बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ऑफिस में इस्तीफों की बाढ़, डिप्टी AG शेउली खानम ने भी छोड़ा पद
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ऑफिस में इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को डिप्टी अटॉर्नी जनरल शेउली खानम ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार यह इस्तीफा पहले अटॉर्नी जनरल के दफ्तर में जमा किया गया और फिर सॉलिसिटर को भेजा गया।
इस्तीफों की पूरी कालक्रम
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार शेउली खानम से पहले डिप्टी अटॉर्नी जनरल बेलायत हुसैन ने 21 सितंबर को निजी वजहों का हवाला देते हुए पद छोड़ा था। इससे कुछ सप्ताह पहले, 9 सितंबर को डिप्टी अटॉर्नी जनरल सादिया अफरीन शापला ने भी इस्तीफा दे दिया था।
सबसे बड़ी सामूहिक विदाई 7 सितंबर को हुई, जब एक ही दिन पाँच कानूनी अधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा दिया। इनमें एडिशनल अटॉर्नी जनरल मुहम्मद अब्दुल जब्बार भुयान, डिप्टी अटॉर्नी जनरल सुल्ताना अख्तर रूबी और मामून चौधरी, तथा असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल रोहानी सिद्दिका और प्रोज्जल चकमा शामिल थे।
इसके अलावा, असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल मोहम्मद नूरुल करीम ने भी हाल ही में त्यागपत्र दिया, जिन पर अवामी लीग के लिए राजनीतिक गतिविधियाँ करने के आरोप लगे थे। बांग्ला न्यूज़ 24 के अनुसार उन्होंने कानून मंत्री को सीधे अपना इस्तीफा सौंपा।
जून में जमात समर्थित अधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा
यह संकट केवल हालिया महीनों तक सीमित नहीं है। जून में जमात समर्थित सात डिप्टी अटॉर्नी जनरल और 11 असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ने सरकार के एक अनिर्दिष्ट फैसले के विरोध में एकसाथ पद छोड़ दिए थे। रिपोर्टों में उस सरकारी फैसले का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि जून से अक्टूबर 2026 के बीच अटॉर्नी जनरल ऑफिस में इस्तीफे देने वालों की संख्या दर्जनों में पहुँच चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पहले से दबाव में बताई जा रही है।
ऑफिस की कार्यक्षमता पर सवाल
अटॉर्नी जनरल का दफ्तर ढाका हाई कोर्ट में सरकार का प्रतिनिधित्व करने और कानूनी सलाह देने की अहम जिम्मेदारी निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इतने कम समय में वरिष्ठ अधिकारियों की एक के बाद एक विदाई से केस मैनेजमेंट की निरंतरता और समग्र संस्थागत क्षमता प्रभावित हो सकती है।
सरकार की चुप्पी और उठते सवाल
शेउली खानम और बेलायत हुसैन — दोनों ने अपने इस्तीफे का कारण निजी बताया है। हालाँकि बांग्लादेशी मीडिया में यह बहस तेज़ हो रही है कि क्या इतने कम समय में एक ही दफ्तर से इतने अधिकारियों का जाना महज संयोग है, या इसके पीछे कोई गहरा प्रशासनिक अथवा राजनीतिक कारण है। अब तक न तो सरकार और न ही अटॉर्नी जनरल के ऑफिस ने इस पैटर्न पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बांग्लादेश सरकार इन रिक्तियों को भरने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या इस्तीफों का यह क्रम जारी रहता है।