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वृश्चिकासन: शरीर को बिच्छू जैसी मुद्रा देने वाला उन्नत योगासन, जानें 5 बड़े फायदे

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वृश्चिकासन: शरीर को बिच्छू जैसी मुद्रा देने वाला उन्नत योगासन, जानें 5 बड़े फायदे

सारांश

वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है जिसमें शरीर बिच्छू की मुद्रा धारण करता है। आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त इस आसन से मस्तिष्क में रक्त संचार, एकाग्रता, हृदय स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार होता है। शुरुआती अभ्यासी इसे प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।

मुख्य बातें

वृश्चिकासन संस्कृत के शब्द 'वृश्चिक' (बिच्छू) और 'आसन' (मुद्रा) से बना है, जिसमें शरीर बिच्छू की मुद्रा धारण करता है।
आयुष मंत्रालय ने इसे उन्नत स्तर का योगासन माना है जो शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का संयोजन प्रदान करता है।
इस आसन से मस्तिष्क में रक्त संचार सुधरता है, जिससे स्मरण शक्ति और एकाग्रता बेहतर होती है।
शुरुआती अभ्यास में 10 से 20 सेकंड तक मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
उच्च रक्तचाप, रीढ़ की चोट और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
इस आसन का अभ्यास पिंचा मयूरासन में दक्षता प्राप्त करने के बाद ही प्रशिक्षक की देखरेख में करें।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में वृश्चिकासन एक ऐसा उन्नत योगासन बनकर उभरा है जो शरीर की शक्ति, लचीलापन और मानसिक एकाग्रता तीनों को एक साथ साधता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे उन्नत स्तर का योगाभ्यास घोषित किया है, जिसका नियमित अभ्यास करने वालों को असाधारण शारीरिक और मानसिक लाभ मिलता है। यह आसन बिच्छू के डंक उठाने की मुद्रा की नकल करता है, इसीलिए इसे वृश्चिकासन कहा जाता है।

वृश्चिकासन का अर्थ और महत्व

वृश्चिकासन संस्कृत के दो शब्दों — 'वृश्चिक' (बिच्छू) और 'आसन' (मुद्रा) — से मिलकर बना है। इस आसन में साधक का शरीर ठीक उसी प्रकार दिखता है जैसे एक बिच्छू अपनी पूंछ को सिर के ऊपर उठाकर डंक मारने की स्थिति में होता है। यह आसन केवल शारीरिक कसरत नहीं, बल्कि शरीर और मन के समन्वय की उच्चतम अभिव्यक्ति है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में योग की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है, लेकिन 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बाद से वृश्चिकासन जैसे उन्नत आसनों के प्रति युवाओं की रुचि उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। आयुष मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में भारत में योगाभ्यासियों की संख्या में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

वृश्चिकासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

इस आसन को सही विधि से करने पर मस्तिष्क में रक्त संचार में उल्लेखनीय सुधार होता है। इससे स्मरण शक्ति तेज होती है और एकाग्रता का स्तर बढ़ता है। विद्यार्थियों और मानसिक श्रम करने वाले पेशेवरों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है।

इनवर्टेड पोजिशन में होने के कारण यह आसन हृदय के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। इस मुद्रा में रक्त प्रवाह संतुलित होता है और हृदय की कार्यक्षमता बेहतर होती है। साथ ही, नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता में कमी आती है तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

रीढ़ की हड्डी और कंधों की मांसपेशियों को यह आसन गहराई से खींचता है, जिससे पीठ दर्द और कंधे की अकड़न में राहत मिलती है। शरीर का संतुलन और समन्वय क्षमता भी इस आसन के नियमित अभ्यास से काफी सुधरती है।

वृश्चिकासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास शुरू करने से पहले पिंचा मयूरासन में दक्षता अनिवार्य है। सबसे पहले मयूरासन की स्थिति में आएं। दोनों कोहनियों को कंधों के ठीक नीचे रखें और हथेलियों से जमीन को मजबूती से पकड़ें।

अब शरीर को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा करें। इसके बाद रीढ़ को पीछे की ओर मोड़ते हुए पैरों को सिर की दिशा में लाएं, ताकि पैरों की उँगलियाँ सिर को छूने का प्रयास करें। इस पूरी प्रक्रिया में गहरी और लयबद्ध साँस लेते रहें।

शुरुआत में 10 से 20 सेकंड तक इस मुद्रा में रुकें। धीरे-धीरे अभ्यास के साथ समय बढ़ाएं। आसन समाप्त करने के बाद शवासन या बालासन में विश्राम अवश्य करें।

सावधानियाँ और किसे बचना चाहिए

वृश्चिकासन एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण आसन है, इसलिए शुरुआती अभ्यासियों को इसे किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए। बिना उचित मार्गदर्शन के इसका अभ्यास चोट का कारण बन सकता है।

उच्च रक्तचाप, रीढ़ की हड्डी में चोट, हृदय संबंधी रोग, या गर्दन की समस्या से पीड़ित लोगों को इस आसन से पूरी तरह बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी यह आसन नहीं करना चाहिए।

योग विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इस आसन का अभ्यास खाली पेट और सुबह के समय करना सर्वाधिक लाभकारी होता है। जैसे-जैसे भारत में योग का वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है, वृश्चिकासन जैसे उन्नत आसनों की माँग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ रही है — यह भारत की सॉफ्ट पावर का एक सशक्त प्रतीक बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस बड़े बदलाव का संकेत है जहाँ भारत का युवा पश्चिमी जिम संस्कृति से वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। आयुष मंत्रालय का इस आसन को मान्यता देना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जो योग को भारत की वैश्विक पहचान बनाना चाहती है। हालाँकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले योग वीडियो देखकर बिना प्रशिक्षण के उन्नत आसन करने की प्रवृत्ति चोटों में वृद्धि कर रही है — यह विरोधाभास नीति-निर्माताओं की नजर से अभी भी ओझल है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृश्चिकासन क्या है और इसे क्यों किया जाता है?
वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है जिसमें शरीर की मुद्रा डंक उठाए हुए बिच्छू जैसी बनती है। यह आसन शारीरिक शक्ति, लचीलापन, मानसिक एकाग्रता और हृदय स्वास्थ्य सुधारने के लिए किया जाता है।
वृश्चिकासन करने से क्या फायदे होते हैं?
इस आसन से मस्तिष्क में रक्त संचार बेहतर होता है, स्मरण शक्ति और फोकस बढ़ता है, तनाव कम होता है और हृदय की कार्यक्षमता सुधरती है। रीढ़ और कंधों की मांसपेशियाँ भी मजबूत होती हैं।
वृश्चिकासन करने से पहले कौन सा आसन सीखना जरूरी है?
वृश्चिकासन करने से पहले पिंचा मयूरासन में दक्षता होना अनिवार्य है। बिना इस आधार के वृश्चिकासन का प्रयास चोट का कारण बन सकता है।
किन लोगों को वृश्चिकासन नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप, रीढ़ की हड्डी में चोट, हृदय रोग, गर्दन की समस्या या गर्भावस्था की स्थिति में यह आसन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। शुरुआती लोग इसे हमेशा प्रशिक्षक की निगरानी में करें।
आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन के बारे में क्या कहा है?
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को उन्नत स्तर का योगासन घोषित किया है। मंत्रालय के अनुसार इसके नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का अद्भुत संयोजन प्राप्त होता है।
राष्ट्र प्रेस
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