बांग्लादेश के निर्यातक भारत-वियतनाम-चीन से पिछड़े, उत्पादन लागत में 30-40% बढ़ोतरी
सारांश
मुख्य बातें
ऊर्जा, वित्तपोषण और लॉजिस्टिक्स की तेज़ी से बढ़ती लागत के कारण बांग्लादेश के निर्यातक भारत, वियतनाम और चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के सामने अपनी बाज़ार हिस्सेदारी गँवाते जा रहे हैं। द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत के अनुमान बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में गैस-बिजली दरों, मज़दूरी, ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के चलते उत्पादन लागत में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है।
निर्यात आँकड़ों में गिरावट
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश का वस्तु निर्यात लगभग 5 प्रतिशत घटकर 47.74 अरब डॉलर रह गया। इसी अवधि में वियतनाम का निर्यात 16.8 प्रतिशत और चीन का 5.5 प्रतिशत बढ़ा। यह तुलना स्पष्ट करती है कि बांग्लादेश का संकट महज़ वैश्विक माँग में कमी का नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक लागत संरचना का है।
मामूली कीमत का अंतर भी घातक
रिपोर्ट में एक उद्योग विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि यदि बांग्लादेश का एफओबी (फ्री-ऑन-बोर्ड) मूल्य किसी प्रतिस्पर्धी देश से केवल 1-2 प्रतिशत अधिक हो, तो खरीदार ऑर्डर दूसरी जगह भेज सकते हैं। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक पूर्व निदेशक ने स्पष्ट किया कि 4 डॉलर कीमत वाले परिधान के 10 लाख पीस के ऑर्डर में केवल 1-2 प्रतिशत का मूल्य अंतर 40,000 से 80,000 डॉलर तक का नुकसान पहुँचा सकता है।
बंदरगाह शुल्क में भारी इज़ाफा
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चटग्राम बंदरगाह की नई टैरिफ व्यवस्था के तहत सेवा शुल्क में औसतन 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। 20 फुट के कंटेनर का शुल्क 11,849 टका से बढ़कर 16,243 टका हो गया — यानी करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब निर्यातक पहले से ही ऊर्जा और वित्तपोषण की ऊँची लागत से जूझ रहे हैं।
वित्तपोषण और बाहरी दबाव
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष फजलि शमीम एहसान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं या वित्तपोषण मंजूर करने में काफी समय लगा रहे हैं, जबकि सरकार लगातार समर्थन देने की अपील कर रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ ने निर्यातकों पर दबाव और बढ़ा दिया है।
आगे की राह
गौरतलब है कि बांग्लादेश का परिधान क्षेत्र देश के कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा है और लाखों श्रमिकों की आजीविका इससे जुड़ी है। आलोचकों का कहना है कि यदि लागत संरचना में सुधार नहीं किया गया और बैंकिंग प्रणाली से त्वरित वित्तपोषण सुनिश्चित नहीं हुआ, तो बाज़ार हिस्सेदारी की यह क्षति दीर्घकालिक हो सकती है। निर्यात नीति में संरचनात्मक सुधार और ऊर्जा लागत को नियंत्रित रखना बांग्लादेश की अगली सबसे बड़ी प्राथमिकता बताई जा रही है।