यूपी एनएचएम की सलाह: समोसा-चिप्स छोड़ें, भुने चने-फल अपनाएं — जानें सही स्नैक चुनने का तरीका
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने 9 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर लोगों से रोज़मर्रा के नाश्ते में बेहतर विकल्प चुनने की अपील की है। एनएचएम के अनुसार, समोसा, चिप्स, नमकीन, मिठाई और पेस्ट्री जैसे प्रचलित स्नैक्स की जगह फल, भुने चने, ड्राई फ्रूट्स और सलाद को प्राथमिकता देने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम कम होते हैं।
तले-भुने स्नैक्स से क्या नुकसान
एनएचएम के मुताबिक, समोसा, चिप्स और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में तेल और नमक की मात्रा अधिक होती है। तलने की प्रक्रिया में इनमें भारी मात्रा में तेल अवशोषित हो जाता है, जिससे थोड़ी मात्रा में सेवन पर भी शरीर को अतिरिक्त कैलोरी मिलती है। इससे धीरे-धीरे वज़न बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा, अधिक नमक के सेवन से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ती है, जो ब्लड प्रेशर पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक उच्च रक्तचाप बने रहने से हृदय और किडनी पर भी दबाव बढ़ता है। एनएचएम ने स्पष्ट किया कि इन चीज़ों को पूरी तरह छोड़ने की ज़रूरत नहीं, बल्कि इन्हें कभी-कभार और सीमित मात्रा में लेना उचित है।
मिठाई और पेस्ट्री पर विशेषज्ञों की राय
मिठाई और पेस्ट्री में चीनी के साथ-साथ तेल या मक्खन की मात्रा भी अधिक होती है। अत्यधिक चीनी के सेवन से शरीर को ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी मिलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सलाह देता है। एनएचएम ने रेखांकित किया कि मिठाई को रोज़ाना के नाश्ते का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए, हालांकि इसे पूरी तरह वर्जित नहीं माना गया है।
स्वस्थ विकल्प: क्या खाएं
एनएचएम ने ताज़े फलों को सबसे अच्छा विकल्प बताया है। सेब, अमरूद, संतरा, पपीता और केला जैसे फलों में फाइबर, विटामिन और अन्य ज़रूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। फाइबर पेट को देर तक भरा रखने में मदद करता है और नियमित फल-सब्जी सेवन से हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।
भुने चने को भी एक आदर्श स्नैक बताया गया है। इनमें प्रोटीन और फाइबर दोनों अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों के लिए ज़रूरी हैं और बार-बार भूख लगने की इच्छा को कम करते हैं। ड्राई फ्रूट्स — विशेषकर बादाम, अखरोट और काजू — में वसा, प्रोटीन और फाइबर का संतुलन होता है। अखरोट और बादाम को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है, हालांकि इनमें कैलोरी अधिक होने के कारण इन्हें सीमित मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है।
फ्रेश सलाद में खीरा, टमाटर, गाजर और अन्य कच्ची सब्जियाँ शामिल की जा सकती हैं। इनमें पानी, फाइबर, विटामिन और पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है, जबकि कैलोरी तुलनात्मक रूप से कम होती है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। एनएचएम की यह पहल उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी को जागरूक करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। गौरतलब है कि छोटे-छोटे आहार परिवर्तन भी दीर्घकाल में स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
क्या होगा आगे
एनएचएम की सोशल मीडिया जागरूकता अभियान की यह कड़ी स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इन सुझावों को दैनिक जीवन में अपनाने से पहले व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पोषण विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित रहेगा।