क्या साइटिका के दर्द से परेशान हैं? धनुरासन से मिलेगी राहत?
सारांश
Key Takeaways
- धनुरासन साइटिका के दर्द में राहत देता है।
- इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
- पाचन समस्याओं में भी मददगार है।
- यह तनाव और थकान कम करता है।
- गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। साइटिका एक सामान्य लेकिन अत्यंत कष्टदायक समस्या है, जो पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर कूल्हे, जांघ और पैरों में तीव्र दर्द फैलाती है। यह शरीर की सबसे बड़ी नस, जिसे साइटिक नर्व कहा जाता है, के दबने या सूजन आने के कारण होती है। अच्छी बात यह है कि योगासन के माध्यम से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
साइटिका के लक्षणों में तेज़ दर्द, सुन्नपन, झुनझुनी और पैर में कमजोरी शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर, इसका कारण हर्नियेटेड डिस्क (स्लिप डिस्क) या हड्डियों में स्पर्स का बनना होता है। राहत की बात यह है कि आराम, फिजियोथेरेपी, और योगाभ्यास के द्वारा इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, धनुरासन या बो पोज का नियमित अभ्यास साइटिका में मददगार होता है। मंत्रालय के अनुसार, धनुरासन केवल एक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह कई शारीरिक समस्याओं का प्रभावी समाधान है। यह आसन विशेष रूप से पीठ दर्द, साइटिका और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं में राहत प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से साइटिक नर्व पर दबाव कम होता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और दर्द में राहत मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धनुरासन पाचन संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, अपच और गैस में भी लाभकारी है, क्योंकि यह पेट की मांसपेशियों पर दबाव डालकर अंगों को उत्तेजित करता है। धनुरासन के अन्य लाभ भी बहुत हैं। यह पीठ, कंधे और छाती की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जिससे पोस्चर में सुधार होता है और कमर दर्द से राहत मिलती है। यह पेट की मांसपेशियों को टोन करता है, जिससे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है। यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, सांस संबंधी समस्याओं जैसे अस्थमा में राहत देता है। यह तनाव और थकान को कम करके ऊर्जा स्तर को बढ़ाता है।
यह महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता और दर्द को भी कम करने में सहायक है। कुल मिलाकर, यह पूरे शरीर की लचीलापन बढ़ाता है और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करता है।
धनुरासन करने के लिए, पेट के बल लेटें, पैरों की एड़ियों को हाथों से पकड़ें और छाती व जांघों को ऊपर उठाएं, शरीर को धनुष के रूप में मोड़ें। शुरुआत में 10-20 सेकंड तक रखें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप या गंभीर पीठ की समस्याओं से ग्रस्त व्यक्तियों को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही अभ्यास करना चाहिए।