बांग्लादेश आईसीटी को पूर्व राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन और हामिद के खिलाफ शिकायतें, इस्तीफे के दो दिन बाद कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के मुख्य अभियोजक कार्यालय को पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के खिलाफ औपचारिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं — और यह उनके पद से इस्तीफे के महज दो दिन बाद हुआ। 27 जुलाई 2026 को ढाका से आई रिपोर्टों के अनुसार, दो अलग-अलग संगठनों ने यह शिकायतें दाखिल की हैं, जिनमें से एक पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद के खिलाफ भी है।
किसने दाखिल कीं शिकायतें
रविवार को बांग्लादेश आजादी पार्टी और राष्ट्र संवाद फोरम ने आईसीटी मुख्य अभियोजक कार्यालय में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। आजादी पार्टी ने शाहाबुद्दीन के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हामिद के खिलाफ भी एक अतिरिक्त शिकायत दाखिल की।
आईसीटी के मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने बांग्लादेशी मीडिया से इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, 'हमें दो शिकायतें मिली हैं और इन्हें जांच एजेंसी को भेजने की प्रक्रिया चल रही है।'
शिकायतों में क्या आरोप हैं
बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, आजादी पार्टी के संयोजक हासिनुर रहमान ने शिकायत सौंपने के बाद पत्रकारों से कहा कि दोनों पूर्व राष्ट्रपति 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अपराधों पर मौन रहे। उनका तर्क था कि यह चुप्पी उन घटनाओं के प्रति कथित तौर पर समर्थन के समान थी।
राष्ट्र संवाद फोरम ने अपनी शिकायत में शाहाबुद्दीन को अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी सहयोगी बताया और 2024 के प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में उनकी कथित भूमिका की जांच की मांग की।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि और विवाद
शाहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने तय अवधि से लगभग दो वर्ष पहले ही इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रीय संसद के स्पीकर ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया।
शाहाबुद्दीन ने स्वयं अपने इस्तीफे के लिए स्वास्थ्य कारण बताए। उन्होंने कहा, 'मुझे सेहत से जुड़ी कई दिक्कतें हैं। इस समय मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है।'
हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि शाहाबुद्दीन ने इस वर्ष मई में लंदन में इलाज के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। कथित तौर पर इंटेलिजेंस एजेंसियों को इस संपर्क की जानकारी मिलने के बाद उन पर पद छोड़ने का दबाव बनाया गया।
गौरतलब है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि कथित फोन बातचीत ही इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं थी और मामला इससे कहीं अधिक जटिल है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बीएनपी नेतृत्व वाली सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही है। जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद शाहाबुद्दीन शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों में अकेले ऐसे थे जो पद पर बने रहे — जो तब से राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ था।
आईसीटी में दाखिल ये शिकायतें बांग्लादेश में उत्तर-2024 राजनीतिक जवाबदेही की प्रक्रिया का नवीनतम अध्याय हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मामला औपचारिक अभियोजन की दिशा में आगे बढ़ता है या नहीं।