बांग्लादेश में बढ़ती अराजकता: भीड़ हिंसा, 900 शव बरामद, 723 जबरन वसूली मामले
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में कानून व्यवस्था की स्थिति 3 अक्टूबर 2026 तक गंभीर रूप से बिगड़ती नज़र आ रही है, जहाँ भीड़ के हमलों, तोड़फोड़ और संगठित अपराध की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बांग्लादेश के प्रमुख समाचारपत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, दिन हो या रात, कोई भी व्यक्ति हिंसा का निशाना बन सकता है और हर घटना के बाद उसे सही ठहराने की कोशिश की जाती है।
भीड़ हिंसा और तोड़फोड़ का फैलाव
रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों दरगाहों और खानकाहों (सूफी केंद्रों) को तोड़ा गया है, और हाल ही में एक चर्चित कंटेंट क्रिएटर के स्टूडियो में भी तोड़फोड़ की गई। ऐसी हरकतों को उचित ठहराने वालों की कमी नहीं है, जो विशेषज्ञों के अनुसार एक गहरे सामाजिक पतन का संकेत है।
बांग्लादेश के प्रतिष्ठित समाचारपत्र 'प्रोथोम आलो' ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा: "समृद्ध बांग्लादेश देखने और बनाने का सपना पुराना है। यह सिर्फ भाषणों या साहित्य तक सीमित नहीं है। हजारों लोगों ने अलग अलग समय पर इस सपने के लिए अपनी जान दी है... बांग्लादेश के मामले में वह सपना बार बार अधूरा ही रह गया है।"
नदियों से 900 से अधिक शव, आँकड़े चौंकाने वाले
बांग्लादेशी अखबार 'न्यू एज' के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि रिवर पुलिस ने पिछले 20 महीनों में नदियों से 900 से ज्यादा शव बरामद किए हैं। इनमें सबसे अधिक शव ढाका इलाके की जलधाराओं से मिले हैं, जो राजधानी में व्याप्त अनियंत्रित हिंसा की गहराई को उजागर करता है।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब देश में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर है और सुरक्षा बलों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जबरन वसूली के 723 मामले — और 85% सत्यापित
बंगाली भाषा के अखबार 'भोरर कागोज' ने पुलिस आँकड़ों के आधार पर बताया कि इस साल के पहले आठ महीनों में राजधानी के थानों में जबरन वसूली के 723 मामले या शिकायतें दर्ज की गईं। जाँच में इनमें से 85 प्रतिशत शिकायतें सही पाई गईं।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि बांग्लादेश में होने वाले वास्तविक अपराधों का एक बहुत छोटा हिस्सा ही पुलिस तक पहुँचता है, क्योंकि पीड़ित अक्सर परेशानी से बचने के लिए शिकायत दर्ज नहीं कराते। रिपोर्ट में कहा गया: "ये रिपोर्टें एक डरावने आइसबर्ग के ऊपरी हिस्से जैसी लग सकती हैं — अगर राजधानी का यह हाल है, तो दूर दराज के गाँवों में क्या हो रहा होगा?"
राजनीतिक विवाद: अवामी लीग बनाम बीएनपी सरकार
इस हफ्ते की शुरुआत में बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी बीएनपी सरकार के दौर में देश में हत्या, बलात्कार, भीड़ द्वारा हत्या और जबरन गायब करने की घटनाएँ बेतहाशा बढ़ी हैं।
पार्टी ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे कानून व्यवस्था के बजाय राजनीतिक बदले को प्राथमिकता दे रहे हैं। अवामी लीग ने कहा: "जब कोई मंत्री अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है।"
सुधार की जरूरत, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति नदारद
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के बाद कोई भी राजनीतिक व्यवस्था तब तक टिकाऊ नहीं हो सकती जब तक वह न्याय की माँग पूरी न करे, संसाधनों का समान बँटवारा सुनिश्चित न करे और कानूनों एवं प्रशासन में सुधार न करे। फिर भी, विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था ऐसे सुधारों के प्रति उदासीन है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से जबरन गुमशुदगी रोकने वाले कानून, मानवाधिकार आयोग कानून, आरएबी (RAB) में सुधार, संसदीय स्थायी समितियों के कामकाज और साइबर कानून के मसौदे में कथित तौर पर मौजूद अस्पष्ट व खतरनाक प्रावधानों का हवाला देते हुए चिंता जताई गई है।
बांग्लादेश में कानून व्यवस्था का यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है, जब तक कि सरकार ठोस संस्थागत सुधारों की दिशा में कदम नहीं उठाती।