9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नोएडा में स्वाइन फ्लू और डेंगू का कहर: स्कूलों ने जारी की सख्त एडवाइजरी, बीमार बच्चों को घर पर रखने की अपील

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नोएडा में स्वाइन फ्लू और डेंगू का कहर: स्कूलों ने जारी की सख्त एडवाइजरी, बीमार बच्चों को घर पर रखने की अपील

सारांश

गौतमबुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू और डेंगू के मामले बढ़ते देख नोएडा के स्कूलों ने अभिभावकों को एडवाइजरी जारी की है। बुखार, खांसी या फ्लू के लक्षण दिखने पर बच्चों को घर पर रखने और परिसर में मच्छर-रोकथाम के उपाय तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य बातें

गौतमबुद्ध नगर के स्कूलों ने 25 अगस्त 2026 को स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र अभिभावकों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की।
सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार या फ्लू के लक्षण दिखने पर बच्चों को स्कूल न भेजने की सख्त हिदायत दी गई है।
स्कूल परिसरों में नियमित सफाई , हाथ धोने की आदत और पानी जमा न होने देने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
लगातार बुखार, अत्यधिक कमज़ोरी या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
स्कूल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग, स्कूल और अभिभावकों के बीच समन्वय को संक्रमण नियंत्रण की कुंजी बताया है।

गौतमबुद्ध नगर के स्कूलों ने 25 अगस्त 2026 को स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र अभिभावकों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सर्दी, खांसी, बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर बच्चों को स्कूल न भेजने की स्पष्ट हिदायत दी गई है। मौसम में लगातार बदलाव के बीच जिले में वायरल संक्रमण के मामले बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिसके चलते स्कूल प्रबंधन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को भेजी गई एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि किसी बच्चे में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार या फ्लू जैसे लक्षण नज़र आएं तो उसे घर पर ही आराम कराया जाए। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बीमार बच्चे को स्कूल भेजने से न केवल उसकी तबीयत और बिगड़ सकती है, बल्कि कक्षा में बैठे अन्य बच्चों में भी संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ जाता है।

अभिभावकों से यह भी कहा गया है कि लगातार बुखार, अत्यधिक कमज़ोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें और लापरवाही न बरतें। साथ ही, बच्चे की बीमारी की जानकारी स्कूल को भी देने की अपील की गई है।

स्कूल परिसरों में स्वच्छता अभियान

कई स्कूलों में बच्चों को नियमित हाथ धोने, व्यक्तिगत स्वच्छता और बिना ज़रूरत आंख, नाक व मुंह न छूने के बारे में जागरूक किया जा रहा है। स्कूल परिसरों में सफाई व्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

डेंगू के खतरे को देखते हुए स्कूलों में मच्छर-रोकथाम के उपायों पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। कूलर, गमले, छत और अन्य स्थानों पर पानी जमा न होने देने के लिए नियमित जांच की जा रही है, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण बनता है।

आम जनता और अभिभावकों पर असर

गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर में मौसमी बदलाव के साथ वायरल बुखार और संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। खासकर छोटे बच्चों में इन बीमारियों का असर अधिक देखा जा रहा है, जिससे अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद का मौसम आमतौर पर डेंगू और वायरल फ्लू के मामलों में उछाल लाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान और उसके बाद स्वाइन फ्लू (H1N1) और डेंगू दोनों का प्रसार तेज़ हो जाता है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए संक्रमण फैलने की आशंका भी अधिक रहती है। स्कूल प्रबंधन का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग, स्कूल और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या होगा आगे

स्कूलों ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की नियमित उपस्थिति ज़रूरी है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता करके उन्हें स्कूल भेजना उचित नहीं। आने वाले हफ्तों में यदि मामले और बढ़े तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की सलाह पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या केवल अभिभावकों को सतर्क करना पर्याप्त है — जब तक जिला स्वास्थ्य विभाग स्कूलों में नियमित निगरानी और त्वरित परीक्षण की व्यवस्था नहीं करता, तब तक ये दिशानिर्देश कागज़ी ही रहेंगे। मानसून के बाद हर साल डेंगू और वायरल फ्लू की यही कहानी दोहराई जाती है, फिर भी ठोस बुनियादी ढाँचा — जैसे स्कूल-स्तरीय स्वास्थ्य जांच शिविर — अब तक नदारद है। जवाबदेही के बिना सिर्फ एडवाइजरी जारी करना उस चक्र को नहीं तोड़ेगा।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा के स्कूलों ने स्वाइन फ्लू और डेंगू को लेकर क्या एडवाइजरी जारी की है?
गौतमबुद्ध नगर के स्कूलों ने अभिभावकों को निर्देश दिए हैं कि सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर बच्चों को स्कूल न भेजें और घर पर आराम कराएं। गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।
बच्चों में स्वाइन फ्लू और डेंगू के कौन-से लक्षण देखने चाहिए?
स्कूल एडवाइजरी के अनुसार, सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार और फ्लू जैसे लक्षण प्रारंभिक संकेत हैं। लगातार बुखार, अत्यधिक कमज़ोरी और सांस लेने में परेशानी को गंभीर लक्षण माना गया है, जिनमें तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डेंगू से बचाव के लिए स्कूल क्या कदम उठा रहे हैं?
स्कूल परिसरों में कूलर, गमले, छत और अन्य स्थानों पर पानी जमा न होने देने के लिए नियमित जांच की जा रही है, क्योंकि रुका पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बनता है। इसके अलावा परिसर में सफाई व्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
क्या बीमार बच्चे की अनुपस्थिति को स्कूल माफ करेगा?
स्कूल प्रबंधन ने स्वयं कहा है कि स्वास्थ्य से समझौता करके बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं है। अभिभावकों से अपील की गई है कि बीमारी की स्थिति में स्कूल को सूचित करें, जिससे समन्वय बना रहे।
गौतमबुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू और डेंगू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
मौसम में लगातार बदलाव और मानसून के दौरान जमा पानी के कारण गौतमबुद्ध नगर में वायरल संक्रमण और डेंगू के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। मानसून के बाद का मौसम आमतौर पर H1N1 और डेंगू दोनों के प्रसार के लिए अनुकूल माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले