बोलीविया में 'अल नीनो' से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित, 80,000 परिवार प्रभावित; म्यांमार ने बनाए 600 राहत केंद्र
सारांश
मुख्य बातें
बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने 'अल नीनो' जलवायु घटना के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने वाले एक आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। 1 नवंबर 2026 को की गई इस घोषणा का उद्देश्य देश के कई हिस्सों में पड़ रहे भीषण सूखे से तत्काल राहत देना और आने वाले महीनों में संभावित बाढ़ के लिए पूर्व-तैयारी सुनिश्चित करना है। इसी बीच, म्यांमार के यांगून क्षेत्र में भी अल नीनो की आशंका के मद्देनज़र 600 से अधिक हीट रिलीफ शेल्टर स्थापित किए गए हैं।
बोलीविया में संकट की स्थिति
राष्ट्रपति पाज के अनुसार, अब तक बोलीविया के 63 समुदाय सूखे की चपेट में आ चुके हैं। देश के नौ में से छह विभागों में लगभग 80,000 परिवार पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। बोलीविया के नागरिक सुरक्षा उपमंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, सूखे के कारण 75,000 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है और पशुपालन क्षेत्र चारे की भारी किल्लत का सामना कर रहा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण अमेरिका के कई देश जलवायु परिवर्तन के चलते बारी-बारी से सूखे और बाढ़ के चक्र में फँसते जा रहे हैं। बोलीविया के लिए यह आपातकाल केवल तात्कालिक संकट का संकेत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु कुप्रबंधन की चेतावनी भी है।
सरकार के लक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
राष्ट्रपति पाज ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक एवं मानव संसाधनों को एकजुट करना, सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग हासिल करना है। इससे प्रभावित परिवारों को सीधी सहायता मिल सकेगी और जलवायु आपदाओं का जनजीवन तथा आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाला असर न्यूनतम किया जा सकेगा।
म्यांमार में 600 हीट रिलीफ शेल्टर तैयार
म्यांमार के यांगून क्षेत्र के 14 जिलों में 600 से अधिक राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें कुल मिलाकर 1.5 लाख से अधिक लोगों को ठहराने की क्षमता है। यह तैयारी अल नीनो के मजबूत प्रभाव की आशंका को देखते हुए की गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य सेवाएँ निर्बाध रूप से चलती रहें, इसके लिए अस्पतालों, क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था भी की गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
म्यांमार के मौसम और जलविज्ञान विभाग (DMH) ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन और अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों के आकलन के आधार पर कहा है कि अत्यंत प्रबल अल नीनो की स्थिति नवंबर और दिसंबर 2026 में अपने चरम पर पहुँच सकती है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान अनियमित वर्षा, असामान्य रूप से उच्च तापमान, अनपेक्षित तूफानी गतिविधियाँ, सूखा और अन्य मौसम संबंधी चरम घटनाएँ देखी जा सकती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब एशिया और दक्षिण अमेरिका दोनों में एक साथ अल नीनो के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, जो इस जलवायु घटना की वैश्विक व्यापकता को रेखांकित करता है। आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण की माँग और तेज होने की संभावना है।