अराघची का दावा: अमेरिका ने ईरान की 'सात-दिवसीय योजना' मानी, होर्मुज जलडमरूमध्य पर शर्तें बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 21 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि अमेरिका ने तेहरान की 'सात-दिवसीय योजना' को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है, हालाँकि वाशिंगटन ने इसमें कुछ अतिरिक्त शर्तें जोड़ने का अनुरोध भी किया है। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, 'अल-एखबरिया' टेलीविजन नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में अराघची ने यह जानकारी दी।
सात-दिवसीय योजना की मुख्य शर्तें
अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिकी पक्ष के सामने एक विस्तृत प्रस्ताव रखा था, जिसमें शर्त यह थी कि छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को पूरी तरह से पुनः खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमने पहले अमेरिकी पक्ष के सामने सात-दिवसीय योजना प्रस्ताव रखा था, जिसमें हमने अपनी शर्तें स्पष्ट रूप से बता दी थीं। अमेरिकियों ने हमें बताया कि वे इन शर्तों को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे इसमें कुछ और शर्तें भी जोड़ना चाहते हैं।'
ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनयिक बातचीत अभी भी सक्रिय रूप से जारी है और किसी अंतिम सहमति तक पहुँचने की प्रक्रिया चल रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख
अराघची ने दोहराया कि जब तक कोई ठोस समझौता या सहमति नहीं बन जाती, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए पूरी तरह नहीं खोला जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा, 'जहाज़ों और पोतों की आवाजाही के लिए वाशिंगटन को ईरान की शर्तें माननी होंगी।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि समझौते तक इस जलमार्ग से समुद्री यातायात में व्यवधान बना रहेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पहले से ही दबाव है — होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार गुज़रता है।
इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच एक 14-सूत्रीय 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (एमओयू) हुआ है। इसके तहत यह तय हुआ है कि वाशिंगटन सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करेगा और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों तथा घेराबंदी को हटाएगा। इसके बदले में तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को चरणबद्ध ढंग से पुनः खोलेगा। यह ढाँचा दोनों देशों के बीच दशकों की शत्रुता में एक असाधारण राजनयिक मोड़ का संकेत देता है।
लाल सागर मामले से दूरी
अराघची ने लाल सागर में हूती अभियानों से ईरान की संलिप्तता के आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, 'लाल सागर का मुद्दा और वहाँ हो रही घटनाएँ हमसे बिल्कुल भी जुड़ी नहीं हैं; उनकी अपनी अलग परिस्थितियाँ हैं।' आलोचकों का कहना है कि यह दावा पश्चिमी खुफिया आकलनों से मेल नहीं खाता, जो ईरान और हूती समूह के बीच समन्वय की ओर इशारा करते हैं।
आगे की राह
अमेरिका द्वारा अतिरिक्त शर्तें जोड़े जाने का अनुरोध यह संकेत देता है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत में लचीलापन आया है, लेकिन अंतिम सहमति अभी दूर है। यदि समझौता सफल होता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति दोनों के लिए निर्णायक साबित होगा।