क्या सरसों का तेल सर्दियों में त्वचा के लिए नेचुरल मॉइस्चराइजर है?
सारांश
Key Takeaways
- सरसों का तेल सर्दियों में त्वचा को नमी प्रदान करता है।
- यह फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा करता है।
- स्किन बैरियर को सुधारने में मदद करता है।
- यह प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण रखता है।
- रक्त संचार को बेहतर बनाकर त्वचा में चमक लाता है।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जैसे ही सर्दियों का मौसम आता है, हमारी त्वचा पर इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगता है। ठंडी हवा, कम धूप, गर्म पानी से स्नान और नमी की कमी, ये सभी कारण मिलकर त्वचा को रूखा, बेजान और खिंचा-खिंचा बना देते हैं। इस दौरान बहुत से लोग बाजार में मिलने वाले महंगे बॉडी लोशन, क्रीम और मॉइश्चराइजर का सहारा लेते हैं।
हालांकि, कुछ पारंपरिक उपाय भी हैं, जो सर्दियों में त्वचा की देखभाल में शानदार काम कर सकते हैं। इनमें से एक है सरसों का तेल, जिसका प्रयोग आयुर्वेद में कई सदियों से किया जाता रहा है।
आयुर्वेद के अनुसार, सरसों का तेल शरीर को गर्म रखने में सहायक होता है। यही कारण है कि सर्दियों में इसका उपयोग त्वचा के लिए विशेष फायदेमंद होता है। विज्ञान भी यह मानता है कि सरसों के तेल में मौजूद फैटी एसिड, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा की सेहत को सुधारने में मदद करते हैं। यह तेल केवल त्वचा को नमी देने में ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे अंदर से मजबूत और चमकदार भी बनाता है।
सर्दियों में ठंडी हवा हमारी त्वचा की नमी को छीन लेती है, जिससे त्वचा ड्राई और फटने लगती है। सरसों का तेल गाढ़ा होता है और इसमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जब इसे हल्के हाथों से त्वचा पर लगाया जाता है, तो यह गहराई तक जाकर नमी को लॉक करता है। आयुर्वेद का मानना है कि नियमित तेल मालिश से त्वचा की कोशिकाएं मजबूत होती हैं, जबकि विज्ञान के अनुसार यह स्किन बैरियर को सुधारने में मदद करता है।
सरसों का तेल बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में भी सहायक है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। ये फ्री रेडिकल्स ही वो तत्व हैं जिनकी वजह से झुर्रियां और फाइन लाइन्स जल्दी दिखाई देने लगती हैं। आयुर्वेद में इसे त्वचा को जवान बनाए रखने वाला तेल माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह स्किन की इलास्टिसिटी को बनाए रखने में मदद करता है।
सर्दियों में खुजली, लालिमा और छोटे-मोटे स्किन इन्फेक्शन भी आम समस्या बन जाते हैं। सरसों का तेल प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण रखता है। नियमित रूप से हल्की मात्रा में लगाने से त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के पनपने की संभावना कम होती है।
इसके अलावा, सर्दियों में धूप के कारण त्वचा डल और काली पड़ सकती है। आयुर्वेद में मान्यता है कि सरसों का तेल रक्त संचार को बेहतर करता है। जब चेहरे या शरीर पर हल्की मालिश की जाती है, तो रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। विज्ञान भी मानता है कि बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से स्किन सेल्स को अधिक पोषण मिलता है।