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गर्मियों में शिकंजी पिएं, पाचन सुधारें और शरीर को रखें एनर्जी से भरपूर — जानें देसी नुस्खा

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गर्मियों में शिकंजी पिएं, पाचन सुधारें और शरीर को रखें एनर्जी से भरपूर — जानें देसी नुस्खा

सारांश

गर्मियों में शिकंजी शरीर को हाइड्रेट रखती है, पाचन सुधारती है और तुरंत ऊर्जा देती है। नींबू, जीरा, काला नमक और अदरक से बना यह देसी पेय इम्युनिटी बढ़ाता है, वजन घटाने में मदद करता है और लू से बचाता है। बाजारी कोल्ड ड्रिंक से कहीं बेहतर यह घरेलू नुस्खा सेहत का सच्चा साथी है।

मुख्य बातें

शिकंजी नींबू, काला नमक, जीरा पाउडर, चीनी और ठंडे पानी से बनाई जाती है और उत्तर भारत में गर्मियों का सबसे लोकप्रिय देसी पेय है।
इसमें मौजूद विटामिन C इम्युनिटी बढ़ाता है और काला नमक शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखता है।
जीरा और अदरक पाचन सुधारते हैं, गैस और एसिडिटी दूर करते हैं और मेटाबॉलिज्म तेज करते हैं।
घर पर बनी शिकंजी ₹5 से भी कम में तैयार होती है, जबकि बाजारी कोल्ड ड्रिंक ₹40-₹60 में मिलती है।
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार शिकंजी एक पित्त शांत करने वाला प्राकृतिक पेय है जिसका उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी मिलता है।
दिन में एक से दो गिलास शिकंजी पीना पर्याप्त है; डायबिटीज रोगी चीनी की जगह स्टीविया का उपयोग कर सकते हैं।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जैसे-जैसे गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंच रहा है, देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है। ऐसे में शरीर में डिहाइड्रेशन, थकान और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। इन सभी परेशानियों का एक सरल, सस्ता और स्वादिष्ट देसी समाधान है — शिकंजी, जो सदियों से उत्तर भारत में गर्मियों का सबसे भरोसेमंद पेय रही है।

क्या है शिकंजी और क्यों है यह खास?

शिकंजी एक पारंपरिक भारतीय पेय है जो नींबू, काला नमक, जीरा पाउडर, चीनी और ठंडे पानी से बनाई जाती है। कई घरों में इसमें अदरक का रस और पुदीने की पत्तियां भी मिलाई जाती हैं, जो इसे और अधिक गुणकारी बनाती हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में गर्मियों में सड़क किनारे मिट्टी के घड़ों में रखी ठंडी शिकंजी की दुकानें आम दृश्य हैं।

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, यह पेय न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को भी बनाए रखता है — जो गर्मियों में सबसे जरूरी है। बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद कोल्ड ड्रिंक्स की तुलना में घर पर बनी शिकंजी कहीं अधिक पौष्टिक और प्राकृतिक विकल्प है।

घर पर शिकंजी बनाने की आसान विधि

शिकंजी बनाना बेहद सरल है। दो गिलास ठंडे पानी में एक से दो नींबू का रस निचोड़ें। इसमें स्वादानुसार काला नमक, एक चुटकी जीरा पाउडर और थोड़ी सी चीनी या शहद मिलाएं। चाहें तो बारीक कटी पुदीने की पत्तियां और आधा चम्मच अदरक का रस भी डालें। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं और बर्फ के साथ सर्व करें। डायबिटीज रोगी चीनी की जगह स्टीविया का उपयोग कर सकते हैं।

शिकंजी के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

बेहतर पाचन: नींबू में मौजूद विटामिन C और फाइबर पाचन तंत्र को सक्रिय करते हैं। जीरा और अदरक पेट की गैस, एसिडिटी और भारीपन को दूर करने में सहायक हैं। नियमित सेवन से आंतों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

तुरंत ऊर्जा: गर्मी में पसीने के जरिए शरीर से सोडियम और पोटैशियम जैसे खनिज बाहर निकल जाते हैं। शिकंजी इन खनिजों की कमी को पूरा करती है और थकान को तेजी से दूर करती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता: नींबू विटामिन C का प्राकृतिक स्रोत है, जो शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करता है। गर्मियों में होने वाले वायरल संक्रमण और लू से बचाव में यह अत्यंत उपयोगी है।

