बांग्लादेश में खसरे का कहर: 32,000 से अधिक मामले, 250 से ज़्यादा मौतें; वैक्सीन खरीद में देरी पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप धारण कर चुका है। मार्च 2026 के मध्य से अब तक 32,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं और 250 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट की जड़ें सितंबर 2025 में अंतरिम सरकार द्वारा यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद रोकने के फैसले में हैं।
प्रकोप की शुरुआत और विस्तार
रिपोर्टों के अनुसार, यह बीमारी जनवरी 2026 में म्यांमार सीमा के निकट रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में उभरी और तेज़ी से फैलते हुए देश के 64 में से 58 जिलों तक पहुँच गई। इस दौरान 21,000 से अधिक मरीज़ों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा।
बांग्लादेशी अखबार 'द डेली स्टार' ने अपनी रिपोर्ट में सरकार की उस खुली निविदा प्रक्रिया (ओपन टेंडर प्रोसेस) की आलोचना की है, जिसे अपनाने के बाद लंबी देरी हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले से चेतावनी दी गई थी कि नियमित टीकाकरण बाधित होने पर बीमारी फैलने का ख़तरा है, फिर भी वैक्सीन खरीद रोक दी गई।
वैक्सीन नीति की विफलता
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2025 में केवल 59 प्रतिशत योग्य बच्चों को ही खसरे का टीका लग सका। उल्लेखनीय है कि ये आँकड़े बाद में आधिकारिक वेबसाइटों से हटा दिए गए। इससे पहले, बांग्लादेश सरकार खसरा और रूबेला वैक्सीन की आपूर्ति के लिए मुख्यतः यूनिसेफ पर निर्भर थी, जिसके लिए गावी (Gavi) और सरकारी कोष से वित्तपोषण होता था।
बांग्लादेश के 'कवरेज इवैल्यूएशन सर्वे 2026' से पता चला है कि खसरा-रूबेला की पहली खुराक का कवरेज 2019 के 88.6 प्रतिशत से घटकर 2023 में 86 प्रतिशत रह गया, जबकि दूसरी खुराक का कवरेज 89 प्रतिशत से गिरकर 80.7 प्रतिशत हो गया। गौरतलब है कि खसरे के प्रसार को रोकने के लिए कम से कम 95 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज आवश्यक माना जाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
आईईडीसीआर (IEDCR) के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक एएसएम आलमगीर के अनुसार, 2024 से विटामिन-ए वितरण अभियान के असफल रहने से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता और कमज़ोर पड़ गई है, जिसने प्रकोप को और भीषण बनाने में योगदान दिया।
डीजीएचएस (DGHS) में रोग नियंत्रण के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने बताया कि हालाँकि बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में यूनिसेफ के ज़रिए वैक्सीन खरीद पुनः शुरू की और आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया, लेकिन संक्रमण फैलने की मौजूदा गति को देखते हुए स्थिति के जल्द नियंत्रण में आने की संभावना कम है।
भ्रष्टाचार के आरोप और कानूनी कार्रवाई
रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के वकील बिप्लब कुमार दास ने अंतरिम सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार और वैक्सीन खरीद में विफलता को लेकर देश के भ्रष्टाचार-रोधी आयोग (एंटी-करप्शन कमीशन) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत जवाबदेही की माँग को और तेज़ करती है।
आगे की राह
यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अनिश्चितता और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण कवरेज को शीघ्र 95 प्रतिशत से ऊपर ले जाए बिना इस प्रकोप पर काबू पाना मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी और पारदर्शी वैक्सीन प्रबंधन नीति ही आगे का रास्ता बता सकती है।