27 जुलाई 2026
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बांग्लादेश आईसीटी को पूर्व राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन और हामिद के खिलाफ शिकायतें, इस्तीफे के दो दिन बाद कार्रवाई

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बांग्लादेश आईसीटी को पूर्व राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन और हामिद के खिलाफ शिकायतें, इस्तीफे के दो दिन बाद कार्रवाई

सारांश

बांग्लादेश में पूर्व राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन के इस्तीफे के दो दिन के भीतर ही आईसीटी में उनके और पूर्व राष्ट्रपति हामिद के खिलाफ शिकायतें दाखिल हो गईं। 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित मौन को अपराध की श्रेणी में रखने की यह मांग, बीएनपी सरकार के अवामी लीग-जुड़े नेताओं पर शिकंजे का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश आईसीटी के मुख्य अभियोजक कार्यालय को पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के खिलाफ 27 जुलाई 2026 को दो शिकायतें प्राप्त हुईं।
बांग्लादेश आजादी पार्टी ने पूर्व राष्ट्रपति एम.
अब्दुल हामिद के खिलाफ भी अलग शिकायत दाखिल की।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दोनों नेता 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अपराधों पर मौन रहे।
शाहाबुद्दीन ने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य समस्याएँ बताईं; मीडिया रिपोर्टों में शेख हसीना से फोन संपर्क का भी उल्लेख।
आईसीटी मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने पुष्टि की कि शिकायतें जांच एजेंसी को भेजी जा रही हैं।

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के मुख्य अभियोजक कार्यालय को पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के खिलाफ औपचारिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं — और यह उनके पद से इस्तीफे के महज दो दिन बाद हुआ। 27 जुलाई 2026 को ढाका से आई रिपोर्टों के अनुसार, दो अलग-अलग संगठनों ने यह शिकायतें दाखिल की हैं, जिनमें से एक पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद के खिलाफ भी है।

किसने दाखिल कीं शिकायतें

रविवार को बांग्लादेश आजादी पार्टी और राष्ट्र संवाद फोरम ने आईसीटी मुख्य अभियोजक कार्यालय में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। आजादी पार्टी ने शाहाबुद्दीन के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद के खिलाफ भी एक अतिरिक्त शिकायत दाखिल की।

आईसीटी के मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने बांग्लादेशी मीडिया से इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, 'हमें दो शिकायतें मिली हैं और इन्हें जांच एजेंसी को भेजने की प्रक्रिया चल रही है।'

शिकायतों में क्या आरोप हैं

बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, आजादी पार्टी के संयोजक हासिनुर रहमान ने शिकायत सौंपने के बाद पत्रकारों से कहा कि दोनों पूर्व राष्ट्रपति 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अपराधों पर मौन रहे। उनका तर्क था कि यह चुप्पी उन घटनाओं के प्रति कथित तौर पर समर्थन के समान थी।

राष्ट्र संवाद फोरम ने अपनी शिकायत में शाहाबुद्दीन को अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी सहयोगी बताया और 2024 के प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में उनकी कथित भूमिका की जांच की मांग की।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि और विवाद

शाहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने तय अवधि से लगभग दो वर्ष पहले ही इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रीय संसद के स्पीकर ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया।

शाहाबुद्दीन ने स्वयं अपने इस्तीफे के लिए स्वास्थ्य कारण बताए। उन्होंने कहा, 'मुझे सेहत से जुड़ी कई दिक्कतें हैं। इस समय मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है।'

हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि शाहाबुद्दीन ने इस वर्ष मई में लंदन में इलाज के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। कथित तौर पर इंटेलिजेंस एजेंसियों को इस संपर्क की जानकारी मिलने के बाद उन पर पद छोड़ने का दबाव बनाया गया।

गौरतलब है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि कथित फोन बातचीत ही इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं थी और मामला इससे कहीं अधिक जटिल है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बीएनपी नेतृत्व वाली सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही है। जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद शाहाबुद्दीन शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों में अकेले ऐसे थे जो पद पर बने रहे — जो तब से राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ था।

आईसीटी में दाखिल ये शिकायतें बांग्लादेश में उत्तर-2024 राजनीतिक जवाबदेही की प्रक्रिया का नवीनतम अध्याय हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मामला औपचारिक अभियोजन की दिशा में आगे बढ़ता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या बीएनपी सरकार द्वारा अवामी लीग के बचे-खुचे संवैधानिक प्रभाव को खत्म करने की रणनीतिक कोशिश — और इसका उत्तर जांच एजेंसी की स्वायत्तता पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश आईसीटी में शाहाबुद्दीन के खिलाफ क्या शिकायत दाखिल हुई है?
बांग्लादेश आजादी पार्टी और राष्ट्र संवाद फोरम ने 27 जुलाई 2026 को आईसीटी मुख्य अभियोजक कार्यालय में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के खिलाफ शिकायतें दाखिल कीं। शिकायतों में 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अपराधों पर उनकी चुप्पी और शेख हसीना से उनके कथित नज़दीकी संबंधों का हवाला दिया गया है।
मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा क्यों दिया?
शाहाबुद्दीन ने सार्वजनिक रूप से स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि उन्होंने मई में लंदन में इलाज के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर संपर्क किया था, जिसकी जानकारी इंटेलिजेंस एजेंसियों को मिलने के बाद उन पर पद छोड़ने का दबाव बना। बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने इसे अधिक जटिल मामला बताया।
पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद के खिलाफ क्या आरोप हैं?
बांग्लादेश आजादी पार्टी ने पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद के खिलाफ भी अलग शिकायत दाखिल की है। शिकायत में उन पर भी 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अपराधों पर मौन रहने का आरोप लगाया गया है।
बांग्लादेश आईसीटी इन शिकायतों पर आगे क्या करेगा?
आईसीटी के मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने पुष्टि की है कि दोनों शिकायतें जांच एजेंसी को भेजी जा रही हैं। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के बाद ही यह तय होगा कि मामला औपचारिक अभियोजन की दिशा में आगे बढ़ेगा या नहीं।
बांग्लादेश में 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक स्थिति क्या है?
जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से हट गई और बीएनपी नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई। तब से बीएनपी सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही है, और शाहाबुद्दीन के खिलाफ शिकायतें इसी सिलसिले की नवीनतम कड़ी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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