सितोपलादि चूर्ण: खांसी-जुकाम से राहत और इम्युनिटी को बढ़ाने वाला प्राचीन आयुर्वेदिक उपाय
सारांश
Key Takeaways
- सितोपलादि चूर्ण खांसी और जुकाम से राहत देता है।
- यह इम्युनिटी को बढ़ाता है।
- इसका सेवन शहद या घी के साथ करें।
- बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित।
- चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।
नई दिल्ली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण सांस संबंधी समस्याएं, जैसे कि खांसी और जुकाम, आम हो गई हैं। ऐसे में आयुर्वेदाचार्य सितोपलादि चूर्ण के सेवन की सलाह देते हैं। यह प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि न केवल फेफड़ों को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि खांसी और जुकाम से त्वरित राहत भी देती है, साथ ही शरीर की इम्युनिटी को भी बढ़ाती है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, सितोपलादि चूर्ण श्वसन स्वास्थ्य, पाचन और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए एक विश्वसनीय आयुर्वेदिक उपाय है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और पाचन को बेहतर करने में सहायक है। इसके नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों से बचना आसान हो जाता है। सितोपलादि चूर्ण मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को सशक्त बनाने में मदद करता है। यह खांसी, जुकाम, सर्दी-खांसी और गले की खराश जैसी सामान्य परेशानियों से जल्दी राहत देता है। इसे आमतौर पर शहद या घी के साथ मिलाकर लिया जाता है, जिससे इसके प्रभाव में वृद्धि होती है।
एनआईए के अनुसार, इसके नियमित सेवन से फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस लेना सरल हो जाता है। इस चूर्ण की एक विशेषता यह है कि यह शरीर की प्राकृतिक इम्यूनिटी को बढ़ाता है। मौसम परिवर्तन के दौरान होने वाली बीमारियों से सुरक्षा में यह अत्यंत प्रभावी है। इसके साथ ही, इसमें सूजन कम करने वाले गुण भी होते हैं, जिससे हल्की सूजन और जलन में आराम मिलता है। पाचन तंत्र के लिए भी सितोपलादि चूर्ण लाभकारी सिद्ध होता है। यह भूख बढ़ाता है, पाचन को सुधारता है और अपच, गैस या पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत प्रदान करता है।
आयुर्वेद में सितोपलादी को एक ऐसा फॉर्मूला माना जाता है जो श्वसन और पाचन दोनों को संतुलित रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सितोपलादि चूर्ण पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें कोई रासायनिक तत्व नहीं होते। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सुरक्षित है, लेकिन इसका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए। खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।