9 अगस्त 2026
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राजमहेंद्रवरम: नशे में कार चलाने वालों ने ली मेडिकल छात्रा की जान, अब गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा

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राजमहेंद्रवरम: नशे में कार चलाने वालों ने ली मेडिकल छात्रा की जान, अब गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा

सारांश

एमडी प्रथम वर्ष की छात्रा के. प्रियंका की मौत ने राजमहेंद्रवरम को झकझोर दिया। नशे में धुत दो युवकों ने मॉल स्टाफ से मारपीट के बाद भागते हुए स्कूटी को तीन बार टक्कर मारी। छह दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद रविवार को उनकी मौत हो गई। अब आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होगा।

मुख्य बातें

प्रियंका (28 वर्ष), जीएसएल मेडिकल कॉलेज की एमडी प्रथम वर्ष छात्रा, की 9 अगस्त को केआईएमएस अस्पताल, सिकंदराबाद में दोपहर 3:25 बजे मौत हुई।
घटना 3 अगस्त की रात राजमहेंद्रवरम के एक मॉल के पास हुई; आरोपियों ने स्कूटी को तीन बार टक्कर मारी।
आरोपी सुवारापु दसवांथ और एंड्रयू जोसेफ एडवर्ड्स कथित तौर पर नशे में थे और मॉल स्टाफ से मारपीट के बाद भाग रहे थे।
पहले बीएनएस धारा 110 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश) के तहत मामला दर्ज था; मृत्यु के बाद अब गैर-इरादतन हत्या की धारा लगेगी।
नरसिम्हा किशोर ने निष्पक्ष जाँच का आश्वासन दिया; मुख्यमंत्री एन.
चंद्रबाबू नायडू के निर्देश पर मामले की निगरानी।
पिता वेंकटेश ने सख्त कार्रवाई की माँग की; अंतिम संस्कार एकलासपुर गाँव, गडवाल जिला में होगा।

आंध्र प्रदेश के राजमहेंद्रवरम में 3 अगस्त की रात एक मॉल के पास नशे में धुत दो युवकों की तेज़ रफ़्तार कार की चपेट में आई मेडिकल छात्रा के. प्रियंका (28 वर्ष) की 9 अगस्त, रविवार को दोपहर 3:25 बजे सिकंदराबाद के केआईएमएस अस्पताल में मौत हो गई। वह जीएसएल मेडिकल कॉलेज, राजमहेंद्रवरम से डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) प्रथम वर्ष की छात्रा थीं और तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले के एकलासपुर गाँव की मूल निवासी थीं।

घटना का पूरा घटनाक्रम

3 अगस्त की रात प्रियंका अपने दोस्त उमेश के साथ स्कूटी से मॉल के बाहर निकल रही थीं। इसी दौरान सुवारापु दसवांथ और एंड्रयू जोसेफ एडवर्ड्स — जो कथित तौर पर शराब के नशे में थे — ने अपनी कार से स्कूटी को तीन बार टक्कर मारी। पुलिस जाँच के अनुसार, इससे पहले दोनों आरोपियों को मॉल स्टाफ ने नशे की हालत में होने के कारण प्रवेश से रोक दिया था, जिसके बाद उनकी स्टाफ से बहस हुई और मारपीट हुई। सिक्योरिटी गार्ड्स द्वारा पकड़े जाने से बचने के लिए वे तेज़ी से गाड़ी भगाते हुए निकले और मॉल के गेट पर खड़ी स्कूटी से टकरा गए।

गंभीर रूप से घायल प्रियंका को पहले एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर किया गया। वह तब से वेंटिलेटर पर थीं और डॉक्टरों ने उन्हें पहले ही ब्रेन-डेड घोषित कर दिया था।

पुलिस कार्रवाई और बदलती धाराएँ

पूर्वी गोदावरी जिले के पुलिस अधीक्षक डी. नरसिम्हा किशोर ने रविवार को बताया कि आरोपियों के विरुद्ध पहले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 110 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश) के तहत मामला दर्ज था। प्रियंका की मृत्यु के बाद अब इस मुकदमे की धारा बदलकर गैर-इरादतन हत्या की जाएगी, जो कहीं अधिक गंभीर अपराध है। उमेश के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जाँच पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष जाँच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाने के लिए सख्त प्रावधान लागू करेगी।

