अराघची का नेतन्याहू पर पलटवार: 'हमारे पास भी हिसाब चुकता करने को बहुत कुछ है'
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 19 अक्टूबर 2026 को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ताज़ा बयानों पर तीखा पलटवार किया, यह कहते हुए कि ईरान के पास भी 'हिसाब चुकता करने के लिए बहुत कुछ' है। यह प्रतिक्रिया तब आई जब नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन का आभार व्यक्त करते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की घोषणा की।
अराघची का एक्स पर सीधा जवाब
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अराघची ने लिखा, 'पिछली बार भी आप 'काम पूरा करने' निकले थे, लेकिन नतीजा यह हुआ कि ईरान पहले से भी ज्यादा मजबूत होकर उभरा। क्या फिर से अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं? आपका स्वागत है। लेकिन सावधान रहिए, हमारे भी कुछ अधूरे काम बाकी हैं।'
इसके साथ ही अराघची ने नेतन्याहू पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि वे 'खुद जेल जाने से बचने के लिए अमेरिका को एक और युद्ध में धकेल रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि इसके नतीजे इजरायल और अमेरिकी राष्ट्रपति दोनों पर क्या असर डालेंगे, इसकी परवाह नेतन्याहू को नहीं है।
नेतन्याहू-ट्रंप की दोस्ती और परमाणु वादा
इससे पहले नेतन्याहू ने एक्स पर पोस्ट कर ट्रंप के समर्थन पर आभार जताया था। उन्होंने लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप, मेरे दोस्त डोनाल्ड, आपके शानदार समर्थन के लिए धन्यवाद। व्हाइट हाउस में इजरायल का इससे बेहतर दोस्त कभी नहीं रहा। हम मिलकर ईरान की सरकार को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।'
नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि अगले दो वर्षों में दोनों देश मिलकर 'ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म' कर देंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 27 अक्टूबर 2026 को इजरायल में संसदीय चुनाव होने हैं।
ट्रंप का नेतन्याहू को समर्थन और चुनावी पृष्ठभूमि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को 'मजबूत, बहादुर और शानदार नेता' बताया है। गौरतलब है कि इजरायल में चुनाव से महज आठ दिन पहले यह समर्थन एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि नेतन्याहू ईरान-विरोधी बयानबाजी का उपयोग घरेलू राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।
ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है। ईरान और इजरायल के बीच कथित तौर पर कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक झड़पें हो चुकी हैं। अराघची का यह बयान संकेत देता है कि तेहरान किसी भी संभावित इजरायली या अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है।
आगे क्या
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायली चुनावों के बाद की सरकार का स्वरूप और ट्रंप-नेतन्याहू की नीतिगत सक्रियता, ईरान के परमाणु मुद्दे पर आगे की दिशा तय करेगी। अराघची के बयानों के मद्देनजर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा होने की आशंका जताई जा रही है।