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नींद न आने की वजह हो सकती है विटामिन D, B12, मैग्नीशियम और आयरन की कमी — जानें क्या कहते हैं शोध

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नींद न आने की वजह हो सकती है विटामिन D, B12, मैग्नीशियम और आयरन की कमी — जानें क्या कहते हैं शोध

सारांश

रात को करवटें बदलने की वजह सिर्फ तनाव नहीं हो सकती — शोध बताते हैं कि विटामिन D, B12, मैग्नीशियम और आयरन की कमी भी नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकती है। लंबे समय तक खराब नींद के साथ थकान और चिड़चिड़ापन हो तो डॉक्टरी जाँच जरूरी है।

मुख्य बातें

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार विटामिन D की कमी से नींद की अवधि घट सकती है और रात में नींद बार-बार टूट सकती है।
विटामिन B12 शरीर की 'बॉडी क्लॉक' को संतुलित रखता है; इसकी कमी से नींद-जागने का प्राकृतिक चक्र प्रभावित हो सकता है।
मैग्नीशियम की कमी से बेचैनी और तनाव बढ़ सकता है, जिससे नींद आने में कठिनाई होती है।
आयरन कम होने पर ऑक्सीजन प्रवाह बाधित होता है और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का जोखिम बढ़ सकता है।
लंबे समय तक नींद न आने के साथ थकान, सिरदर्द या मूड में बदलाव हो तो चिकित्सक से जाँच अनिवार्य है।

रात को बिस्तर पर लेटने के बावजूद घंटों नींद न आना, बार-बार नींद टूटना या सुबह उठकर भी थकान महसूस करना — ये शिकायतें आज बड़ी संख्या में लोगों की हैं। आमतौर पर इसके लिए तनाव, अनियमित दिनचर्या या स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग जिम्मेदार माना जाता है। हालाँकि वैज्ञानिक शोध संकेत देते हैं कि कई मामलों में शरीर में विटामिन D, विटामिन B12, मैग्नीशियम और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

नींद क्यों जरूरी है

शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद के दौरान शरीर की मरम्मत होती है, मस्तिष्क दिनभर की जानकारियों को व्यवस्थित करता है और हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यदि यह प्रक्रिया लगातार बाधित होती रहे, तो थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। गौरतलब है कि खराब नींद का सिलसिला लंबा खिंचने पर यह समस्या और जटिल हो जाती है।

विटामिन D और नींद का संबंध

शोधों में विटामिन D को नींद से जुड़े महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में गिना गया है। यह विटामिन केवल हड्डियों की मजबूती के लिए नहीं, बल्कि मस्तिष्क और शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों में विटामिन D का स्तर कम होता है, उनमें नींद की अवधि घट सकती है या रात में नींद बार-बार टूट सकती है। हालाँकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह संबंध हर व्यक्ति में एकसमान नहीं होता।

विटामिन B12, मैग्नीशियम और आयरन की भूमिका

विटामिन B12 शरीर की तंत्रिका प्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है और यह शरीर की आंतरिक 'बॉडी क्लॉक' को संतुलित रखने में सहायक है। जब इसका स्तर बहुत कम हो जाता है, तो कुछ लोगों में नींद और जागने के प्राकृतिक चक्र पर असर पड़ सकता है, साथ ही थकान और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएँ भी सामने आ सकती हैं।

मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने और तंत्रिका तंत्र को शांत रखने में मदद करता है। इसकी कमी से बेचैनी, तनाव और नींद आने में परेशानी हो सकती है।

आयरन की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में आयरन कम होने पर ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है, जिससे लगातार थकान बनी रहती है। कुछ लोगों में यह स्थिति 'रेस्टलेस लेग सिंड्रोम' से भी जुड़ी हो सकती है — एक ऐसी समस्या जिसमें पैरों में असहजता महसूस होती है और नींद टूटती रहती है।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से नींद न आने की समस्या है और इसके साथ-साथ लगातार कमजोरी, बार-बार मूड बदलना, सिरदर्द या सामान्य कार्यों में भी अत्यधिक थकान महसूस हो रही है, तो चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जाँच करानी चाहिए। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब शहरी आबादी में पोषण संबंधी कमियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। समय रहते जाँच और उचित उपचार से नींद की गुणवत्ता में सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पोषण-आधारित कारणों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। शहरी भारत में प्रोसेस्ड फूड और सूरज की रोशनी से दूरी ने इन कमियों को और गहरा किया है। जब तक जाँच-आधारित निदान को सामान्य स्वास्थ्य व्यवहार का हिस्सा नहीं बनाया जाता, तब तक नींद की समस्या का असली कारण अनदेखा ही रहेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नींद न आने और पोषक तत्वों की कमी का क्या संबंध है?
शोधों के अनुसार विटामिन D, B12, मैग्नीशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व नींद की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। इनकी कमी से नींद की अवधि घटना, रात में बार-बार जागना या सुबह थकान महसूस करना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
विटामिन D की कमी नींद को कैसे प्रभावित करती है?
अध्ययनों के अनुसार विटामिन D का स्तर कम होने पर नींद की अवधि घट सकती है और रात में नींद बार-बार टूट सकती है। यह विटामिन मस्तिष्क की कई जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है, हालाँकि यह प्रभाव हर व्यक्ति में एकसमान नहीं होता।
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम क्या है और यह नींद से कैसे जुड़ा है?
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैरों में असहजता या बेचैनी महसूस होती है, जिससे नींद बाधित होती है। डॉक्टरों के अनुसार यह समस्या कुछ मामलों में शरीर में आयरन की कमी से जुड़ी हो सकती है।
मैग्नीशियम की कमी से नींद पर क्या असर पड़ता है?
मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने और तंत्रिका तंत्र को शांत रखने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर बेचैनी और तनाव बढ़ सकता है, जिससे नींद आने में परेशानी होती है।
नींद की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि लंबे समय से नींद न आने के साथ-साथ लगातार थकान, सिरदर्द, बार-बार मूड बदलना या सामान्य कार्यों में भी अत्यधिक थकान महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जाँच करानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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