बलूच नेता का बड़ा बयान: संघर्ष का निर्णय अब अफगानिस्तान के हाथ में
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नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अफगानिस्तान के हमलों से परेशान पाकिस्तान ने अब खुली जंग का ऐलान कर दिया है। लेकिन क्या वह इसे रोकने में सफल हो पाएगा? 'फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट' के कैबिनेट सदस्य मौला बख्श बलूच का मानना है कि तीर अब कमान से निकल चुका है और संघर्ष विराम का निर्णय अफगानिस्तान ही करेगा, न कि पाकिस्तान जैसा आतंकवादी देश। राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में बख्श ने इस्लामाबाद की नीयत और उसकी फंडिंग की सच्चाई को उजागर किया।
फिनलैंड में रहने वाले बलूच नेता ने कहा कि पाकिस्तान अपने आकाओं को खुश करने के लिए हमले कर रहा है। पाकिस्तान एक बड़ा देश है लेकिन उसके पास पर्याप्त पैसा नहीं है, और वह एक आतंकी राष्ट्र है जो फंड पाने के लिए दिखावा करता है। वह दिखाना चाहता है कि वह आतंक का शिकार है, लेकिन सच्चाई कुछ और है। वे भिखारी हैं जो पैसे के लिए ऐसा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान आम नागरिकों को निशाना क्यों बना रहा है, यह समझ से परे है। बच्चे और महिलाएं किसी भी धर्म के अनुयायी को लक्ष्य नहीं बनानी चाहिए। पाकिस्तान सेना केवल हथियार की भाषा समझती है। वे आम नागरिकों को मारकर अपने झूठ को फैलाते हैं जबकि वे खुद आतंकवादी हैं।
उन्होंने रमजान के महीने में ऐसे हमलों को गलत ठहराया और कहा, "ये लोग खुद को इस्लामिक कहते हैं लेकिन माह-ए-रमजान में ऐसा करते हैं। मैं इसकी खुली निंदा करता हूं। इस बार पाकिस्तान ने हमला करके एक बड़ा कदम उठाया है। वे अपने आकाओं को खुश करना चाहते हैं और मुझे स्पष्ट दिख रहा है कि अब उन्होंने अपने लिए समस्याएं खड़ी कर ली हैं। अफगानिस्तान से पाकिस्तान को ही नुकसान होगा। काबुल अपने नागरिकों के लिए पूरी मेहनत से काम करता है।"
जब उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान ऐसा क्यों कर रहा है, तो उन्होंने कहा, "क्योंकि पाकिस्तान एक आतंकवादी राष्ट्र है। यह बलूचिस्तान, अफगानिस्तान और भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। इनका मानसिकता गंदा है। गंदे दिमाग से ये कुछ भी गलत कर सकते हैं। अब दुनिया को इसे रोकना होगा। हम बलूच इससे काफी चिंतित हैं।"
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा एम आसिफ ने खुली जंग का ऐलान किया है, तो आगे क्या होगा? इस पर बलूच नेता ने कहा, "अब गेंद पाकिस्तान के हाथ में नहीं, बल्कि अफगानिस्तान के हाथ में है। अफगानिस्तान ही अब कुछ कर सकता है। अगर वे चाहेंगे तभी संघर्ष समाप्त होगा। उन्हें यह तय करना है कि वे संघर्ष समाप्त करना चाहते हैं या प्रतिशोध लेने की इच्छा रखते हैं। उनके लिए ये पहला और आखिरी मौका है—आखिरी मौका कि वे डूरंड लाइन को लेकर स्थिति स्पष्ट करें। हम बलूच भी गोल्ड स्मिथ लाइन को सही नहीं मानते हैं।"
‘डूरंड लाइन’ 2,611 किलोमीटर लंबी वह सीमा रेखा है जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान खींचा गया था। पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान की कोई भी सरकार इसे मानने के लिए तैयार नहीं होती। अफगानिस्तान का कहना है कि यह रेखा उनके देश को बांटती है। यही कारण है कि यहां अक्सर गोलीबारी और तनाव बना रहता है।