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शनचो-23 मिशन: चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर धान की दो पीढ़ियाँ उगाने का ऐतिहासिक प्रयोग जारी

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शनचो-23 मिशन: चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर धान की दो पीढ़ियाँ उगाने का ऐतिहासिक प्रयोग जारी

सारांश

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर शनचो-23 मिशन के तहत धान की दो पीढ़ियाँ उगाने का दुनिया का पहला प्रयोग आगे बढ़ा है। 2022 की एकल-पीढ़ी सफलता के बाद अब दो पूर्ण जीवन चक्र पूरे करने का लक्ष्य है — जो भविष्य की अंतरिक्ष कृषि की नींव रख सकता है।

मुख्य बातें

शनचो-23 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने 2 अगस्त तक धान के पहले बैच के नमूने तैयार कर सुरक्षित भंडारण पूरा किया।
यह प्रयोग पहली बार अंतरिक्ष में दो पूर्ण जीवन चक्र — बीज से बीज और फिर बीज — पूरे करने का लक्ष्य रखता है।
24 मई को प्रक्षेपित शनचो-23 यान से जापोनिका किस्म के धान के बीज अंतरिक्ष स्टेशन पहुँचाए गए थे।
वर्ष 2022 में 6 बीजों से 120 दिनों में 59 बीज प्राप्त हुए थे — यह दुनिया का पहला अंतरिक्ष में बीज-से-बीज चक्र था।
तने, पत्तियाँ और बालियों सहित नमूने कम तापमान पर संरक्षित कर पृथ्वी पर लाए जाएंगे, जो भविष्य की अंतरिक्ष कृषि के मॉडल विकास में सहायक होंगे।

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर शनचो-23 मिशन के अंतर्गत अंतरिक्ष में धान की दो पीढ़ियाँ उगाने का अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रयोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। 2 अगस्त तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों ने धान के पहले बैच के नमूने तैयार कर उनका संग्रह और सुरक्षित भंडारण पूरा कर लिया है। मिशन के तीनों अंतरिक्ष यात्री — चू यांगचू, चांग चीयुआन और ली च्यायिंग — स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

प्रयोग का उद्देश्य और महत्व

यह प्रयोग पहली बार अंतरिक्ष में बीज से बीज और फिर दोबारा बीज तक — यानी दो पूर्ण जीवन चक्र — पूरे करने का लक्ष्य रखता है। इसका वैज्ञानिक नाम 'अंतरिक्ष में धान की कई पीढ़ियों की आनुवंशिक स्थिरता और पर्यावरणीय अनुकूलनशीलता के आणविक तंत्र' है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रयोग से यह समझने में मदद मिलेगी कि दीर्घकालिक सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रेविटी) धान की आनुवंशिक संरचना को किस हद तक प्रभावित करता है।

मिशन की पृष्ठभूमि

24 मई को शनचो-23 मानवयुक्त अंतरिक्ष यान के सफल प्रक्षेपण के साथ धान के बीज और अन्य प्रयोग सामग्री अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुँचाई गई थी। इस बार भेजे गए बीज चीन की जापोनिका किस्म के हैं, जिनकी अनुकूलन क्षमता मज़बूत मानी जाती है और जिनकी वृद्धि अवधि तीन से चार महीने होती है। इनमें दो समूह शामिल हैं — पहला, वे सामान्य बीज जो पहले कभी अंतरिक्ष में नहीं गए थे; और दूसरा, वे बीज जो वर्ष 2022 में अंतरिक्ष स्टेशन पर तैयार हुए थे और पृथ्वी पर लौटने के बाद जिनकी तीन पीढ़ियाँ उगाई जा चुकी हैं।

