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बोलीविया में 'अल नीनो' से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित, 80,000 परिवार प्रभावित; म्यांमार ने बनाए 600 राहत केंद्र

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बोलीविया में 'अल नीनो' से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित, 80,000 परिवार प्रभावित; म्यांमार ने बनाए 600 राहत केंद्र

सारांश

बोलीविया में 80,000 परिवार पानी की कमी और 75,000 से अधिक पशुओं की मौत के बाद राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया। उधर म्यांमार ने 1.5 लाख लोगों की क्षमता वाले 600 राहत केंद्र स्थापित किए — दोनों देश नवंबर-दिसंबर 2026 में अल नीनो के चरम पर पहुँचने की चेतावनी से जूझ रहे हैं।

मुख्य बातें

बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने 1 नवंबर 2026 को 'अल नीनो' के प्रभावों से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया।
देश के नौ में से छह विभागों में लगभग 80,000 परिवार पानी की कमी से प्रभावित; 63 समुदाय सूखे की चपेट में।
सूखे के कारण 75,000 से अधिक पशुओं की मौत और पशुपालन क्षेत्र में चारे की गंभीर किल्लत।
म्यांमार के यांगून क्षेत्र के 14 जिलों में 600 से अधिक हीट रिलीफ शेल्टर तैयार, जिनमें 1.5 लाख से अधिक लोगों को ठहराने की क्षमता।
म्यांमार के मौसम और जलविज्ञान विभाग (DMH) की चेतावनी — अल नीनो नवंबर-दिसंबर 2026 में चरम पर पहुँच सकता है।

बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने 'अल नीनो' जलवायु घटना के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने वाले एक आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। 1 नवंबर 2026 को की गई इस घोषणा का उद्देश्य देश के कई हिस्सों में पड़ रहे भीषण सूखे से तत्काल राहत देना और आने वाले महीनों में संभावित बाढ़ के लिए पूर्व-तैयारी सुनिश्चित करना है। इसी बीच, म्यांमार के यांगून क्षेत्र में भी अल नीनो की आशंका के मद्देनज़र 600 से अधिक हीट रिलीफ शेल्टर स्थापित किए गए हैं।

बोलीविया में संकट की स्थिति

राष्ट्रपति पाज के अनुसार, अब तक बोलीविया के 63 समुदाय सूखे की चपेट में आ चुके हैं। देश के नौ में से छह विभागों में लगभग 80,000 परिवार पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। बोलीविया के नागरिक सुरक्षा उपमंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, सूखे के कारण 75,000 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है और पशुपालन क्षेत्र चारे की भारी किल्लत का सामना कर रहा है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण अमेरिका के कई देश जलवायु परिवर्तन के चलते बारी-बारी से सूखे और बाढ़ के चक्र में फँसते जा रहे हैं। बोलीविया के लिए यह आपातकाल केवल तात्कालिक संकट का संकेत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु कुप्रबंधन की चेतावनी भी है।

सरकार के लक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

राष्ट्रपति पाज ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक एवं मानव संसाधनों को एकजुट करना, सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग हासिल करना है। इससे प्रभावित परिवारों को सीधी सहायता मिल सकेगी और जलवायु आपदाओं का जनजीवन तथा आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाला असर न्यूनतम किया जा सकेगा।

म्यांमार में 600 हीट रिलीफ शेल्टर तैयार

म्यांमार के यांगून क्षेत्र के 14 जिलों में 600 से अधिक राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें कुल मिलाकर 1.5 लाख से अधिक लोगों को ठहराने की क्षमता है। यह तैयारी अल नीनो के मजबूत प्रभाव की आशंका को देखते हुए की गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य सेवाएँ निर्बाध रूप से चलती रहें, इसके लिए अस्पतालों, क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था भी की गई है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

म्यांमार के मौसम और जलविज्ञान विभाग (DMH) ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन और अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों के आकलन के आधार पर कहा है कि अत्यंत प्रबल अल नीनो की स्थिति नवंबर और दिसंबर 2026 में अपने चरम पर पहुँच सकती है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान अनियमित वर्षा, असामान्य रूप से उच्च तापमान, अनपेक्षित तूफानी गतिविधियाँ, सूखा और अन्य मौसम संबंधी चरम घटनाएँ देखी जा सकती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब एशिया और दक्षिण अमेरिका दोनों में एक साथ अल नीनो के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, जो इस जलवायु घटना की वैश्विक व्यापकता को रेखांकित करता है। आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण की माँग और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ही जलवायु संकट के दो चेहरे हैं — दक्षिण अमेरिका में सूखा और एशिया में भीषण गर्मी, दोनों एक ही प्रशांत महासागरीय तापमान-विचलन की उपज हैं। चिंताजनक यह है कि बोलीविया में 75,000 से अधिक पशुओं की मौत और 80,000 परिवारों पर पानी का संकट राष्ट्रीय आपातकाल घोषित होने से पहले ही हो चुका था — यानी तैयारी नहीं, प्रतिक्रिया की राजनीति हावी रही। म्यांमार की 600 राहत केंद्रों की योजना अपेक्षाकृत सक्रिय कदम है, लेकिन DMH की 'नवंबर-दिसंबर चरम' की चेतावनी यह भी बताती है कि असली परीक्षा अभी बाकी है। भारत के लिए भी यह संकेत है कि अल नीनो के इस चक्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनिश्चितता और गर्मी की लहरें नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता सूची में होनी चाहिए।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोलीविया ने राष्ट्रीय आपातकाल क्यों घोषित किया?
बोलीविया ने 'अल नीनो' जलवायु घटना के कारण देश के छह विभागों में पड़ रहे भीषण सूखे और आगामी बाढ़ की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। इससे संसाधन जुटाने, एजेंसियों में समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहायता हासिल करने में मदद मिलेगी।
बोलीविया में अल नीनो से कितने लोग और पशु प्रभावित हुए हैं?
बोलीविया के नागरिक सुरक्षा उपमंत्रालय के अनुसार, लगभग 80,000 परिवार पानी की कमी से प्रभावित हैं और 63 समुदाय सूखे की चपेट में हैं। इसके अलावा सूखे के कारण 75,000 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है।
म्यांमार के हीट रिलीफ शेल्टर क्या हैं और कहाँ बनाए गए हैं?
म्यांमार के यांगून क्षेत्र के 14 जिलों में 600 से अधिक हीट रिलीफ शेल्टर स्थापित किए गए हैं, जिनमें कुल 1.5 लाख से अधिक लोगों को ठहराने की क्षमता है। ये केंद्र अल नीनो के कारण संभावित भीषण गर्मी से राहत देने के लिए बनाए गए हैं।
अल नीनो क्या होता है और इसका असर कैसे पड़ता है?
अल नीनो एक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्से का सतही जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण दुनिया भर में असामान्य मौसमी बदलाव — जैसे सूखा, बाढ़, भीषण गर्मी और तूफान — देखने को मिलते हैं।
म्यांमार में अल नीनो का असर कब सबसे अधिक रहेगा?
म्यांमार के मौसम और जलविज्ञान विभाग (DMH) के अनुसार, विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आकलन के आधार पर बहुत मजबूत अल नीनो की स्थिति नवंबर और दिसंबर 2026 में चरम पर पहुँच सकती है। इस दौरान अनियमित बारिश, उच्च तापमान, सूखा और तूफानी गतिविधियाँ बढ़ने की चेतावनी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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