अल नीनो से इगुआजु नदी का बहाव सामान्य से 6 गुना बढ़ा, अर्जेंटीना में विश्व प्रसिद्ध जलप्रपात अस्थायी रूप से बंद
सारांश
मुख्य बातें
अर्जेंटीना में अल नीनो से जुड़ी असाधारण मौसमी परिस्थितियों के चलते इगुआजु नदी का जलस्तर सामान्य से 6 गुना से भी अधिक बढ़ गया, जिसके बाद इगुआजु राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने विश्व धरोहर इगुआजु जलप्रपात के आसपास पर्यटकों का प्रवेश अस्थायी रूप से रोक दिया। नदी में जल-प्रवाह 12,000 घन मीटर प्रति सेकंड से अधिक पहुँचने के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज होने के बाद मंगलवार, स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से पर्यटकों के लिए क्षेत्र पुनः खोल दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
ब्यूनस आयर्स स्थित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को इगुआजु नदी में जल-प्रवाह 12,000 घन मीटर प्रति सेकंड से ऊपर पहुँच गया, जो सामान्य स्थितियों में इससे काफी कम रहता है। लगातार हो रही भारी बारिश के साथ-साथ नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। यह स्थिति ऐसे समय में आई जब मौसम वैज्ञानिक पहले ही 2026-27 के अल नीनो को काफी शक्तिशाली बताने की चेतावनी दे चुके थे।
इगुआजु राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक जोस मारिया एर्वास ने कहा कि लगातार बारिश हो रही थी और नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित बांधों से पानी का बहाव भी कम नहीं हो रहा था, ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाना अनिवार्य था।
अल नीनो का असर और वैज्ञानिक संदर्भ
अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने की एक जलवायु घटना है, जो दुनियाभर में हवाओं, वर्षा और मौसम के सामान्य पैटर्न को प्रभावित करती है। अर्जेंटीना के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान विभाग ने पिछले महीने देश के तटीय क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की थी और इन परिस्थितियों की तुलना पूर्व के मजबूत अल नीनो प्रकरणों से की थी।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 2026-27 का अल नीनो काफी प्रबल हो सकता है। गौरतलब है कि 2023 और 2024 में भी इगुआजु नदी का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ने के कारण अर्जेंटीना की ओर स्थित राष्ट्रीय उद्यान को बंद करना पड़ा था — यह इस क्षेत्र के लिए पहली घटना नहीं है।
इगुआजु जलप्रपात का महत्व
इगुआजु जलप्रपात अर्जेंटीना और ब्राजील की सीमा पर स्थित है और लगभग 2,700 मीटर की चौड़ाई में फैला हुआ है। यह दुनिया के सबसे बड़े और दर्शनीय जलप्रपातों में गिना जाता है। यूनेस्को ने इसे विश्व के प्रमुख प्राकृतिक धरोहर स्थलों में शामिल किया है। प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक यहाँ भ्रमण के लिए आते हैं, और किसी भी बंदी का सीधा असर स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और पुनः खुलना
राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने नदी के बहाव में क्रमिक गिरावट की पुष्टि के बाद मंगलवार, स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से पर्यटकों के लिए क्षेत्र पुनः खोलने की घोषणा की। अधिकारियों ने बताया कि जलस्तर और पर्यटक मार्गों की स्थिति पर लगातार नज़र बनाए रखी गई। यह त्वरित और एहतियाती प्रबंधन पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की अहमियत को रेखांकित करता है।
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 2026-27 का अल नीनो पूर्वानुमान के अनुरूप प्रबल रहा, तो इस क्षेत्र में ऐसी परिस्थितियाँ भविष्य में और अधिक बार उत्पन्न हो सकती हैं।