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अफगान राजदूत का बड़ा आरोप: पाकिस्तान है क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए 'एकमात्र खतरा'

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अफगान राजदूत का बड़ा आरोप: पाकिस्तान है क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए 'एकमात्र खतरा'

सारांश

रूस में अफगान राजदूत गुल हसन हसन ने मास्को के बहुपक्षीय सुरक्षा मंच पर पाकिस्तान को 'एकमात्र खतरा' करार दिया — दाएश को पनाह, सीमा पार घुसपैठ और हवाई बमबारी के आरोपों के साथ। तालिबान प्रवक्ता ने भी इस्लामाबाद पर बातचीत बाधित करने का आरोप लगाया। अफगान-पाक तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

रूस में अफगानिस्तान के राजदूत गुल हसन हसन ने मास्को में CSTO, CIS और SCO के संयुक्त सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तान को क्षेत्रीय सुरक्षा का 'एकमात्र खतरा' बताया।
हसन ने पाकिस्तान पर आईएसआईएस (दाएश) समेत कई आतंकवादी संगठनों को पनाह देने, भर्ती और धन जुटाने में सहयोग का आरोप लगाया।
कथित तौर पर 23 जुलाई को बदख्शाँ प्रांत और 25 सितंबर को नूरिस्तान प्रांत में सीमा पार घुसपैठ की कोशिशें हुईं।
हसन के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य बलों ने इन अभियानों का नेतृत्व किया और अफगान प्रांतों में हवाई बमबारी भी की।
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स पर पोस्ट कर पाकिस्तान की 'नाकाम नीति' की आलोचना की और बातचीत बाधित करने का आरोप लगाया।

रूस में अफगानिस्तान के राजदूत गुल हसन हसन ने मास्को में आयोजित एक बहुपक्षीय सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे अफगानिस्तान और समूचे क्षेत्र की सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए 'एकमात्र खतरा' करार दिया। 17 अक्टूबर को सामने आई इस रिपोर्ट के अनुसार, हसन ने इस्लामाबाद पर आईएसआईएस (दाएश) समेत कई आतंकवादी संगठनों को पनाह देने और उनकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। अफगानिस्तानी मीडिया संस्थान टोलो न्यूज़ ने इस सम्मेलन की रिपोर्टिंग की।

सम्मेलन में क्या कहा राजदूत ने

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO), स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (CIS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संयुक्त सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए हसन ने कहा, 'हमें स्पष्ट रूप से कहना होगा कि अब हमारे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पाकिस्तान से पैदा हो रहा है। पाकिस्तान न केवल अफगान सरकार के सशस्त्र विरोधियों को शरण देता है, बल्कि उसने वहाँ मादक पदार्थों के कारोबार और दाएश की गतिविधियों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार किया है।'

हसन ने यह भी दावा किया कि ये आरोप निराधार नहीं हैं और पाकिस्तानी तथा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई खबरों को भी इस संदर्भ में गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने इन संगठनों को गतिविधियाँ चलाने, नए सदस्यों की भर्ती करने और धन जुटाने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध कराई हैं।

सीमा पार घुसपैठ के कथित प्रयास

हसन ने दावा किया कि 23 जुलाई को आतंकवादी संगठनों से जुड़े सैकड़ों सशस्त्र लड़ाकों को पाकिस्तान के चित्राल के रास्ते अफगानिस्तान के बदख्शाँ प्रांत के जेबक जिले में लाने की कोशिश की गई। इसी प्रकार की एक और कथित कोशिश 25 सितंबर को नूरिस्तान प्रांत के कमदेश जिले में की गई।

हसन के अनुसार, 'इन प्रयासों के दौरान पाकिस्तानी सैन्य बलों ने न केवल संबंधित समूहों का सीधे नेतृत्व किया, बल्कि दोनों मौकों पर अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में हवाई बमबारी भी की।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमा पार करने के रास्तों पर तैनात अफगान सीमा बलों की चौकियों को तोपों और भारी हथियारों से निशाना बनाया गया। ये आरोप कथित तौर पर लगाए गए हैं और पाकिस्तान की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तालिबान प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

इस बीच, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तानी अधिकारियों पर बातचीत की प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश का आरोप लगाया। मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी समाधान तलाशने के बजाय प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने इसे इस्लामाबाद की 'नाकाम नीति' बताया।

मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अपनी विफलताओं के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराने से पाकिस्तान की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक संकटों को गंभीर चिंता का विषय बताया।

व्यापक संदर्भ और क्षेत्रीय महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा तनाव और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के संबंध कभी सहज नहीं रहे, और यह पहली बार नहीं है कि काबुल ने इस्लामाबाद पर इस तरह के आरोप लगाए हों। SCO और CSTO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर इन आरोपों को उठाना काबुल की कूटनीतिक रणनीति में एक नए आयाम को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इन आरोपों का औपचारिक जवाब किस रूप में देता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

CIS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर लगाए गए हैं — यह महज द्विपक्षीय शिकायत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कूटनीतिक दबाव की रणनीति है। काबुल यह संदेश देना चाहता है कि पाकिस्तान का व्यवहार केवल अफगानिस्तान के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये आरोप तालिबान सरकार की ओर से आ रहे हैं, जिसकी अपनी वैधता और पारदर्शिता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नचिह्न हैं। इस्लामाबाद की चुप्पी और वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि यह कूटनीतिक आक्रामकता काबुल के लिए लाभदायक सिद्ध होती है या उल्टी पड़ती है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगान राजदूत गुल हसन हसन ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाए?
राजदूत गुल हसन हसन ने पाकिस्तान पर आईएसआईएस (दाएश) समेत कई आतंकवादी संगठनों को पनाह देने, उनकी भर्ती और धन जुटाने में सहयोग करने, तथा अफगान प्रांतों में हवाई बमबारी कराने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पाकिस्तान को अफगानिस्तान और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 'एकमात्र खतरा' बताया।
यह सम्मेलन कहाँ और किन संगठनों के बीच हुआ?
यह संयुक्त सुरक्षा सम्मेलन मास्को में आयोजित हुआ, जिसमें सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO), स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (CIS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शामिल थे। इसी मंच पर अफगान राजदूत ने पाकिस्तान के विरुद्ध ये आरोप सार्वजनिक किए।
कथित सीमा पार घुसपैठ की घटनाएँ कब और कहाँ हुईं?
राजदूत हसन के अनुसार, 23 जुलाई को पाकिस्तान के चित्राल के रास्ते अफगानिस्तान के बदख्शाँ प्रांत के जेबक जिले में सैकड़ों सशस्त्र लड़ाकों को भेजने की कोशिश हुई। इसी तरह की दूसरी कथित कोशिश 25 सितंबर को नूरिस्तान प्रांत के कमदेश जिले में की गई।
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर क्या कहा?
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स पर पोस्ट कर पाकिस्तानी अधिकारियों पर बातचीत की प्रक्रिया बाधित करने और प्रचार पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाया। उन्होंने पाकिस्तान की नीति को 'नाकाम' बताते हुए कहा कि अपनी विफलताओं के लिए अफगानिस्तान को दोष देने से इस्लामाबाद की समस्याएँ हल नहीं होंगी।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंध इस समय किस स्थिति में हैं?
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। सीमा पर झड़पें, आरोप-प्रत्यारोप और कूटनीतिक टकराव बार-बार सामने आते रहे हैं। बहुपक्षीय मंचों पर इस तरह के आरोप उठाना काबुल की नई कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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