ईरान के विदेश मंत्री अराघची का ऐलान: संप्रभुता से समझौता नहीं, आपसी सम्मान पर बातचीत को तैयार
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 18 अक्टूबर 2026 को बगदाद में स्पष्ट किया कि तेहरान किसी भी दबाव में आकर अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा, लेकिन 'आपसी सम्मान और भरोसेमंद गारंटी' के आधार पर वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार है। अराघची ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के विदेश मंत्रियों की 52वीं बैठक में शामिल होने के लिए इराक की राजधानी पहुँचे थे।
अराघची के मुख्य बयान
अराघची ने दो टूक कहा, 'ईरान किसी भी तरह की जबरदस्ती, धमकी या डराने-धमकाने की राजनीति को स्वीकार नहीं करता।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान अपने लोगों, अपनी संप्रभुता और वैध हितों की रक्षा हर संभव तरीके से करता रहेगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी किसी पड़ोसी देश पर सीधा हमला नहीं किया, बल्कि उन देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया।
होर्मुज स्ट्रेट और सात दिवसीय योजना
अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने याद दिलाया कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले यह जलमार्ग खुला हुआ था। ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को एक 'ठोस' सात दिवसीय योजना भेजी है, जिसके तहत यदि आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं तो होर्मुज स्ट्रेट को सात दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है। अराघची ने कहा, 'अब फैसला अमेरिका के हाथ में है।'
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन की कई लहरों में हमले किए और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ कड़ी कर दी। 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ, और 18 जून को ईरान व अमेरिका ने क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
वार्ता की समयसीमा और गतिरोध
इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी, जिसकी समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हुई। इन वार्ताओं का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर अंतिम समझौता करना था। लेकिन बढ़ते तनाव के कारण दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे तक पहुँचने में नाकाम रहे।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का रुख
अराघची ने जोर देकर कहा, 'कोई भी देश दूसरे देशों की सुरक्षा की कीमत पर अपनी स्थायी सुरक्षा नहीं बना सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के हर देश की जमीन, हवाई क्षेत्र और बुनियादी ढाँचे का इस्तेमाल केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए होना चाहिए, न कि किसी पड़ोसी देश पर हमले के मंच के रूप में। अराघची के अनुसार, क्षेत्र की समस्याओं का समाधान क्षेत्र के देश खुद मिलकर करें, ताकि बाहरी शक्तियों को युद्ध का बहाना न मिले। आगे की वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अमेरिका की प्रतिक्रिया पर काफी हद तक निर्भर करेगी।