परिवार की पीड़ा और न्याय की माँग

प्रियंका के पिता वेंकटेश पुलिस अधिकारियों से मिले और आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि पुलिस के आश्वासन से उनकी शंकाएँ दूर हुई हैं और उन्हें पुलिस जाँच तथा न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। पोस्टमॉर्टम के बाद प्रियंका के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए गडवाल जिले के एकलासपुर गाँव ले जाया जाएगा।

नशे में वाहन चलाने की बढ़ती घटनाएँ

यह घटना ऐसे समय में आई है जब देश भर में नशे में वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर चिंता गहराती जा रही है। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाओं में अक्सर युवा और होनहार जीवन असमय काल-कवलित हो जाते हैं। आलोचकों का कहना है कि मॉल और सार्वजनिक स्थलों के बाहर कड़ी यातायात निगरानी और शराब पीकर गाड़ी चलाने पर सख्त दंडात्मक प्रावधान ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकते हैं। आगे इस मामले में अदालत का फैसला और आरोपियों को मिलने वाली सज़ा एक मिसाल कायम करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर लागू नहीं। मॉल स्टाफ ने आरोपियों को नशे में देखकर प्रवेश रोका — यानी खतरे की पहचान हो चुकी थी — फिर भी वे सार्वजनिक सड़क पर तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चला सके। यह सवाल उठता है कि ऐसी स्थितियों में पुलिस की तत्काल उपस्थिति या सूचना-तंत्र कहाँ था। धारा बदलकर गैर-इरादतन हत्या करना ज़रूरी कदम है, लेकिन असली जवाबदेही तब तय होगी जब अदालत त्वरित सुनवाई कर कड़ी सज़ा सुनाए — अन्यथा यह मामला भी लंबित मुकदमों की भीड़ में खो जाएगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. प्रियंका कौन थीं और उनकी मौत कैसे हुई?
के. प्रियंका (28 वर्ष) तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले की रहने वाली थीं और राजमहेंद्रवरम के जीएसएल मेडिकल कॉलेज में एमडी प्रथम वर्ष की छात्रा थीं। 3 अगस्त की रात नशे में धुत दो युवकों की कार ने उनकी स्कूटी को तीन बार टक्कर मारी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हुईं और 9 अगस्त को हैदराबाद के केआईएमएस अस्पताल में उनका निधन हो गया।
आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
आरोपी सुवारापु दसवांथ और एंड्रयू जोसेफ एडवर्ड्स को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पहले उन पर बीएनएस धारा 110 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश) का मामला दर्ज था; प्रियंका की मृत्यु के बाद पुलिस अब धारा बदलकर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करेगी, जो अधिक गंभीर अपराध है।
दुर्घटना की परिस्थितियाँ क्या थीं?
पुलिस जाँच के अनुसार, दोनों आरोपी नशे की हालत में मॉल में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन स्टाफ ने रोक दिया। इसके बाद मारपीट हुई और सिक्योरिटी गार्ड्स से बचने के लिए भागते हुए उन्होंने तेज़ और लापरवाही से गाड़ी चलाई और मॉल के गेट पर खड़ी स्कूटी को तीन बार टक्कर मारी।
क्या इस मामले में राजनीतिक दबाव की आशंका है?
पुलिस अधीक्षक डी. नरसिम्हा किशोर ने स्पष्ट किया है कि जाँच पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष जाँच हो रही है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाने के लिए सख्त प्रावधान लागू किए जाएँगे।
प्रियंका के परिवार की क्या स्थिति है और अब आगे क्या होगा?
प्रियंका के पिता वेंकटेश ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर सख्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि पुलिस के आश्वासन से उनकी शंकाएँ दूर हुई हैं और उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है। पोस्टमॉर्टम के बाद प्रियंका के पार्थिव शरीर को गडवाल जिले के एकलासपुर गाँव में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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