बिमल पटेल ITLOS जज चुने गए: समुद्री कानून न्यायाधिकरण में भारत की निरंतर उपस्थिति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंतरराष्ट्रीय विधिवेत्ता बिमल पटेल को 19 जून 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित समुद्री कानून सम्मेलन के 36वें सत्र में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) का न्यायाधीश निर्वाचित किया गया। यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) के 172 सदस्य देशों ने उन्हें 168 वैध मतों में से 115 मत देकर इस प्रतिष्ठित पद पर चुना। वे सितंबर 2026 में जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित इस न्यायाधिकरण में कार्यभार संभालेंगे।
भारत की निरंतर प्रतिनिधित्व
पटेल का निर्वाचन ऐसे समय में हुआ है जब ITLOS में भारत की वर्तमान प्रतिनिधि, उपाध्यक्ष नीरू चड्ढा, सितंबर 2026 में अपना नौ वर्षीय कार्यकाल पूरा कर रही हैं। पटेल के चयन से इस वैश्विक न्यायिक मंच पर भारत की उपस्थिति बिना किसी अंतराल के जारी रहेगी। गौरतलब है कि भारतीय राजनयिकों ने पिछले वर्ष से ही संयुक्त राष्ट्र में उनके चुनाव के लिए सक्रिय अभियान चलाया था।
बिमल पटेल: परिचय और योग्यता
पटेल वर्तमान में गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति हैं और संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग के सदस्य भी हैं। उन्होंने नीदरलैंड की लेडन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में पीएचडी की है। इसके अतिरिक्त, वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी हैं।
चुनाव परिणाम और एशियाई प्रतिनिधित्व
इस वर्ष ITLOS की सात सीटों पर चुनाव हुए, जिनमें से दो सीटें एशियाई क्षेत्र के लिए आरक्षित थीं। पटेल के साथ वियतनाम की नैग्यून लन अन थी भी एशियाई कोटे से निर्वाचित हुईं। थाईलैंड के मौजूदा न्यायाधीश क्रियांग्सक किटिचासरी, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था, यह चुनाव हार गए। इंडोनेशिया ने मतदान से पूर्व ही अपना उम्मीदवार वापस ले लिया था।
सरकार और राजनयिक प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पटेल को बधाई देते हुए UNCLOS सदस्य देशों का आभार व्यक्त किया। भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने एक्स पर कहा कि यह चुनाव 'बहुपक्षवाद और समुद्री कानून के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।'
ITLOS की भूमिका और महत्व
हैम्बर्ग स्थित ITLOS समुद्रों और महासागरों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों का निपटारा करता है और समुद्री कानून की व्याख्या करने का अधिकार रखता है। भारत-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते समुद्री तनाव और दक्षिण चीन सागर विवादों के मद्देनज़र इस न्यायाधिकरण में भारत की सक्रिय भागीदारी रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पटेल का सितंबर 2026 से शुरू होने वाला कार्यकाल भारत को वैश्विक समुद्री शासन में और अधिक प्रभावशाली भूमिका दिलाएगा।