बांग्लादेश राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन का इस्तीफा, अप्रैल 2028 से दो साल पहले छोड़ा पद
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया — जो उनके निर्धारित कार्यकाल समाप्ति से करीब दो साल पहले है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ढाका में संसद के स्पीकर ने उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया। अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभालने वाले शहाबुद्दीन, जुलाई 2024 के ऐतिहासिक जन-आंदोलन के बाद देश के एकमात्र बड़े संवैधानिक पदाधिकारी थे जो अपने पद पर बने हुए थे।
इस्तीफे की आधिकारिक वजह
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' से बातचीत में शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'मैं कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा हूँ। फिलहाल, मुझे इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहना है।' हालाँकि, यह सफाई उस समय आई जब उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक परिदृश्य में कई अटकलें पहले से ही चल रही थीं।
शेख हसीना से फोन कॉल और खुफिया जानकारी
'द डेली स्टार' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि शहाबुद्दीन ने इस साल मई में इलाज के लिए लंदन प्रवास के दौरान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में खुफिया एजेंसियों को इस संपर्क की जानकारी मिली, जिसके बाद राष्ट्रपति पर इस्तीफे का दबाव बनाया गया। गौरतलब है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक वरिष्ठ नेता ने इस व्याख्या को अधूरा बताया — उनके अनुसार, 'पूरा मामला इससे कहीं ज़्यादा जटिल है।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि और विवाद
जुलाई 2024 के प्रदर्शनों में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद से ही शहाबुद्दीन के पद पर बने रहने को लेकर बांग्लादेश में निरंतर राजनीतिक बहस जारी थी। 'प्रोथोम अलो' सहित कई प्रमुख बांग्लादेशी मीडिया संस्थानों ने इस बहस को प्रमुखता से उठाया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब BNP के नेतृत्व वाली सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज़ कर रही है।
शहाबुद्दीन के अपने आरोप
इस्तीफे से पहले शहाबुद्दीन ने बंगाभवन (राष्ट्रपति भवन, ढाका) में बांग्लादेशी अखबार 'कालेर कंथो' को दिए एक इंटरव्यू में गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के डेढ़ वर्षों के दौरान उन्हें किसी भी अहम चर्चा से बाहर रखा गया। उन्होंने कहा, 'इन डेढ़ वर्षों के दौरान मुझे किसी भी चर्चा में शामिल नहीं किया गया। इसके बावजूद मेरे खिलाफ तरह-तरह की साज़िशें रची जा रही थीं। देश की शांति और व्यवस्था को हमेशा के लिए बिगाड़ने और संवैधानिक संकट पैदा करने की कई कोशिशें की गईं।'
आगे क्या होगा
शहाबुद्दीन के जाने के बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद रिक्त हो गया है। तेज़ी से बदलती राजनीतिक स्थिति के बीच यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि BNP सरकार इस संवैधानिक रिक्तता को किस तरह भरती है और नए राष्ट्रपति का चुनाव किस दिशा में जाता है।