15 अगस्त 2026
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बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस: 15 अगस्त 1975 को हुई थी बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या

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बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस: 15 अगस्त 1975 को हुई थी बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या

सारांश

15 अगस्त 1975 की रात ढाका के धनमंडी में जो हुआ, वह सिर्फ एक हत्याकांड नहीं था — वह एक राष्ट्र की नींव पर प्रहार था। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के 18 सदस्यों की हत्या ने बांग्लादेश को उसके जन्म के साढ़े तीन साल बाद ही गहरे राजनीतिक संकट में धकेल दिया — एक घाव जो आज भी भरा नहीं है।

मुख्य बातें

15 अगस्त 1975 की रात ढाका के धनमंडी स्थित आवास पर सेना के कुछ अधिकारियों ने हमला कर बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान (बंगबंधु) की हत्या कर दी।
इस हमले में शेख मुजीब की पत्नी, तीन पुत्रों और बहुओं समेत परिवार के 18 सदस्य मारे गए।
पुत्रियाँ शेख हसीना और शेख रेहाना उस समय विदेश में होने के कारण बच गईं।
1981 से शोक दिवस मनाने की शुरुआत हुई; 1996 में आवामी लीग सरकार ने इसे आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश घोषित किया।
2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद मुहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने यह अवकाश अस्थायी रूप से हटाया, किंतु विरोध के बाद इसे पुनः बहाल किया गया।

बांग्लादेश में प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है — वह काली रात जब देश के संस्थापक और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान (बंगबंधु) की ढाका स्थित उनके आवास पर सेना के कुछ अधिकारियों द्वारा उनके परिवार सहित निर्मम हत्या कर दी गई थी। यह त्रासदी 15 अगस्त 1975 की रात घटी, जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिले केवल साढ़े तीन वर्ष ही बीते थे।

हत्याकांड का घटनाक्रम

15 अगस्त 1975 की रात सेना के कुछ अधिकारियों ने ढाका के धनमंडी स्थित शेख मुजीबुर रहमान के आवास पर हमला किया। इस हमले में शेख मुजीबुर रहमान, उनकी पत्नी शेख फजिलातुन्नेसा मुजीब, पुत्र शेख कमाल, शेख जमाल, शेख रसेल तथा बहुओं समेत परिवार के 18 सदस्य मारे गए। उस समय उनकी दो पुत्रियाँ — शेख हसीना और शेख रेहाना — विदेश में थीं, जिस कारण वे इस नरसंहार से बच गईं।

बंगबंधु की ऐतिहासिक विरासत

शेख मुजीबुर रहमान को 'बंगबंधु' — अर्थात 'बंगाल का मित्र' — की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1948 से ही पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली भाषा और संस्कृति के अधिकारों के लिए आंदोलन छेड़ा। 7 मार्च 1971 को सोहरावर्दी उद्यान में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने लाखों बंगालियों में मुक्ति संग्राम की चेतना जगाई। उनका वह नारा — 'एबारेर संग्राम मुक्तिर संग्राम, एबारेर संग्राम स्वाधीनतार संग्राम' — आज भी बांग्लादेश की राष्ट्रीय स्मृति में जीवित है।

16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना और शेख मुजीब उसके पहले राष्ट्रपति बने। गौरतलब है कि जिस नेता ने देश को आज़ादी दिलाई, उसी की हत्या उसी देश की धरती पर हुई — यह बांग्लादेश के इतिहास का सबसे गहरा घाव है।

राष्ट्रीय शोक दिवस की परंपरा

1981 से 15 अगस्त को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। 1996 में जब आवामी लीग सत्ता में आई, तब इस दिन को आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया। तब से यह दिन देश के लोकतंत्र, संविधान और मुक्ति संग्राम की भावना को स्मरण करने का राष्ट्रीय अवसर बन गया। राजनीतिक दलों के अलावा नागरिक समाज, सांस्कृतिक संगठन और छात्र संगठन भी इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

2024 के बाद का राजनीतिक उलटफेर

यह ऐसे समय में आया है जब 2024 में बांग्लादेश में व्यापक हिंसा के बीच शेख हसीना की सरकार गिरा दी गई। इसके बाद मुहम्मद युनूस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने देश की बागडोर संभाली। युनूस सरकार ने कुछ समय के लिए राष्ट्रीय शोक दिवस का सार्वजनिक अवकाश समाप्त कर दिया था, परंतु व्यापक विरोध के बाद इसे पुनः बहाल करना पड़ा। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि बंगबंधु की स्मृति आज भी बांग्लादेश की राजनीति में कितनी संवेदनशील और केंद्रीय है।

आज का महत्व

पचास वर्ष बाद भी 15 अगस्त बांग्लादेश के सामूहिक अंतःकरण पर एक अमिट छाप छोड़ता है। लाखों बांग्लादेशी इस दिन बंगबंधु के आदर्शों — समानता, लोकतंत्र और बंगाली पहचान — पर चलने का संकल्प लेते हैं। यह दिवस केवल शोक का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्प्रतिज्ञा का भी अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्ता-संघर्ष का भी प्रतीक बन गया है — युनूस सरकार द्वारा अवकाश हटाने और फिर बहाल करने की घटना इसी का प्रमाण है। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि बंगबंधु की विरासत आज भी बांग्लादेश की राजनीति का सबसे विभाजनकारी और संवेदनशील धुरा है। जो सरकार इस दिवस को मान्यता देती है, वह आवामी लीग की वैचारिक वंशज मानी जाती है — और जो नहीं देती, वह खुद को विपक्ष में खड़ा पाती है। यह इतिहास और राजनीति का वह संगम है जहाँ शोक भी पक्षधरता बन जाता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में राष्ट्रीय शोक दिवस क्यों मनाया जाता है?
बांग्लादेश में 15 अगस्त को राष्ट्रीय शोक दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 1975 में इसी दिन देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के 18 सदस्यों की सेना के कुछ अधिकारियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। 1996 से इसे आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
शेख मुजीबुर रहमान की हत्या 15 अगस्त 1975 की रात ढाका के धनमंडी स्थित उनके आवास पर हुई थी। सेना के कुछ अधिकारियों ने उनके घर पर हमला किया, जिसमें उनके परिवार के 18 सदस्य मारे गए।
बंगबंधु का अर्थ क्या है और यह उपाधि किसे मिली थी?
'बंगबंधु' का अर्थ है 'बंगाल का मित्र'। यह उपाधि बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान को दी गई थी, जिन्होंने 1948 से बंगाली भाषा और संस्कृति के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता का नेतृत्व किया।
शेख हसीना और शेख रेहाना 1975 के हमले से कैसे बचीं?
15 अगस्त 1975 की रात जब ढाका में हमला हुआ, उस समय शेख मुजीबुर रहमान की दोनों पुत्रियाँ — शेख हसीना और शेख रेहाना — विदेश में थीं। इसी कारण वे इस नरसंहार से बच सकीं।
2024 में बांग्लादेश में राष्ट्रीय शोक दिवस के अवकाश को लेकर क्या विवाद हुआ?
2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद मुहम्मद युनूस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार ने राष्ट्रीय शोक दिवस का सार्वजनिक अवकाश कुछ समय के लिए समाप्त कर दिया था। व्यापक जन-विरोध के बाद अंतरिम सरकार को यह अवकाश पुनः बहाल करना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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