क्या तिर्यक भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है?

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क्या तिर्यक भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि तिर्यक भुजंगासन न केवल रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी सुधारता है? इस लेख में जानें इस आसन के कई अनगिनत लाभ और इसे करने की विधि।

Key Takeaways

  • रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
  • पाचन तंत्र को सुधारता है।
  • पीठ दर्द में राहत देता है।
  • महिलाओं के लिए विशेष लाभकारी है।
  • तनाव को कम करता है।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज के तेज़ रफ्तार जीवन और अस्वस्थ खानपान से शरीर तेजी से बीमारियों का शिकार हो जाता है। ऐसे में तिर्यक भुजंगासन का नियमित अभ्यास कई तरह के लाभ प्रदान करता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है, पीठ दर्द को कम करता है और पाचन तंत्र को सुधारता है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, भुजंगासन के एक प्रकार का नाम तिर्यक भुजंगासन है। इसके अभ्यास से कब्ज की समस्या में कमी आती है, और लीवर तथा किडनी सक्रिय रहते हैं। सरल और प्रभावी आसन का रोजाना अभ्यास स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

तिर्यक भुजंगासन में ट्विस्टिंग की मुद्रा जोड़ी जाती है। 'तिर्यक' का अर्थ है तिरछा या घुमावदार, जबकि 'भुजंगासन' को कोबरा पोज के रूप में जाना जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाते हुए पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय करता है।

इस आसन को करने की विधि सरल है। पहले, पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों पैरों को सीधा रखें और एड़ियों को आपस में मिला लें। हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस भरते हुए ऊपरी शरीर को ऊपर उठाएं, जैसे भुजंगासन करते हैं। अब सिर और धड़ को दाईं ओर घुमाएं और बाएं पैर की एड़ी को देखने की कोशिश करें। कुछ सेकंड रुकें, फिर सामान्य स्थिति में वापस आएं। इसी प्रक्रिया को बाईं ओर दोहराएं। यह एक चक्र पूरा होगा। शुरुआत में 3-5 चक्र करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं।

इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली होती है, जिससे पीठ दर्द और पोषण संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, क्योंकि ट्विस्टिंग से आंतों पर दबाव पड़ता है और कब्ज जैसी समस्या दूर होती है। पेट के अंग जैसे लीवर, किडनी और आंतें सक्रिय होकर बेहतर कार्य करती हैं। फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, सांस की प्रक्रिया सुचारू होती है, और छाती चौड़ी होती है।

महिलाओं के लिए, यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है, क्योंकि यह पीरियड्स संबंधी अनियमितताओं और स्त्री रोगों में राहत प्रदान करता है। यह नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखता है और तनाव को कम करता है। कंधे, बाहें और जांघें लचीली बनती हैं, और कमर की चर्बी घटाने में मदद मिलती है। यह आसन कुंडलिनी जागरण और शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, तिर्यक भुजंगासन को दैनिक रूटीन में शामिल करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत होते हैं। हालांकि, कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। गर्भवती महिलाएं, कमर या गर्दन में गंभीर चोट वाले व्यक्ति, और हर्निया या अल्सर के मरीज इस आसन से बचें। हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग भी सलाह लेकर तिर्यक भुजंगासन करें। आसन को हमेशा खाली पेट और योग विशेषज्ञ की देखरेख में करें।

Point of View

मैं यह मानता हूँ कि तिर्यक भुजंगासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। यह आसन योग के माध्यम से सम्पूर्ण स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

तिर्यक भुजंगासन करने का सही समय क्या है?
तिर्यक भुजंगासन को सुबह के समय खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है।
क्या तिर्यक भुजंगासन गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित है?
गर्भवती महिलाओं को तिर्यक भुजंगासन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
तिर्यक भुजंगासन में कौन-कौन से लाभ होते हैं?
यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है, पाचन तंत्र को सुधारता है और तनाव को कम करता है।
क्या तिर्यक भुजंगासन करने में कोई सावधानी बरतनी चाहिए?
कमर या गर्दन में गंभीर चोट वाले लोगों को इस आसन से बचना चाहिए।
कितने चक्र तिर्यक भुजंगासन के करें?
शुरुआत में 3-5 चक्र करना उचित होता है, बाद में बढ़ाया जा सकता है।
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