति और एकाग्रता बढ़ाने का सरल योगाभ्यास

सारांश

व्यस्त जीवनशैली में तनाव और एकाग्रता की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए उत्थित पार्श्वकोणासन एक समग्र समाधान है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पाचन, रीढ़ की मज़बूती और मानसिक स्थिरता — तीनों पर एक साथ काम करता है।

मुख्य बातें

उत्थित पार्श्वकोणासन खड़े होकर किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण योगासनों में से एक है, जिसे आयुष मंत्रालय ने मान्यता दी है।
यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, रीढ़ और पैरों को मज़बूत करता है और शरीर में लचीलापन बढ़ाता है।
साइटिका के दर्द में राहत मिलती है; गंभीर मामलों में पहले चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।
गंभीर पीठ/गर्दन चोट, उच्च/निम्न रक्तचाप और माइग्रेन पीड़ितों को इस आसन से बचना चाहिए।
नियमित अभ्यास से मानसिक एकाग्रता और तनाव में कमी जैसे दीर्घकालिक लाभ मिलते हैं।

उत्थित पार्श्वकोणासन — जिसे विस्तारित पार्श्व कोण मुद्रा भी कहा जाता है — आज की व्यस्त और तनावपूर्ण दिनचर्या में शारीरिक संतुलन, लचीलापन और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने का एक प्रभावशाली उपाय है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह खड़े होकर किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण योगासनों में से एक है, जो शरीर के कई तंत्रों पर एक साथ सकारात्मक प्रभाव डालता है।

आसन का अर्थ और महत्व

संस्कृत में 'उत्थित' का अर्थ है खिंचाव या विस्तार, 'पार्श्व' का अर्थ है बगल (साइड), और 'कोण' का अर्थ है कोना या एंगल। इस आसन में शरीर के पार्श्व भाग में एक संपूर्ण और सुडौल कोण बनता है, जो इसे अन्य आसनों से अलग और विशेष बनाता है। यह आसन न केवल शारीरिक शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि मन में स्थिरता और ध्यान की गहराई भी लाता है।

स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से पेट के आंतरिक अंगों की प्राकृतिक मालिश होती है, जिससे पाचन तंत्र में सुधार आता है। इसके साथ ही पैरों की मांसपेशियाँ और रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है। छाती का विकास होता है और साइटिका के दर्द में राहत मिलती है। गौरतलब है कि यदि कोई व्यक्ति साइटिका की गंभीर समस्या से पीड़ित है, तो उसे पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

शरीर में लचीलापन बढ़ने के साथ-साथ रीढ़ पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब घंटों बैठकर काम करने की जीवनशैली से पीठ और कमर की समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

आसन करने की विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सीधे खड़े हो जाएँ और दोनों पैरों को एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर फैलाएँ। अब दाहिने पैर के पंजे को बाहर की ओर घुमाएँ और घुटने को धीरे-धीरे मोड़ते हुए नीचे की ओर बैठने की स्थिति में आएँ। इसके बाद दाएं हाथ को दाएं पैर के पास ज़मीन पर टिकाएँ और बाएं हाथ को सिर के ऊपर से 90 डिग्री के कोण में सीधा फैलाएँ।

कुछ क्षण इसी मुद्रा में रुकें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएँ। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को पहले कुछ प्रयासों में थोड़ी कठिनाई हो सकती है, परंतु नियमित अभ्यास से शरीर इस मुद्रा के अनुकूल हो जाता है। यही प्रक्रिया बाईं ओर से भी दोहराएँ।

सावधानियाँ और प्रतिबंध

जिन व्यक्तियों को गंभीर पीठ या गर्दन की चोट है, उच्च या निम्न रक्तचाप की समस्या है, अथवा जो माइग्रेन से पीड़ित हैं, उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले योग्य योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।

नियमित अभ्यास का दीर्घकालिक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्थित पार्श्वकोणासन को यदि दैनिक योग दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। तनाव में कमी, बेहतर नींद और बढ़ी हुई कार्यक्षमता इसके दीर्घकालिक लाभों में शामिल हैं। इस आसन को अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाकर एक संतुलित और ऊर्जावान जीवनशैली की ओर कदम बढ़ाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस तरह की सामग्री अक्सर एक महत्वपूर्ण पहलू को नज़रअंदाज़ करती है — व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग की अनुकूलनशीलता। साइटिका, रक्तचाप और माइग्रेन जैसी स्थितियों में 'पहले डॉक्टर से मिलें' की सलाह अक्सर सामान्य पाठक तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँचती। भारत में योग की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है, परंतु प्रशिक्षित मार्गदर्शन के बिना अभ्यास से चोट के मामले भी बढ़ रहे हैं — यह वह संदर्भ है जिसे स्वास्थ्य-केंद्रित समाचार कवरेज में अधिक स्थान मिलना चाहिए।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्थित पार्श्वकोणासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
उत्थित पार्श्वकोणासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें शरीर के पार्श्व भाग में 90 डिग्री का कोण बनाया जाता है। इसके लिए पैरों को फैलाकर एक घुटना मोड़ें, एक हाथ ज़मीन पर और दूसरा ऊपर सीधा फैलाएँ, फिर यही प्रक्रिया दूसरी ओर दोहराएँ।
उत्थित पार्श्वकोणासन के क्या-क्या फायदे हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पेट के अंगों की मालिश करता है, पाचन सुधारता है, पैरों और रीढ़ को मज़बूत बनाता है, छाती का विकास करता है और साइटिका के दर्द में राहत देता है। नियमित अभ्यास से मानसिक एकाग्रता और तनाव में भी कमी आती है।
क्या साइटिका के मरीज़ यह आसन कर सकते हैं?
साइटिका के हल्के मामलों में यह आसन राहत दे सकता है, लेकिन गंभीर साइटिका की स्थिति में अभ्यास से पहले चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य है। बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन के अभ्यास स्थिति को बिगाड़ सकता है।
उत्थित पार्श्वकोणासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
गंभीर पीठ या गर्दन की चोट, उच्च या निम्न रक्तचाप, और माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी शारीरिक असुविधा की स्थिति में योग प्रशिक्षक या चिकित्सक की सलाह पहले लें।
शुरुआती लोग उत्थित पार्श्वकोणासन कैसे सीखें?
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को पहले कुछ प्रयासों में कठिनाई हो सकती है क्योंकि शरीर इस मुद्रा का अभ्यस्त नहीं होता। धीरे-धीरे और नियमित अभ्यास से शरीर खुलने लगता है; शुरुआत में किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में अभ्यास करना सबसे उचित रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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