अमेरिका में विदेशी नागरिकों को कानून का पालन करना अनिवार्य: हरमीत ढिल्लों
सारांश
Key Takeaways
- विदेशी आगंतुकों को अमेरिकी कानूनों का पालन करना अनिवार्य है।
- कानून का उल्लंघन करने पर, देश छोड़ने का जोखिम रहता है।
- अमेरिकी कॉलेज परिसरों में तनाव और विरोध प्रदर्शनों की गंभीरता बढ़ी है।
- अमेरिकी न्याय विभाग छात्रों के नागरिक अधिकारों की सुरक्षा करेगा।
- विदेशी छात्रों की उपस्थिति अर्थव्यवस्था और नवाचार में महत्वपूर्ण है।
वॉशिंगटन, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका में आने वाले विदेशी आगंतुकों, विशेषकर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को, अमेरिकी कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें देश छोड़ने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
हरमीत ढिल्लों ने द ब्रीफ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यदि आगंतुक कानून तोड़ते हैं या विश्वविद्यालय परिसरों में अव्यवस्था फैलाते हैं, तो अधिकारियों को सख्त कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा, “अमेरिका में आने वाले सभी आगंतुकों को विशेषकर कॉलेज परिसरों में कानून का पालन करना चाहिए, अन्यथा उन्हें देश छोड़ना होगा।”
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि न्याय विभाग छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या नफरत को बर्दाश्त नहीं करेगा और उनके नागरिक अधिकारों की सुरक्षा करेगा।
यह टिप्पणी अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में चल रहे तनाव के बीच आई है, जो 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हुए हमले और उसके बाद शुरू हुए मध्य-पूर्व संघर्ष के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हैं।
हरमीत ढिल्लों ने अमेरिकी परिसरों में हो रही अशांति का जिक्र करते हुए कहा कि कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज़्म) और उग्र विरोध प्रदर्शनों से संबंधित गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
उन्होंने कहा, “आज हमारे आइवी लीग संस्थानों में भी एंटीसेमिटिज़्म और 7 अक्टूबर 2023 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण काफी अशांति है।” जब आगंतुक कानून तोड़ते हैं, तो अधिकारियों को शून्य सहनशीलता की नीति अपनानी चाहिए।
हरमीत ने जोर दिया कि अमेरिका आने वाले विदेशी नागरिक मेहमान के रूप में आते हैं और उन्हें देश के कानूनी ढांचे का सम्मान करना चाहिए। “आप मेहमान हैं, आगंतुक हैं। आप यहाँ आकर घर के सोफे पर पैर फैलाकर यह नहीं सोच सकते कि आपका गर्मजोशी से स्वागत होगा।”
अमेरिका को, अन्य देशों की तरह, अपने कानून लागू करने और यह तय करने का अधिकार है कि कौन देश में रह सकता है। उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल उचित है कि हमारा देश, जैसे अन्य देश करते हैं, अपनी सीमाओं की निगरानी करे और कहे कि अगर आप हमारे कानूनों का पालन नहीं करेंगे, तो आपको यहाँ से जाना होगा।”
उन्होंने बताया कि कुछ देश अमेरिका से अधिक सख्ती से ऐसे नियम लागू करते हैं। “जब किसी को अपराध का दोषी ठहराया जाता है, तो वह यहाँ रहने का अधिकार खो देता है।”
उनकी टिप्पणियां अमेरिका में चल रही उस राजनीतिक बहस को उजागर करती हैं जिसमें कैंपस विरोध प्रदर्शन, आव्रजन कानूनों का पालन और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे विदेशी छात्रों की जिम्मेदारियां शामिल हैं।
अक्टूबर 2023 में इज़राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद कई अमेरिकी विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के बाद सांसदों और संघीय अधिकारियों ने यहूदी-विरोध के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की, जबकि कुछ लोगों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई।
अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बड़ी भूमिका है। अमेरिका के विश्वविद्यालयों में 10 लाख से अधिक विदेशी छात्र पढ़ते हैं। उनकी उपस्थिति अकादमिक शोध, नवाचार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है, जबकि वीज़ा नियमों के तहत उन्हें संघीय और विश्वविद्यालय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।