गौतमबुद्ध नगर में डेंगू का बढ़ता खतरा: 15 हाईराइज सोसाइटियों को नोटिस, अस्पतालों में 30-40% मरीज वायरल बुखार से पीड़ित
सारांश
मुख्य बातें
मानसून के मौसम में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में डेंगू का खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है — और यह खतरा अब केवल घनी आबादी वाले इलाकों तक सीमित नहीं, बल्कि हाईराइज आवासीय सोसाइटियाँ भी इसकी चपेट में आ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 20 अगस्त 2026 तक मच्छरों के लार्वा और जलभराव मिलने पर 15 हाईराइज सोसाइटियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। स्थानीय अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में से 30 से 40 प्रतिशत वायरल बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बारिश के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों के बेसमेंट, पार्किंग, निर्माणाधीन हिस्सों, छतों, गमलों, कूलर और पानी की टंकियों में जलभराव तथा मच्छरों के लार्वा पाए गए। इन स्थलों की पहचान के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सोसायटी प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों को नोटिस जारी किए। यह पहली बार नहीं है — अक्टूबर 2025 में भी नोएडा में चार सोसाइटियों को लार्वा और जलभराव मिलने पर नोटिस दिए गए थे।
इससे पहले जुलाई 2026 में विभाग ने बरौला, सूरजपुर, कासना और सेक्टर-50 समेत कई इलाकों में डेंगू के मामले और मच्छरों के प्रजनन स्थल मिलने के बाद अभियान तेज किया था। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तर प्रदेश में मानसून के कारण वेक्टर-जनित बीमारियों का दबाव बढ़ा हुआ है।
हाईराइज सोसाइटियाँ क्यों बनीं चिंता का केंद्र
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एडीज एजिप्टी मच्छर — जो डेंगू फैलाने के लिए जिम्मेदार है — साफ और ठहरे हुए पानी में भी पनप सकता है। गमले की ट्रे, कूलर, बाल्टी, पानी की टंकी, टायर और निर्माण सामग्री में जमा थोड़ा-सा पानी भी इसके प्रजनन के लिए पर्याप्त है। हाईराइज सोसाइटियों में बड़ी संख्या में परिवारों के रहने के कारण यदि एक बार मच्छरों का प्रजनन शुरू हो जाए, तो संक्रमण का खतरा तेज़ी से फैल सकता है।
गौरतलब है कि यह मानना गलत है कि डेंगू केवल गंदे नालों या खुले गंदे पानी से फैलता है — यह भ्रांति ही हाईराइज सोसाइटियों में लापरवाही का कारण बनती है।
अस्पतालों पर बढ़ता बोझ
बरसात के मौसम में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, शरीर में दर्द और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। स्थानीय स्वास्थ्य क्षेत्र के आँकड़ों के अनुसार, अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 30 से 40 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती डेंगू और सामान्य वायरल बुखार के लक्षणों में अंतर कर समय पर जाँच कराने की है, क्योंकि दोनों के शुरुआती लक्षण — तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमज़ोरी और उल्टी — लगभग एक जैसे होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें, गमलों और उनकी ट्रे को साफ रखें, तथा छतों और बालकनी में जलभराव न होने दें। सोसायटी प्रबंधन और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) को बेसमेंट व कॉमन एरिया की नियमित सफाई और मच्छररोधी दवा के छिड़काव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार बुखार रहने पर स्व-चिकित्सा से बचकर चिकित्सक से जाँच और परामर्श लेना आवश्यक बताया गया है।
आगे क्या
स्वास्थ्य विभाग ने निरीक्षण अभियान को और तेज करने के संकेत दिए हैं। नोटिस मिलने के बावजूद यदि सोसाइटियाँ सुधारात्मक कदम नहीं उठातीं, तो आगे कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मानसून के अगले कुछ हफ्तों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों पर विशेष नज़र रखी जाएगी।