शरीर को ठंडक: शिकंजी शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित रखती है। काला नमक इलेक्ट्रोलाइट की भरपाई करता है, जिससे लू लगने का खतरा कम होता है।

त्वचा और जोड़ों के लिए लाभकारी: नियमित रूप से शिकंजी पीने से त्वचा में निखार आता है और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को युवा बनाए रखते हैं।

वजन नियंत्रण: नींबू में पाया जाने वाला पेक्टिन फाइबर भूख को नियंत्रित करता है। जीरा और अदरक मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं, जिससे कैलोरी बर्निंग बढ़ती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों की राय और ऐतिहासिक संदर्भ

आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि शिकंजी जैसे प्राकृतिक पेय का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी मिलता है, जहां इसे पित्त शांत करने वाला पेय बताया गया है। मुगल काल में भी नींबू-पानी आधारित पेय राजदरबारों में लोकप्रिय था। आधुनिक पोषण विज्ञान भी इसके गुणों की पुष्टि करता है।

यह उल्लेखनीय है कि जहां बाजार में एक कैन कोल्ड ड्रिंक की कीमत ₹40 से ₹60 तक होती है, वहीं घर पर बनी शिकंजी ₹5 से भी कम में तैयार हो जाती है — और स्वास्थ्य लाभ के मामले में यह कहीं बेहतर है।

इस गर्मी के मौसम में शिकंजी को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में एक से दो गिलास शिकंजी पीना पर्याप्त है। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे तापमान और बढ़ेगा, यह देसी पेय आपके स्वास्थ्य का सबसे विश्वसनीय साथी साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब यह सोचने वाली बात है कि हमारी दादी-नानी की शिकंजी उन सभी पेयों से कहीं बेहतर थी — और आज भी है। बड़ी कंपनियां कृत्रिम स्वाद और रंग वाले पेय बेचकर अरबों कमा रही हैं, जबकि ₹5 की शिकंजी वही सब देती है जो ₹60 की कैन नहीं दे सकती। यह खबर सिर्फ एक पेय की नहीं, बल्कि उस भारतीय पारंपरिक ज्ञान की है जिसे हम आधुनिकता की आंधी में भूलते जा रहे हैं। राष्ट्र की असली ताकत उसकी जड़ों में है — और शिकंजी उसी का प्रतीक है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिकंजी पीने के क्या-क्या फायदे होते हैं?
शिकंजी पीने से पाचन बेहतर होता है, शरीर हाइड्रेट रहता है और तुरंत ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन C इम्युनिटी बढ़ाता है और काला नमक इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता है।
घर पर शिकंजी कैसे बनाएं?
दो गिलास ठंडे पानी में एक-दो नींबू निचोड़ें, काला नमक, जीरा पाउडर और स्वादानुसार चीनी मिलाएं। चाहें तो पुदीना और अदरक का रस भी डालें और अच्छी तरह मिलाकर सर्व करें।
क्या शिकंजी वजन घटाने में मदद करती है?
हां, शिकंजी में मौजूद पेक्टिन फाइबर भूख नियंत्रित करता है और जीरा-अदरक मेटाबॉलिज्म तेज करते हैं। इससे कैलोरी बर्निंग बढ़ती है और वजन नियंत्रण में सहायता मिलती है।
गर्मियों में शिकंजी कितनी बार पीनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दिन में एक से दो गिलास शिकंजी पीना पर्याप्त और लाभकारी है। अधिक मात्रा में लेने से एसिडिटी हो सकती है, इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन करें।
क्या डायबिटीज के मरीज शिकंजी पी सकते हैं?
हां, डायबिटीज के मरीज चीनी की जगह स्टीविया या बिना चीनी के शिकंजी बना सकते हैं। नींबू, काला नमक और जीरा पाउडर से बनी बिना मीठी शिकंजी उनके लिए सुरक्षित और फायदेमंद है।
राष्ट्र प्रेस
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