2022 की सफलता से आगे का सफर

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर दुनिया में पहली बार धान का बीज से बीज तक पूरा जीवन चक्र सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। उस प्रयोग में 6 धान के बीज अंतरिक्ष में भेजे गए थे और 120 दिनों के भीतर पहली पीढ़ी के 59 बीज प्राप्त हुए थे। इन बीजों को बाद में शनचो-14 मिशन के साथ पृथ्वी पर वापस लाया गया था। वर्तमान प्रयोग उसी उपलब्धि को अगले स्तर पर ले जाने का प्रयास है।

नमूने संग्रह और आगे की योजना

वैज्ञानिकों के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों को धान की बालियों और बीजों के अलावा तने और पत्तियों जैसे नमूने भी कम तापमान पर सुरक्षित रखकर पृथ्वी पर वापस लाने होंगे। इन नमूनों के विश्लेषण से भविष्य की अंतरिक्ष कृषि के लिए व्यावहारिक उत्पादन मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है। यह प्रयोग ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियाँ दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए खाद्य आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष मिशनों — जैसे चंद्रमा आधार या मंगल अभियान — की खाद्य आत्मनिर्भरता की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। चीन 2022 की एकल-पीढ़ी सफलता के बाद तेज़ी से आगे बढ़ा है, जबकि NASA और ESA अभी भी बंद परिवेश में फसल उत्पादन के प्रारंभिक चरण में हैं। हालाँकि, आनुवंशिक स्थिरता पर दीर्घकालिक डेटा अभी सामने आना बाकी है — असली परीक्षण तब होगा जब पृथ्वी पर लाए गए नमूनों का स्वतंत्र वैज्ञानिक विश्लेषण प्रकाशित हो।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शनचो-23 मिशन में धान का प्रयोग क्या है?
शनचो-23 मिशन के तहत चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर पहली बार अंतरिक्ष में धान के दो पूर्ण जीवन चक्र — बीज से बीज और फिर दोबारा बीज — पूरे करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि दीर्घकालिक सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण धान की आनुवंशिक स्थिरता को कैसे प्रभावित करता है।
2022 में चीन ने अंतरिक्ष में धान के साथ क्या हासिल किया था?
वर्ष 2022 में चीनी अंतरिक्ष स्टेशन पर दुनिया में पहली बार 6 धान के बीजों से 120 दिनों के भीतर 59 बीज प्राप्त किए गए थे — यह अंतरिक्ष में बीज-से-बीज का पहला सफल जीवन चक्र था। इन बीजों को शनचो-14 मिशन के साथ पृथ्वी पर वापस लाया गया था।
इस बार कौन-सी किस्म के धान के बीज अंतरिक्ष में भेजे गए हैं?
शनचो-23 मिशन के साथ चीन की जापोनिका किस्म के धान के बीज भेजे गए हैं, जिनकी अनुकूलन क्षमता मज़बूत मानी जाती है और वृद्धि अवधि तीन से चार महीने की होती है। इनमें दो समूह हैं — पहली बार अंतरिक्ष जाने वाले सामान्य बीज और 2022 में अंतरिक्ष में तैयार हुए बीजों की तीसरी पृथ्वी-पीढ़ी।
अंतरिक्ष में धान उगाने के प्रयोग का भविष्य में क्या महत्व है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रयोग से प्राप्त नमूने भविष्य की अंतरिक्ष कृषि के लिए व्यावहारिक उत्पादन मॉडल विकसित करने में सहायक होंगे। दीर्घकालिक मानव मिशनों — जैसे चंद्रमा या मंगल अभियान — में खाद्य आत्मनिर्भरता के लिए इस तरह के शोध की आवश्यकता है।
अंतरिक्ष यात्री धान के नमूने पृथ्वी पर कैसे लाएंगे?
वैज्ञानिकों के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों को धान की बालियों और बीजों के अलावा तने और पत्तियाँ भी कम तापमान पर सुरक्षित रखकर पृथ्वी पर वापस लानी होंगी। इन नमूनों का अध्ययन आनुवंशिक स्थिरता और पर्यावरणीय अनुकूलनशीलता को समझने में मदद करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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